फिल्म ‘ मार्गरिटा विद ए स्ट्रा’

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प्रभावशाली ढंग से कहती है अपनी बात
असल में मार्गरिटा एक पेय पदार्थ है जिसे बिना नली के पिया जाता है । लेकिन फिल्म की मुख्य पात्र लायला इसे नली लगाकर पीना चाहती है । क्योंकि उसका मानना है कि जो सब करते हैं जरूरी नहीं कि वो भी वही करे। वो अपनी मर्जी से अपनी लाइफ जीना पसंद करती है । फिल्म ‘मार्गरिटा विद ए स्ट्रा’ के माध्यम से फिल्म की निर्देशक शोनाली बोस ने असरदार ढंग से ये सब कहने की कोशिश की है ।

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लायला यानि कल्कि कोचलिन सेरिब्रल पाल्सी नामक बीमारी की शिकार है । इस बीमारी में शरीर के अंग दिमाग का कहना  नहीं मानते । लेकिन वो दिमागी तौर पर आम आदमी से ज्यादा इंटैलीजेन्ट है  और म्युजिक की जानकार है। कालेज में वह एक सिंगर लड़के से प्यार करने लगती है जबकि उसी की तरह एक अन्य अपाहिज लड़का उसे प्यार करता है। लेकिन प्यार में उसे हताशा ही हाथ लगती है । दरअसल लायला  सेक्स के प्रति उत्साहित है इसीलिये वो पार्नो साइड देखती है । यहां उसकी मां रेवती जो उसकी दोस्त भी है और उसकी हर बात का हर तरह से ख्याल रखती है ।

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लायला अपनी मां के साथ आगे की पढ़ाई करने के लिये न्यूयार्क जाती है । वहां उसकी मुलाकात एक अंधी लड़की खानुम  यानि  सयानी गुप्ता से होती है । असल में खानुम एक गे है ।इसलिये उसे सेक्स के प्रति उत्साहित लायला से शारीरिक संबन्ध बनाने में देर नहीं लगती । इस बीच लायला का अचानक एक दिन एक और दोस्त से भी शारीरिक संबन्ध बन जाता है । इस बीच जायला खानुम के साथ अपने मां बाप से मिलने इंडिया आती है ।

089495Kalki Koechlin, left, and Sayani Gupta in Margarita, with a Straw.

यहाँ उसे पता चलता है कि उसकी मां को केंसर है । लेकिन मां के मरने से पहले वो उसे अपने और खानुम के बारे में सब कुछ बता देती है । हालांकि रेवती उन संबन्धों को गलत करार देती हैं फिर भी वो अपनी बेटी की खुशी के लिये चुप रहती है । मां के मरने के बाद लायला वापस न्यूयार्क जाना केंसिल कर देती है । और खानुम को वापस भेज देती है। क्योंकि उसे बाखूबी पता चल चुका है कि उस जैसी अबनार्मल लड़की के लिये क्या सही है और क्या गलत ।

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फिल्म की कहानी निर्देशक शोनाली बोस की कजन सिस्टर मालिनी से इंस्पायर है। मालिनी भी सेरिब्रल पल्स बीमारी से ग्रस्त है । उसने न्यूयार्क से डबल एम ए तक की पढ़ाई की । दिमागी तौर से बहुत ही इंटेलीजेंट है । लेकिन एक दिन उसने मालिनी से कहा कि वो सेक्स करना चाहती है । मालिनी की इन्हीं सब बातों को लेकर शोनाली के दिमाग में इस फिल्म की कहानी ने जन्म लिया। फिल्म कहती है कि आप शारीरिक तौर पर कैसे हैं  ये अलग बात है लेकिन आप अपने  तौर पर अपनी लाइफ जीने के लिये पूरी तरह आजाद हैं ।

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मुख्य भूमिका में कल्कि ने सेरिब्रल पाल्सी की पेशेंट की भूमिका पर काफी मेहनत की है । लेकिन बीच बीच में वे भूल जाती है कि उन्हें कैसे बोलना है उनके मुहं से कुछ साफ अल्फाज निकल जाते हैं लेकिन फौरन वो अपने आप पर काबू भी पा लेती हैं । बावजूद इसके कल्कि इस कठिन रोल के लिये पास करार दी जाती हैं । सयानी गुप्ता भी कितनी जगह भूल जाती है कि वे अंधी है लेकिन गे के तौर पर वे एक हद तक ठीक ठाक काम कर गई । रेवती एक अनुभवी अभिनेत्री है उन्होंने एक सेरिब्रल पाल्सी पेशेंट की मां की भूमिका को बहुत ही प्रभावशाली ढंग से अभिनीत किया।

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जंहा तक निर्देशन की बात की जाये तो शोनाली खुद भी बाय सेक्सुअल रही हैं, उन्होंने अपने अनुभव का फिल्म में सही इस्तेमाल किया है इसीलिये फिल्म प्रभावशाली ढंग से अपनी बात कहनेे में सफल है ।


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Mayapuri

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