मूवी रिव्यू: ‘ जय जवान जय किसान’ कहानी से न्याय नहीं कर पाती

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विक्टोरियस इन्टरप्राइेजिज द्धारा निर्मित और मिलन अजमेरा द्धारा निर्देशित फिल्म‘ जय जवान जय किसान’ बेसिकली श्री लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी पर फिल्म है । लेकिन शायद उनके विषय में गहराई से रिसर्च नही किया इसीलिये लाल बहादुर समेत किसी भी किरदार को पूरी तरह रजिस्टर्ड नहीं किया गया ।
Jai Jaaan Jai Kisaan
फिल्म की कहानी लाल बहादुर के बचपन से शुरू हो उनके अंतकाल तक है । जिसमें उनकी दरिद्रता गरीबी के बीच उनका पढ़ना फिर षादी तथा उनका आजादी की लड़ाई में शमिल होना फिर उनका राजनैतिक जीवन और अंत में उनकी मौत । बेशक फिल्म में उनके जीवन के बारे में बचपन से अंत का दर्शन है लेकिन उसका फिल्मांकन बहुत ही नोसिखिया है । फिल्म में जितने भी किरदार है उनका लुक तथा कई जगह कास्टिंग भी काफी रांग है ।
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किसी फिल्म में पहली बार देखा गया कि गांधी जी इस तरह चलते थे या इतना लाउड बोलते थे या जवाहर लाल नेहरू इतने लंबे थे । इसके अलावा गांधी जी या लाल बहादुर की सभी में महज दस या बारह लोग ? गांधी जी की रैली में पंदह आदमी ? नहीं फिल्म का निर्देशन इस कदर अधकचरा है कि कोई नोसिखिया निर्देशक भी इससे बेहतन फिल्म बना सकता है। इसके लिये फिल्म के प्रोडयूसर जो इससे पहले भी एक फिल्म बना चुके हैं जिम्मेदार हैं । वरना ऐसे प्रसिद्ध किरदार पर बहुत अच्छी फिल्म बन सकती थी । अफसोस कि फिल्म कहानी के साथ न्याय नहीं कर पाती ।

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Mayapuri