मूवी रिव्यू: फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिर्टन्स’ ‘रिश्ते और प्यार के मायने बताती

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अगर देखा जाये तो निर्देशक आनंद एल राय की फिल्म‘ तनु वेड्स मनु रिर्टन्स’ पहली से कहीं ज्यादा मनोरंजन और कहीं ज्यादा वास्तविक फिल्म बनी है । फिल्म पहले और कुछ नये किरदारों के करतब देख कभी न मुस्कराने वाला दर्शक भी कई जगह ठहाके मार मार कर हंसता है और तालियां बजाता है ।
डा.मनोज शर्मा उर्फ मनु यानि आर माधवन और तनु यानि कंगना रनौत की शादी चार साल पहले हो चुकी है । लेकिन अपने में मस्त रहने वाली तनु ने इन चार सालों के दौरान मनु के प्रति प्यार का सारा जोश ठंडा हो गया है । इसलिये लंदन से भी दोनो अलग अलग अपने अपने घरों दिल्ली और कानपुर आते ले । यहां दोनों तलाक लेने का फैसला कर लेते हैं ।

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कानपूर आने के बाद तनु एक बार फिर स्वछंद हो अपने पुराने रंग में आते हुये अपने यार दोस्तों से मिलना षुरू कर देती है । उसके नये दोस्त का नाम हैं चिन्टू यानि मौं जिशान अयूब जो एक वकील है और उसके मकान में किराये पर रहता है। उधर दिल्ली में मनु का दोस्त पप्पी यानि दीपक डोबरियाल है जिसे तनु का हनुमान कहा जाता है । तनु इस दौरान राजा अवस्थी यानि जिमी शेरगिल से भी मिलती है जो पहले तनु से शादी करने का दावेदार था । उसे पता चलता है अब वो भी षादी करने जा रहा है । दिल्ली में अचानक मनु को एक दिन तनु से मिलती जुलती शक्ल की लड़की दिखाई देती है । उसके बारे में पूडताछ से पता चलता है कि उसका नाम कुसुम सांगवा है उर्फ दत्तो है जो एक एथलीट्स है और दिल्ली अपने भाई राजेश शर्मा के पास रहते हुये पढ़ाई कर रही है ।मनु बाद में दत्तों से प्यार करने लगता है। पता चलता है कि दत्तो की शादी राजा अवस्थी से होने वाली है । यानि पहले की तरह इस बार भी उसकी शादी में अड़चन डालने के लिये मनु खड़ा था । बाद में क्या क्या घटनायें पेश आती है ये फिल्म में देखते हुये अच्छा लगेगा ।

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तवेमरि में निर्देशक के बराबर का योगदान लेखक भी है । जिस तरह से उसने किरदारों के माध्यम से नार्थ खास तौर से हरियाणा का माहौल, वातावरण और भाषा को बहुत ही सलीके से दिखाया है । इसके अलावा रोजमर्रा की भाषा में बोले जाने वाले मुहावरोे का दस्तेमाल इस तरह से किया है कि दर्शक हंसे बिना नहीं रह पाता । हमारे जीवन में फिल्मों का कितना दख्ल हो चुका है इसका उदाहरण भी फिल्म में इस तरह दिखाया है जब मनु अपनी तरह से कहता है कि मैं एक बार जो कमिटमेन्ट कर देता हूं तो उसे मैं भी पहीं तौड़ सकता । तब चिन्टू उसे कहता है कि तू क्या सलमान है क्या । इसी तरह और भी ढेर सारे शब्द है जो हम भी राजमर्रो की भाषा में यूज करते हैं वे शायद पहली दफा किसी फिल्म में इतनी अनोखे ढंग से यूज किये गये हैं । फिल्म का भाशा और माहौल से जुड़ापन दर्शक को बहुत आनंदित करता है । अगर अभिनय की बात की जाये तो आप फिल्म देखकर ऐसा कतई नही कह सकते कि फंला छोटे या बड़े किरदार को वेस्ट किया गया या फंला किरदार याद नही रह पाता । कंगना रनौत तनु को पहले भी निभा चुकी है ।

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लेकिन इस बार उसने तनु को विस्तार दिया है । लेकिन कुसुम सांगवा को कंगना ने जिस तरह से जीया है वो उसके एक बेमिसाल अभिनेत्री होने का पुख्ता सुबूत है । उसकी बाॅडी लैंग्वेज,साफगोही तथा हरियाणवी न होते उस भाषा के एक्सेप्ट को जिस प्रकार पकड़ा है वो काबिले तारीफ है । आर माधवन तो जैसे मनोज शर्मा में पूरी तरह से घुसे बैठे थे । उसने मनु को कुछ इस तरह से निभाया है कि वे पूरी तरह से मनु ही लगते हैं । दीपक डोबरियाल के लिये इस बार कामेडी का पूरा मैदान था जिसका उसने उसका पूरा मजा लिया है । शुरू से अंत तक दीपक दर्शक को गुइगुदाते हुए अपनी अभिनय क्षमता का एहसास करवाते हैं । फिल्म का एक और नया कॅरेक्टर है चिन्टू जिसे मौ. जिशान अयूब ने बेहतरीन तरीके एक्ट किया है ।

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इनके अलावा जिम्मी शेरगिल,राजेन्द्र गुप्ता,के के रेना,नवनी परिहार तथा दीप्ती मिश्रा,स्वरा भास्कर तथा एजाज खान आदि फिल्म के मजबूत पाये हैं । फिल्म के एक गीत ‘बन्नो तेरा स्वैकगर’ से बाॅलीवुड से एक नई गायिका स्वाति शर्मा ने शानदार पर्दापण किया है ।बाकी गीत कहानी क अनुसार हैं । अंत में फिल्म के बारे में कहा जाये तो आप तनु वेड्स मनु न कहते हुसे तनु मीट्स दत्तो भी कह सकते नहीं । वैसे जिस प्रकार रिश्तों और प्यार के मायने फिल्म बताती है वो अस्वमरणीय है ।

 


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Mayapuri

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