रिव्यु – फिल्म‘ द शौकीन्स’

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सौ करोड़ क्लब तक पहुंचना मुश्किल

अभिषेक शर्मा द्धारा निर्देर्शित तथा तिग्मांषू धूलिया और साई कबीर द्धारा लिखित फिल्म ‘द शौकीन्स’ ओरीजनल शौकीन का सिर्फ नाम ही भुना पाई है वरना ओरीजनल के ये आस पास भी नहीं ठहर पाती । फिल्म में बढ़िया आर्टिस्ट हैं बावजूद इसके ये एक साधारण फिल्म ही साबित होती है ।

लाली- अनुपम खेर, केडी- अन्नु कपूर तथा पिंकी- पीयूष मिश्रा तीन ऐसे ठरकी बूढे़ हैं जो मौंका मिलते ही जवान लड़कियों को ताड़ते रहते हैं । दरअसल इनके ठरकी होने के पीछे एक एक कहानी है । एक बार ये किसी लड़की को छेड़ते हुये पुलिस द्वारा पकड़े जाते हैं । बाद में उस पुलिस वाले से ही उन्हें नसीहत मिलती है कि अगर अय्याषी करनी है तो विदेश जाओ वहां ये सब लीगल है । उसकी बात मानते हुये ये तीनों मॉरिशस जाते हैं और वहां लीजा हेडन के पेइंग गेस्ट बनते है ।लीजा को गलत फहमी है कि वह बहुत बड़ी डिजाइनर है । दूसरे वो जुनून की हद तक अक्षय कुमार की फैन है । उसका कहना है कि जो भी उसे अक्षय से मिलवा देगा उसके लिये वो कुछ भी कर सकती है । उसी दौरान अक्षय वहां शूटिंग के सिलसिले में आता है । तो लीजा को उससे मिलवाने के लिये लाली अक्षय के साहयक को पैसे देकर अक्षय से मिलवा देता है । उसके बाद लाली केडी और पिंकी के सामने बड़ी बड़ी डींगे मारता हुआ कहता है कि लीजा के साथ उसका सब कुछ हो गया है। इसके बाद केडी भी कुछ करामात कर एक बार फिर लीजा को अक्षय से मिलवा देता है । अब बारी है पिंकी की , तो वो ऐसा कुछ करता है कि दोनो पर भारी पड़ता है । लेकिन इसी के साथ ही इन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है । इसके बाद क्या होता है ये फिल्म में ही देखना होगा ।

जैसा बताया गया है कि ओरीजनल के ये फिल्म आसपास तक नहीं है । फिल्म का स्क्रीनप्ले कमजोर है । कहानी सिर्फ एक लाइन की है । जिसे दो घंटे तक निर्देशक मनोरंजक तरीके से नहीं खींच पाया । लिहाजा पहला भाग काफी धीमा और एक हद तक बौर है । दूसरे भाग में अक्षय जिसे अल्कोहोलिक दिखाया गया है कुछ मनोरंजन करते हैं । और वे हमेशा की तरह अपनी कॉमिक भूमिका को बढि़या तरीके से निभा ला जाते हैं । अनुपम के पास अब कुछ नहीं बचा है इसलिये वे अपनी भूमिका में नकली लगते हैं, अन्नु कपूर ओवर एक्टिंग का भारी शिकार है लेकिन पीयूष मिश्रा अपनी अदाकारी से प्रभावित करने के साथ ही दर्शकों का मनोरजंन भी करते हैं । लीजा हैडन आशा से ज्यादा आशा जगाती है। उसकी भूमिका उसकी पर्सनल लाइफ के काफी नजदीक है। जहां तक म्युजिक की बात की जाये तो एक बार सोचने के लिये मजबूर हो जाना पड़ता है कि कभी हमें गीतों में मैं एल्कोहोलिक हूं, इश्क कुत्ता है जैसे शब्द भी सुनने को मिलगें। ये दूसरी बात है कि इनके साथ फिल्म के अन्य गीत तेरी मेहरबानियां और आशिक मिजाज जैसे गीत भी हिट हैं । फिर भी जहां तक फिल्म की बात की जाये तो इसका सौ करोड़ क्लब तक पंहुचना मुश्किल होगा ।


Mayapuri