मूवी रिव्यू: ‘सचमुच अधूरी साबित हुई’ फिल्म‘ हमारी अधूरी कहानी’

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महेश भट्ट ने मोस्टली अपनी जिन्दगी से प्रेरित कहानियों पर फिल्में बनाई हैं । उनमें अर्थ जैसी फिल्म या सारांश के लिये उन्हें हमेशा याद किया जायेगा लेकिन एक अरसे बाद उनके द्वारा लिखी कहानी पर बनी फिल्म‘ हमारी अधूरी कहानी’ के साथ युवा निर्देशक मोहित सूरी जरा भी न्याय नही कर पाये । फिल्म जो कहना चाहती है वो अंत तक नहीं कह पाती । दूसरे इस अति इमोशनल फिल्म में एक बार इमोशन भी उभर कर नहीं आ पाते ।

कहानी
विद्या बालन यानि वसुधा एक ऐसी मिडिल क्लास फैमिली से है जंहा आज भी शादी के लिये लड़की से उसकी मर्जी नहीं पूछी जाती । इसलिये उसका विवाह एक ऐसे शख्स से राजकुमार राव यानि हरि से कर दिया जाता है जो आज भी बीवी को अपनी जागीर, अपनी प्राॅपर्टी समझता है । लेकिन अचानक वो अपनी पत्नि और बच्चे को छोड़ कहीं गायब हो जाता है । बाद में वसुधा अपने बच्चे के पालन पोषण के लिये नोकरी कर लेती है । पांच साल बाद अचानक एक दिन उसकी मुलाकात इमरान हाशमी यानि आॅरव रूपारेल से होती है ।

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आॅरव एक सो आठ होटलों का अकेला मालिक हैं । महज पेतींस साल की उम्र में उसने ये सब हासिल किया है । वो वसुधा को देखते ही उसे चाहने लगता है । एक दिन वसुधा को पुलिस से पता चलता है कि असल में उसका पति हरि एक उग्रवादी है जो अभी तक चार पत्रकारों की हत्या कर चुका है । ये बात वो आॅरव को बताते हुए कहती है कि पुलिस ने उसे ताकीद किया हे कि जैसे ही उसे उसके पति के बारे में पता चले तो वो उन्हें उसके बोर में फौरन बताये वरना उसे गिरफ्तार किया जा सकता है । उसे अपने बेटे सांझ की फिक्र है । तो आॅरव उसे अपने दुबई के होटल में शिफ्ट कर देता है । एक दिन जब आॅरव उसे अपनी कहानी बताते हुए कहता है कि उसकी मां और वो भी ऐसे ही हादसों से गुजरे हैं जो उसके साथ हो रहे हैं । इसके बाद वो उसके सामने अपने प्यार का इजहार करता है तो वसुधा उसे अपने शादीशुदा होने की मजबूरी बताते हुए एक भारतीय औरत होने के नाते उसके प्यार को ठुकरा देती है । लेकिन जब इमरान उसे अपनी मां से मिलवाता है तो वसुधा मान जाती है ।

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इसके बाद जब वो इंडिया वापस लौटती है तो उसे हरि उसके घर में छिपा हुआ मिलता है । वो उसे अपने निर्दोश होने की कहानी सुनाता है तो वसुधा उसे पहले तो अपने और आॅरव के बारे में बताती है बाद में वो उसे पुलिस के पास जाकर अपनी कहानी बताने के लिये कहती है लेकिन हरि आॅरव और उसके संबन्धों को लेकर इतना खफा है कि बाद में वो अदालत में जानबूझकर सारे अपराध स्वीकार कर लेता है । यहां वसुधा को लगता है कि हरि उसके प्यार के लिये बलिदान दे रहा है जबकि वो उससे बदला लेने के लिये ऐसा करता है । जिससे आॅरव और वसुधा कभी न मिल पाये । यहां एक बार फिर आॅरव सामने आता है और वो हरि को निरपराध साबित करने के लिये अपनी जान तक दे देता है । हरि बाहर आ जाता है लेकिन वसुधा उसकी सच्चाई जानने के बाद उसे छोड़ कर चली जाती है । करीब बीस साल पश्चात वसुधा के मरने के बाद हरि उसकी अस्थियां वहीं जाकर समर्पित करता है जंहा आॅरव की मौत हुई थी । इस तरह मरने के बाद वो दोनों को मिला देता है ।

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निर्देषन
महेष भट्ट द्वारा लिखी कहानी के साथ इस बार मोहित बिलकुल न्याय नहीं कर पाये । सुना है जिन दिनों महेश ये कहानी लिख रहे थे तो कहानी बाद उपन्यास में तब्दील हो गई थी । बहरहाल वो उपन्यास भी अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ लेकिन कुछ अरसे बाद मोहित ने उनकी द्वारा लिखी कहानी पर अपने हिसाब से स्क्रिप्ट तैयार की,लेकिन वो फिल्म को ढंग से शेप नहीं दे पाये । इसलिये शुरू से अंत तक फिल्म न तो दर्षक को अपने आपसे जोड़ पाती है न ही भावनाये जगा पाती है । दरअसल इस तरह के सब्जेक्ट् मोहित का टेस्ट ही नहीं रहे । इसीलिये उसने स्क्रिप्ट में फेर बदल भी किया लेकिन वो और ज्यादा कमजोर हो गई ।लिहाजा फिल्म में न तो वे इमोशन जगा पाये और न ही कहानी को स्पष्ट कर पाये । राजकुमार का मेकअप बहुत ही खराब है क्लोजअप में उसकी बढ़ी हुई शेव पर सिर्फ सफेदी लगा दी वो भी बेहद घटिया तरीके से । इसके अलावा इमरान के सचिव व दोस्त का केरेक्टर बहुत ही हास्यप्रद रहा । दर्शक उसके गिने चुने डायलॉग्ज पर हंसते हैं । दुबई की कुछ लोकेशंस अच्छी रही खासकर एक बेहद खूबसूरत गार्डन शायद पहली बार किसी फिल्म में दिखाया गया है । बावजूद इसके वे ‘हमारी अधूरी कहानी’ को पूरी नहीं कर पाये इसीलिये वह सचमुच अधूरी साबित हुई ।

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अभिनय
विद्या बालन एक सषक्त अभिनेत्री है वो फिल्म में बेहद खूबसूरत लगी है । उसने अपने रोल में मेहनत की लेकिन रोल षुरू से आखिर तक स्पश्ट नहीं हो पाया? इसलिये उसकी मेहनत पूरी तरह जाया गई । इमरान ने यहां अपनी किसिंग किलर की इमेज के खिलाफ काम किया हैं। इस बात को लेकर एक खास दर्शक वर्ग असंतुष्ट नजर आता है । ऊपर से वे जब रोते है तो दर्शक हंसता है । जंहा तक राजकुमार राव की बात की जाये तो जिस तरह से उसे ग्रे शेड बताया गया है उस तरह से तो हर पति गे्र होना चाहिये क्योंकि कौन सा पति ये सुनकर चुप रहेगा कि उसकी पत्नि उसके सामने स्वीकार करे कि वो किसी और से बहुत प्यार करती है । राजकुमार बहुत उम्दा फनकार है लेकिन यहां वो अपनी भूमिका केा लेकर कन्फ्यूजन नजर आते हैं । एक अरसे बाद इमरान की मां के रोल में साउथ इंडियन अभिनेत्री अमला नजर आई लेकिन उसका रोल इतना कमजोर था कि वे जरा भी प्रभावित नहीं कर पाती ।

संगीत

भट्ट कैंप की फिल्मों का म्युजिक हमेशा लुभावना होता है लेकिन इस बार फिल्म में तीन तीन म्यूजिक कंपोजर जीत गांगुली, अमी मिश्रा तथा मिथुन के होते भी साधारण रहा । बस टाइटल गीत ही अच्छा है ।

क्यों देखें
फिल्म देखने की एक भी वजह नजर नहीं आती ।


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Mayapuri

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