मूवी रिव्यू: फिल्म ‘युवा’ रेप जैसे जघन्य अपराध के खिलाफ युवाओं का आव्हान

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रेटिंग 2.5

आज हमारे लिये रेप जैसा अपराध रोजमर्रा की आम घटना बनकर रह गया है। हम जब भी रेप की घटना सुनते है पढ़ते हैं, प्रषासन को कोसते हैं फिर रोजमर्रा की कामों में लग जाते हैं । धनराज प्रोडक्षन तथा जसबीर भाटी द्धारा निर्देशित फिल्म‘ युवा’ खासकर युवाओं को सचेत करते हुए बताती है कि हम रेप जैसी घृणित विकृति को मिटाने के लिये सिर्फ सरकार या पुलिस के भरोसे न बैठ कर खुद भी आगे बढ़कर कुछ करना होगा ।

कहानी
विक्रांत राय,लविन गोठी,मेघवृत सिंह,रोहन मेहरा,मोहित बघेल पांच दोस्त बहुत ही शरारती किस्म के स्कूल छात्र हैं इसलिये इनमें से विक्रांत राय के दादा जी ओमपुरी इन पांचों को एक बड़े अंग्रेजी स्कूल में दाखिल करवा देते है । लेकिन वहां भी उनकी शरारतें जारी रहती हैं । वहां इनकी पहले से पढ़ रहीं शीना बजाज, युक्ति कपूर,विन्ती किदवानी तथा पूनम पांडे से दोस्ती हो जाती हैं। एक बार इनमें से तीन रात को घूमने के लिये निकलते हैं तो उन्हीें के सामने एक कार एक लड़की को फेंक कर भाग जाती है। ये उस गंभीर रूप से घायल लड़की को अस्पताल लाते हैं जंहा पता चलता है कि उसके साथ बुरी तरह से गैंग रेप किया गया है। पता लगता है कि वो लड़की इनके प्रिंसीपल की बेटी और उनकी दोस्त की बहन है । इसके बाद ये तीनों दोस्त अपराधियों के खिलाफ कोर्ट में गवाही देने का सकंल्प करते हैं । लेकिन शातिर वकील मनीष चैधरी उल्टा इन तीनों पर बलात्कार का केस लगा कर जेल भिजवा देता है । बाद में किस प्रकार ये सारे दोस्त एसपी तेजवीर यानि जिम्मी शेरगिल के साथ मिलकर अपराधियों को एक अनोखी सजा देते हुए उनके अंजाम तक पहुंचाते हैं ।

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निर्देशन
फिल्म जिस क्रांती की बात करती है । निर्देशक का उसे बयान करने का तरीका एक हद तक अच्छा रहा । लेकिन शुरूआत में उन्होंने किरदारों को रजिस्टर्ड करने में काफी वक्त ले लिया, इतना कि फिल्म बोझिल होने लगती है । लेकिन मध्यातंर के बाद फिल्म अपने मकसद पर आ जाती है । जिसे निर्देशक ने अच्छी तरह से हैंडल किया है ।अपराधियों को एसपी के सजा देने का तरीका गले से नहीं उतरता फिर भी वो प्रभावशाली है । निर्देशक अगर थोड़ी और मेहनत करते तो फिल्म और प्रभावशाली बन सकती थी । फिर भी वे फिल्म के जरिये इस जघन्य अपराध के प्रति संदेश देने में एक हद तक सफल रहे हैं । यानि फिल्म तरीके से रेप से अपराध के खिलाफ युवाओं के आव्हान को दर्शाती है ।

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अभिनय
फिल्म के मुख्य किरदारों में विक्रांत राय टीवी पर काफी काम कर चुका है । मोहित बघेल भी सलमान के साथ रेडी आदि तीन चार फिल्में कर चुका है तथा पूनम पांडे की एक फिल्म ‘ ट्रिप टू भानगढ़’ रिलीज हो चुकी है ।बाकी आर्टिस्ट भी कुछ न कुछ कर चुके हैं । इनमें मोहित बघेल यूपी के सलमान के तौर पर मस्तमौला किरदार में आकर्शित करता है । पूनम पांडे खूबसूरत लगती है । इनके अलावा बाकी कलाकार भी ठीके रहे । अनुभवी अदाकारों में रजित कपूर और जिम्मी शेरगिल, संजय मिश्रा,जीतू शिवहरे,एलीना क़जान,अर्चना पूरनसिंह,मनीष चैधरी, परिक्षित साहनी आदि कलाकारों ने फिल्म को बढि़या तरह से संभाले रखा । ओमपुरी पूरी तरह से बेअसर रहे । दरअसल उनके रोल में उन जैसे कद के कलाकार के लिये कुछ था ही नहीं ।

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संगीत
फिल्म में चार म्यूजिक कंपोजर हैं । उन सभी के हाथ एक एक गीत आया । लेकिन सारे गाने कैची हैं ।
क्यों देखें
अगर आपको मनोरंजन के साथ मैसेज देती फिल्मों से लगाव है तो आप युवा देख सकते हैं ।

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Mayapuri