मूवी रिव्यू ‘रहस्य’ थ्रिल कम लेकिन रोचक सस्पेंस

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दिल्ली के आरूषि मर्डर कांड पर आधारित फिल्म ‘रहस्य’ की कहानी कोराइटर ने कुछ इस तरह से घुमाया है कि चाहते हुये भी कोई उस पर आरोप नहीं लगा सकता कि फिल्म आरूशी हत्या कांड पर आश्रित फिल्म है ।इस थ्रिलर सस्पेंस फिल्म को निर्देशक मनीश गुप्ता ने बहुत ही सलीके से हैंडल किया है । इसलिये शुरू से अंत तक फिल्म में रोचकता बनी रहती है ।

आशिश विद्यार्थी और टिस्का चोपड़ा दोनों मियां बीवी डाॅक्टर हैं । उनकी अट्ठारह वर्षीय बेटी का मर्डर हो जाता है । मर्डर का केस इंस्पेक्टर मनोज मोर्या के होथ में है । वो बेटी के मर्डर का दोषी उसके पिता आशिष को मानते हुये अरैस्ट कर लेता है । इस तरह एक तरह से केस का समापन हो जाता है लेकिन टिस्का के आग्रह पर केस सीबीआई के पास चला जाता है । बाद में जब सीबीआई आॅफिसर के के मेनन केस साॅल्व करता है तो कितने ही चेहरों से नकाब उठता है ।
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किसी रीयल कहानी पर फिल्म बनाना वो भी ऐसे कि फिल्म पर रीयल कहानी पर फिल्म बनाने का विलेम भी न आये । फिल्म की स्पेशिलिटी भी यही हे कि दर्शक को पता है कि फिल्म आरूषि कांड पर ही आधारित है उसकी शुरूआत और अंत भी लगभग वैसा ही है लेकिन कहानी में कुछ इस तरह से अलग ट्विस्ट पैदा किये गये हैं कि पूरी कहानी का नक्षा ही बदल दिया जाता है ।इसके लिये फिल्म के लेखक और निर्देशक दोनों को ही श्रेय जाता है । हांलाकि निर्देशक अगर थोड़ी और मेहनत करता तो फिल्म और भी दिलचस्प हो सकती थी । क्योंकि फिल्म में थ्रिल कम और सस्पेंस रोचक है ।
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आशिश,टिस्का चोपड़ा ने अपनी भूमिकायें बढि़या तरीके से निभाई हैं लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान आकर्शित किया मराठी पुलिस आॅफिसर की भूमिका में मनोज मौर्या ने । के के मेनन तो है ही बेहतरीन अदाकार इसलिये सीबी आई आॅफिसर की भूमिका उन्होंने पूरी तनमन्यता से निभाई है ।बाकी मीता वशिष्ठ तथा अाश्विनी केलेस्कर भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते पाये गये । सभी कुछ ठीक होने के बाद भी फिल्म आम दर्शक तक इसलिये नहीं पहुंच पायेगी क्योंकि इसका प्रमोशन साधारण रहा ।


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Mayapuri

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