मूवी रिव्यू: फिल्म‘ इश्क के परिंदे’ प्यार की उड़ान भरने में सफल

1 min


एक वक्त था जब मुस्लिम परिवेष की लव स्टोरी फिल्में आती थी, उनमें कहानी और संगीत कमाल का होता था।निर्देशक शाकिर खान की फिल्म ‘ इश्क के परिन्दे’ में वहीं सब एक अरसे बाद देखने का मिला । निर्देशक ने फिल्म में हर चीज बड़े ही करीने से सजाकर पेश की है ।

बंटवारे के बाद कितने ही घर ऐसे हैं जिनके सदस्य भी बंट गये थे यानि आधे उधर चले गये,आधे इधर रह गये। ऐसे ही परिवार,पाकिस्तान से सीन यानि प्रियंका मेहता अपनी अम्मी के साथ लखनऊ अपने मामूजान के यहां आती है। उन्हीं के पड़ोस में रहने वाला फैज़ यानि रिशी वर्मा सीन को देखते ही उसे प्यार करने लगता है। सीन भी उसे चाहने लगती है । एक बार सीन एक कत्ल होते देख लेती है । वो कातिलों को देख लेती है । लेकिन जब कातिल उसे मारने आते हैं तो सीन को पता चलता है कि उनका बाॅस फैज़ का बड़ा भाई है । षीन ऐसे परिवार से नाता नहीं जोड़ना चाहती जंहा कातिल बसते हो । फैज उसे काफी समझाता है यहां तक उसके लिये अपना परिवार तक छौड़ने के लिये तैयार हो जाता है । लेकिन सीन नहीं मानती । बाद में पता चलता है कि सीन की मंगनी उसके मामू के लड़के शादाब से तय हो जाती है । यहां उसकी दोस्त और मामू की लड़की गजाला उसे समझाती है कि प्यार तो अल्ला की दी न्यामत हैं उसे मत ठुकरा । तो सीना फैज के साथ घर से भाग जाती है । लेकिन शादाब उन्हें पकड़ लेता हैं यहां फैज का भाई आकर उन्हें बचाता है । अंत में शादाब को दोनों के प्यार के आग झुकना ही पड़ता है ।

इश्क के परिन्दे प्यार करने वाले दो ऐसे परिन्दों की कहानी हैं जो प्यार के उन्मुक्त आसमान में सदा उड़ना चाहते हैं। दूसरे वे अपने मासूम प्यार की तरह खुद भी इतने ही मासूम है कि उनकी मासूमियत को देखते हुये दर्शक09-Rishi-Priyanka

शुरू से अंत तक उनके साथ बना रहता है । बेशक सीन शादाब से शादी तय होने के बाद घर से भाग कर गलती करती हैं बावजूद उसकी ये गलती आराम से माफ कर दी जाती है । क्योंकि एक अरसे बाद किसी फिल्म में इस कदर शाइस्तगी भरा प्यार देखने को मिला । इसलिये दर्षक ऐसी बातों का नजरअंदाज कर देता है । इसके अलावा फिल्म को प्रभावशाली बनाने में कई और चीजों का गहरा योगदान हैं जैसे प्यार को और गहराईयों तक पहुंचाता है किरदारों का लुक और कहानी से मेल खाती उनकी ड्रेसिस, कर्णप्रिय संगीत तथा परफेक्ट कास्टिंग । बेषक फिल्म के कितने ही कलाकारों की यह पहली फिल्म हैं, रिशी वर्मा और प्रियंका मेहता की जोड़ी बहुत ही अच्छी रही । उन दोनों को देख एक बार भी ऐसा नहीं लगा कि ये उनकी पहली फिल्म है ।दोनों ने पूरे आत्मविश्वास से अपनी भूमिकाओं को आत्मसात किया है । इनका साथ मंजुल आजाद, यासिर खान तथा मानिषा राॅय और ढेर सारे अन्य आर्टिस्टों ने पूरे मनोयोग से दिया है । इन सारी खूबियों के रहते ही, इष्क के परिंदे प्यार की उड़ान भरने में सफल रहे ।


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये