रिव्यु – फिल्म ‘ टीटू एम बी ए’- औसत दर्जे की फिल्म

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छोटे बजट की फिल्मों की विडंबना ये हैं कि ये फिल्में बन तो जाती है लेकिन इनकी मार्केटिंग नहीं हो पाती । इसलिये ये न तो सही तरह से रिलीज हो पाती हैं न ही इनकी पब्लिसिटी हो पाती हैं । कई बार ऐसी कमजोरियों के तहत अच्छी फिल्में भी आम दर्शक तक नहीं पहुंच पाती । अमित वत्स द्धारा निर्देशित फिल्म ‘टीटू एम बी ए’ एक ऐसी ही फिल्म है जिसका रिलीज से पहले जरा भी प्रचार नहीं हो पाया ।

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टीटू यानि निशांत दहिया ऐसा युवक हैं जो लोगों से पैसे उधार ले कर अलग अलग बिजनिस ट्राई करता रहता है। एक दिन उधार लेने वाले उसकी पिटाई कर उसके घर का सामान तक उठा कर ले जाते है यही नहीं कुछ लोग गुंडों से उसे धमकी दिलवाते हैं तो वो मजबूरी में गिगोलो बन सबका उधार चुका देता है। यहां तक अपने पागल हुये बाप का अच्छा इलाज करवने के अलावा महंगी कार भी खरीद लेता है । गुलशन यानि प्रग्या जेसवाल हाकी खिलाड़ी बनना चाहती है लेकिन उसकी मां चाहती है कि वो शादी कर अपने घर जाये। आगे उसकी शादी टीटू से हो जाती है लेकिन उसे बचपन से ही उसका पड़ोसी अभिषेक कुमार प्यार करता है। शादी के बाद भी उसने उम्मीद नहीं छोड़ी और एक दिन वो टीटू की किसी औरत के साथ फोटो खीचने में कामयाब हो जाता है और वो फोटो गुलशन को फॉरवर्ड कर देता हैं बाद में गुलशन उसके साथ टीटू का पीछा करती है तो उसे और उसके मां बाप को उसके काम का पता चलता है। इसके बाद गुलशन उसे छौड़ कर चली जाती है । बाद में टीटू अपनी शादी कैसे बचाता है ।

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इससे पहले काफी फिल्मों ये कहानी दिखाई दे चुकी है । नये कलाकारों के साथ इस बार इसे पंजाबी फ्लेवर देकर तरोताजा करने की असफल कोशिश की गई है ।फिर भी फिल्म इतनी बुरी भी नहीं की देखी ही न जा सके । निशांत दहिया, प्रग्या जैसवाल तथा अभिशेक कुमार आदि ने अच्छा काम किया है । फिल्म के संवाद कई जगह चुटीले हैं लेकिन पटकथा और संगीत कमजोर है। इन सारी चीजों के अनुसार फिल्म औसत दर्जे की साबित होती है।

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Mayapuri