मूवी रिव्यू: हमारी भ्रष्ट न्याय प्रणाली पर प्रहार करती फिल्म‘ मिस टनकपुर हाजिर हो’

1 min


रेटिंग 2.5

पत्रकार से निर्देशक बने विनोद कापड़ी इससे पहले कुछ डॉकूमेन्ट्रीज बना चुके हैं ।‘ मिस टनकपुर हाजिर हो’ उनकी पहली फिल्म है । फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है । जिसके जरिये निर्देशक ने हमारी भ्रश्ट न्याय प्रणाली पर जमकर प्रहार किया है ।फिल्म हंसते हंसाते दर्शक को कितने ही तथ्यों से परिचित करवाती है ।

कहानी

राजस्थान के गांव टनकपुर में वहां का प्रधान सुआ लाल अपनी मनमानी चलाता रहता है । उसके दायें बायें भीमा और शास्त्री लगे रहते हैं जो उसके गलत कार्यों में उसका साथ देते हैं। सुआ लाल बुढोती में एक कड़क जवान लड़की माया से शादी कर लेता है लेकिन वो उसे शारिरिक तौर संतुष्ट नहीं कर पाता ।लिहाजा माया को गांव का एक सीधा सादा युवक अर्जुन भा जाता है। उनके संबन्धों की भनक सुआ लाल को लग जाती है और एक दिन वो दोनों को रंगे हाथों पकड़ लेता है । इसके बाद वो अपने साथियों के साथ मिलकर अर्जुन पर मिस टनकपुर रह चुकी अपनी भैंस के बलात्कार का आरोप लगा देता है । इसके बाद पुलिस, वकील और ढेर सारे लागों के बीच झूठ को सच बनाने के लिये लेन देन का खेल चलता है ।

miss-tanakpur-hazir-ho_640x480_71434592455

निर्देशन

विनोद कापड़ी की ये पहली फिल्म हैं । बेशक तकनीकी और पटकथा में वे थोड़ा कमजोर रह गये लेकिन फिर भी वे जो कहना चाहते हैं फिल्म के माध्यम से कहने में सफल रहे । फिल्म को हरियाणवी परिवेश में ढाल दिया गया है । लेकिन निर्देशक का ये प्रयास जाया हो गया । क्योंकि अनु कपूर, ओम पुरी तथा रवि किशन आदि न तो हरियाणवी बोल पाते हैं और न ही राजस्थानी । बल्कि ओमपुरी तो हरियाणवी के नाम पर पंजाबी बोलते नजर आते हैं । फिर भी पहले प्रयास के हिसाब से विनोद अच्छे नंबरों से पास करार दिये जाते है । बेशक उनके पास तकनीकी पक्ष थोड़ा कमजोर रहा लेकिन उनकी सोच कमाल की है । इसलिये उनकी अगली फिल्म डेफिनेली हर तरह से एक चोकस फिल्म होगी। फिल्म हल्के फुल्के चुटकलों को अच्छी तरह पिरोया गया है तथा फिल्म के कथानक अनुसार उसकी सादगी बरकरार रखी है । अभिनय अनु कपूर और ओमपुरी के लिये उनकी भूमिकाओं में कुछ नया नहीं था इसलिये वे उसे मजे लेते हुए निभाते प्रतीत होते है । सजंय मिश्रा अपनी भाव भंगिमाओं से हंसाते है लेकिन वे लगता है टाइप्ड होते जा रहे हैं । रवि का भाषा पर कोई बस नहीं चल पाया लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका में पूरी तरह संयत रहते हुए बढि़या तरह से निभाया । राहुल बग्गा ने अपने रोल की सादगी को अंत तक बनाये रखा । ऋषिता भट्ट के हिस्से में ज्यादा कुछ नहीं आ पाया ।

 

ravi_3

संगीत

शुरू में ही एक आइटम सांग है जो जरा भी नहीं अखरता । बाकी गीत कहानी के अनुसार है ।

क्यों देखें

बेशक ये फिल्म मास को अपील नहीं करती बावजूद इसके फिल्म में मनोरंजन तो हैं । इसलिये चाहे तो मास भी फिल्म का लुत्फ उठा सकता है । ———

SHARE

Mayapuri