फिल्म ‘ जय हो डेमोक्रेसी’ बार बार दोहराया गया बासी इशू

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वार छौड़ न यार, क्या दिल्ली क्या लाहौर तथा हम तुम दुश्मन दुश्मन आदि फिल्मों में इंडिया पाकिस्तान को भुनाने की कोशिश की गई है। वो अलग बात की वे सारी कोशिशे असफल साबित हुई। प्रख्यात रंगकर्मी और लेखक रंजीत कपूर ने अपनी फिल्म ‘ जय हो डेमोकेसी’ में इंडिया पाकिस्तान तथा आज की राजनीति को लेकर सटायर बनाया है लेकिन दर्शक इन चीजों को देखने और सुनने का इतना अभ्यस्त हो चुका है कि कम से कम इसl3chpld17ihblefn.D.0.Aamir-Bashir-Adil-Hussain-Seema-Biswas-Jai-Ho-Democracy-Film-Pic सब्जेक्ट पर बनी फिल्मों को तो देखते ही उनसे दूर भागता है।

इंडिया पाकिस्तान नोमेंस लाइन पर कहीं से एक मुर्गी घुस आती है। लिहाजा बाद में दोनों तरफ के सैनिक मुर्गी पर आपना अपना दावा पेश करने लगते हैं । बात आर्मी से होती हुई राजनैतिक गलियारों तक जा पंहुचती है । फौरन सदन में एक इमरजैंसी बैठक बुलाई जाती है। जिसमें पक्षविपक्ष के नेता बैठते हैं जैसे औमपुरी,सीमा विश्वास,आदिल हुसैन,सतीश कौशिक ,आमिर बशीर तथा अध्यक्ष की भूमिका में अनु कपूर।
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इनकी बात शुरू होती है मुर्गी से लेकिन बाद में वो कहीं से कहीं पहुंच जाती है । अंत में ये बहस मारपीट तक पहुंच जाती है ।

xigrt8ihqogtmo2s.D.0.Jai-Ho-Democracy-Film-Imageफिल्म में स्टायर है लेकिन जाना पहचाना। इसलिये न तो वह नया लगता है और न ही उसे देखकर हंसी आती है। रही बात इंडिया पाकिस्तान बार्डर पर दोनों तरफ के सैनिकों की बात तो जो भी हम उनके आपसी भाइचारे को फिल्म में दिखाते है वो कोरी कल्पना होती है जिसे देखकर अब तो दर्शक चिड़ जाता है । वैसे भी रंजीत साहब ने आज की राजनीति पर जो व्यंग्य कसा है उस पर ढंग से फिल्म नहीं बन पाई है । उनकी बेटी गुरशा कपूर ने भी दो छोटी छोटी भूमिकायें निभाई है। दर्शक पूर समय बस एक टक पर्दे की तरफ देखता रहता है और फिल्म खत्म होने के बाद बिना कोई प्रतिक्रिया दिये बाहर निल जाता है। इसलिये जय हो डेमोक्रेसी यानि बार बार दौहराया गया बासी इशू।


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Mayapuri

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