फिल्म ‘मैं और मि. राइट’- मि.राइट नहीं मि. रांग

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जहां यूथ को लेकर अच्छी फिल्में बन रही हैं वहीं उन्हें ढाल बनाते हुये फिल्म के नाम पर कुछ भी बनाया जा रहा है । निर्देशक अब्बास रईस की फिल्म ‘ मैं और मि. राइट’ एक ऐसी ही फिल्म हैं जिसमें यूथ के माध्यम से पता नहीं क्या दिखाने की कोशिश की है ।

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शहनाज कास्टिंग डायरेक्टर है । जिसका अभी तक कोई  मि.राइट नहीं । इसलिये उसके दोस्त उसे चिढ़ाते रहते हैं । एक दिन किसी फिल्म के लिये आॅडिशन लेते हुये उसका सामना स्ट्रगलर वरूण खंडेलवाल से होता है । तो वो उसे किराये का ब्वायफेंड बनाकर कुछ इस तरह से अपने दोस्तों के सामने पेश करती है कि वो उन्हें हर तरह से परफेक्ट लगता है । उसी दौरान वो शहनाज की दोस्त को पानी में डूबने से बचाता है तो वो उस पर मरने लगती है और उसका ब्वायफेंड शहनाज पर मरने लगता है  बाद में दोनो एक दूसरे का बॉयफ्रेंड बदल लेते है । शहनाज वरूण को बताती हैं कि वो किसी और से प्यार करने लगी है इसलिये अब उसका काम खत्म लेकिन वरूण उसे प्यार करने लगता है । बाद में शहनाज को रिलरइज होता है कि उसका मि. राइट और कोई नहीं वरूण ही है ।
फिल्म में निर्देशक ने प्यार या गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड को लेकर यूथ की सोच अमेरिका लंदन जैसे आजाद देशों के यूथ को भी पीछे कर दिया है । क्योंकि वे कभी भी गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड बदल लेते हैं । इसके अलावा आर्टिस्टों के मुंहू से अंग्रेजी मिश्रित हिन्दी सुनकर गुस्सा आता है कि अब्बास जैसे निर्देशक किस तरह हिन्दी का मजाक उड़ा रहे हैं । फिल्म शुरू से लेकर अंत तक इतनी बोझिल हैं कि दर्शक अपना सिर पकड़ लेता है । इसलिये फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ न कहते हुये यही कहना है कि इसका नाम मि. राइट नहीं मि. रांग होना चाहिये था ।


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Mayapuri

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