मूवी रिव्यू: फिल्म ‘यहां सब की लगी है’ समझ से बाहर

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अगर किसी फिल्म को लेकर प्रतियोगिता की जाए कि कोई ये बताये कि फिल्म क्या है और क्या कहना चाहती है तो टीना बोस और सायरस खंबाटा द्धारा निर्देशित ‘यहां सब की लगी है’ जैसी फिल्म को सामने रख दिया जाये । कहने को फिल्म रोड़ जर्नी है लेकिन किस तरह की रोड़ जर्नी है । अंत तक पता नही चल पाता ।
Yahaan-Sabki-Lagi-Hai

वरूण ठक्कर और एडन स्योडी तथा उनके ड्राइवर का अपहरण कर दो बंगाली (पता नहीं कौन) उन्हें लूट उन्हें जंगल में छौड़ उनकी गाड़ी लेकर चंपत हो जाते हैं। वरूण को त ता नहीं क्या प्रॉब्लम हैं कि वो हर वक्त कभी एडन से तो कभी अपनी प्रेमिका याशिका वर्मा के साथ बहस करता रहता है । किसी तरह एडन का ब्वायफ्रेंड टीशे और उसका साथी उन्हें ढूंढने में कामयाब हो जाते हैं । वहां पता चलता है कि एडन का भाई कार एक्सिडेंट में मारा जाता है और टीशे अपाहिज हो जाता है । इसके बाद पता नहीं वरूण क्यों अपनी प्रेमिका से भागना चाहता है और एडन भी टीशे के अपाहिज होने के बाद अकेली हो जाती है ।
Yahaan Sabki Lagi Hai Teaser Trailer

दरअसल जो फिल्म आम दर्शक की समझ में न आये तो समझ लिजिए कि वो फिल्म फेस्टिवल के लिये बनाई गई है । यंहा सब की लगी है फिल्म फैस्टिवल के लिये ही बनाई गई है । फिल्म में तकरीबन सभी नये चेहरे हैं । उनमें ड्राइवर की भूमिका निभाने वाले हीरकदास ने अच्छा काम किया है। उसके अलावा एडन खूबसूरत है लेकिन एक्टिंग में उसे अभी काफी कुछ सीखना है। इनके अलावा टीशे, याशिक वर्मा,पवित्र सरकार, संदीप घोष तथा अक्षम ग्लेन आदि भी अपनी अपनी भूमिकाओं में ठीक रहे । लेकिन वे भूमिका क्या हैं और फिल्म में क्यों हैं समझ से बाहर हैं ।


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Mayapuri

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