रिव्यु – फिल्म “किल दिल” नई बोतल पुरानी शराब

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एक वक्त था जब हमारी हिन्दी फिल्मों में मेलो का ड्रामा चलता था लेकिन कितनी ही बार दोहराई जा चुकी इस कहानी को निर्देशक शाद अली ने फिल्म “ किल दिल” नई प्रस्तुति, नये क्लेवर के साथ खूबसूरती से परोसा है । भैया जी यानि गोविंदा का रिश्ता क्राइम की दुनिया से है । उन्हें कचरे में दो नवजात बच्चे मिलते हें जिन्हें वे पाल पोस कर शार्प शूटर बना देते हैं । भैया जी जिसकी सुपारी लेते हैं देव यानि रणबीर कपूर तथा टूटू यानि अली जफ़र उस काम को अंजाम देते हैं । दोनों में देव जहां एक मस्त रहने वाला बंदा है वहीं टूटू थोड़ा गंभीर है । लेकिन दोनों के बीच जान देने वाली दोस्ती है । एक बार दोनों की मुलाकात दिशा यानि परिणिति चोपड़ा से हो जाती है । दिशा एक ऐसी सोशल वर्कर है जो क्रिमिनल्स को सुधारने का काम करती है । देव दिशा को दिल दे बैठता है । बाद में देव उसके लिये इस कदर सीरियस हो जाता है कि उसके लिये अपना काम छोड़ शरीफ आदमी की जिन्दगी जीने का फैसला कर लेता है । लेकिन उसके आड़े अब भैया जी है जो किसी तरह उसे वापस लाना चाहते हैं । लेकिन वे अपने ही जाल में फंस कर जान गंवा बैठते हैं । और इस तरह देव के साथ टूटू को भी एक अच्छी जिन्दगी जीने का अवसर मिल जाता है । किलदिल एक ऐसी फिल्म है जिसे कह सकते हैं नई बोतल में पुरानी शराब । यानि कितनी ही बार दोहराई जा चुकी कहानी को शाद अली ने दिलचस्प शेप देकर मनोरंजक बना दिया है । जहां तक अभिनय की बात की जाये तो रणबीर सिंह बहुत अच्छा अभिनेता है हालांकि ये वो कई बार साबित कर चुका है लेकिन यहां एक साधारण सी भूमिका को उसने अपने शानदार अभिनय से आसाधारण कर दिखाया । इसी तरह अली जफ़र भी अपनी भूमिका में खूब जमे हैं । गोविंदा ने अपनी वापसी जिस रोल से की है उसे नगेटिव नहीं बल्कि ग्रे शेड्स कहना ज्यादा उचित होगा । जिसे उन्होंने एक परिपक्व अदाकार की तरह निभाया है । लेकिन परिणिति आधुनिक बनने के चक्कर में न इधर की रही न उधर की । दूसरे उनके बोलने की टोन उनकी अभी तक की सभी फिल्मों में एक जैसी ही है । जहां तक उनके लुक की बात की जाये तो उन्हें देसी लुक ही ज्यादा जमता है । संगीत की बात की जाये तो गुलजार द्धारा लिख नगमे स्वीटा, नखरीले, सजदे, किल दिल, बोल बेलिया तथा हैप्पी बड्डे आदि सभी अच्छे हैं और उन्हें फिल्माया भी बढि़या ढंग से है । शंकर एहसान लॉय ने गुलजार की आवाज का कई जगह बढि़या इस्तेमाल किया है । अंत में कहना होगा कि फिल्म के औसत रूप् से सफल होने की संभावना तो जरूर है


Mayapuri