मूवी रिव्यू: फिल्म ‘कागज के फूल्स’ मनोरजंन के साथ स्ट्रांग मैसेज

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निर्देशक अनिल कुमार चौधरी की फिल्म‘कागज के फूल्स’ बताती है कि किसी दूसरे की तरक्की देख उसे फाॅलों करने की महत्वाकांक्षा आपके घर में किस कदर अशांती फैला देती है कि पति पत्नि के संबन्ध तक टूट जाते हैं ।
विनय पाठक एक ईमानदार लेखक है । इसलिये वो अपनी किताब के साथ कोई समझौता करने के लिये तैयार नहीं है । लेकिन उसकी पत्नि मुग्धा गोडसे उसके लेखक दोस्त अमित बहल के बारे में उससे बात करते ताने देती रहती है कि उसकी हर तीन महीने में एक किताब निकलती है लेकिन उसकी अभी तक एक भी किताब नहीं निकल पाई क्योंकि वो नौकरी से ही चिपका हुआ है। विनय उसे समझाता है कि दूसरों को देखकर नहीं चलना चाहिये । रही बात उसकी तो, उसे जो आता है वो वही लिखेगा । बावजूद इसके मुग्धा की समझ में कुछ नहीं आता। एक दिन वो विनय को इतना कुछ कह देती है कि विनय घर छौड़ कर चला जाता है ।
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वह एक जूआखाने में जा पहुंचता है और शराब पीने के साथ ढेर सारा पैसा जीत जाता है। वही उसे एक कालगर्ल राइमा सेन मिलती है । नशे में वो रात उसी के साथ गुजारता है लेकिन वो आज भी अपनी पत्नि को प्यार करता है इसलिये राइमा के साथ रहते हुए भी उसे कभी छूता तक नहीं । विनय जुआरी नहीं है लेकिन एक बार वो जूए में दस लाख की मोटी रकम जीत जाता है । इस बीच उसे बीवी की याद आती है तो वो अपने घर निकल जाता है लेकिन जीत की सारी रकम राइमा को दे जाता है। बाद में राइमा को उसकी स्क्रिप्ट मिलती है तो वो प्रकाशक के मुताबिक उसमें संशोधन कर उसे छापवा देती है। किताब बाहर आते ही हिट हो जाती है। जब ये बात विनय को पता चलती है तो आग बबूला हो उठता है और प्रकाशक से सारी किताबें वापस मंगा लेता है। बाद में राइमा उसे मिलती है और उससे अपनी गलती की मांगी मांगती है। इस बीच जूए खाने के आदमी विनय का अपहरण करने की कोशिश करते हैं इसी में मुग्धा घायल हो जाती है। वहां राइमा सेन आकर पहले तो उसे जूए में जीती सारी रकम वापस करती है और उसे सब सच बताती है। बाद में मुग्धा विनय से माफी मांगते हुए फिर कभी ताने ने देने का वायदा करती है । लेकिन क्या वो आगे अपने वादे पर कायम रह पाती है ?
औरत पढ़ी लिखी हो या नहीं लेकिन दूसरों की तरक्की देख उसमें ईर्ष्या की भावना आना स्वाभाविक है । इस बात को लेकर बुनी गई इस कहानी को निर्देशक ने मनोरंजक तरीके से फिल्माया है । विनय पाठक बदलापुर के बाद एक बार अपने पुराने अंदाज में हैं। मुग्धा गोड्से ने महत्वाकांक्षी पत्नि को भली भांती निभाया है लेकिन उसका पंजाबी बोलना बहुत अखरता है। राइमा सेन ने अपनी भूमिका को सक्षम अभिनेत्री की तरह निभाया है । इन सब से अलग एक टिपिकल पंजाबी की भूमिका में सौरभ षुक्ला पूरी फिल्म में दर्शक को हंसाने में पूरी तरह कामयाब हैं ।फिल्म में गीत है लेकिन वे कहानी के अनुसार ही है । फिल्म मनोरजंन के साथ एक स्ट्रांग मैसेज भी देती है।


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Mayapuri

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