मूवी रिव्यू: फिल्म‘ रंग- ए- इश्क’ प्यार का रंग जमाने में कामयाब

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निर्माता जयवीर पंघाल तथा श्रीनिवास अंजनअप्प द्धारा निर्देशित फिल्म‘ रंग-ए- इश्क’ एक स्ट्रांग लव स्टोरी है।जिसमें प्यार के पीछे का समपर्ण प्रभावशाली है ।
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मुजाहिद् खान एक सोशल तबीयत का युवक हैं वो हर किसी की मदद के लिये हमेषा तैयार रहता है । कभी किसी दोस्त की शादी तो कभी किसी जरूरतमंद की साहयता करना उसका षगल है। एक बार वो अपने दोस्त की प्रेमिका को अगवा कर उनकी शादी करवाता है तो इस बात से खफा हो लड़की की दोस्त काव्या किरण उससे उलझ जाती है। वो उसे एक अवारा लड़का समझती है। इधर मुजाहिद उसे देखते ही उसे प्यार करने लगता है । बाद में काव्या की दोस्त उसकी गलतफहमी दूर करते हुये कहती है कि वो बहुत ही अच्छा लड़का है। काव्या एक स्कूल में पढ़ाती है जो वहां के बहुत बड़े आदमी दादा ठाकुर का स्कूल है ।लेकिन उसका सोतेला भाई दीपक कुमार एक एय्याष और बदमाष आदमी जो हर किसी की अस्मत पर अपना अधिकार समझता है । काव्या को देखते ही वो उसे पंसद करने लगता है । लेकिन उसकी राह का कांटा है मुजाहिद । बाद में किस तरह मुजाहिद और काव्या अपने प्यार के लिये जान तक दे देते हैं ।

रंग ए इश्क एक ऐसी लव स्टोरी है जो बहुत पहले फिल्मों में होती थी। फिर भी उसकी प्रस्तुति दिलचस्प है । नये कलाकारों मुजाहिद खान, काव्या किरण दोनो ने अच्छी अदायगी पेश की हैं लेकिन नगेटिव भूमिका में दीपक कुमार काफी असरदार लगते हुये आगे के लिये अच्छी उम्मीद जगाते हैं। यूपी की लोकेशंस नई और अच्छी हैं । दीन मोहम्मद ने म्युजिक के तहत सभी नई आवाजों को मौंका दिया है। कहने का मतलब लव स्टोरी फिल्मों का चलन न होते हुये भी रंग ए इश्क प्यार का रंग जमाने में कामयाब है।


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Mayapuri

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