रिव्यूज – Mayapuri https://mayapuri.com Latest Bollywood Hindi News Thu, 16 Jan 2020 21:35:58 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=5.3.2 https://i0.wp.com/mayapuri.com/wp-content/uploads/2018/02/mayapuri-favicon.png?fit=32%2C32&ssl=1 रिव्यूज – Mayapuri https://mayapuri.com 32 32 142476063 जय मम्मी दी रिव्यु :इस बार भी लव रंजन दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरें हैं https://mayapuri.com/%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ad/ https://mayapuri.com/%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%81-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ad/#respond Thu, 16 Jan 2020 21:32:35 +0000 https://mayapuri.com/?p=225654 Jai mummy di review, Jai mummy di ratings

लव रंजन कोई फिल्म बनाये तो फिल्म से एक उम्मीद बढ़ जाती है। कहना पड़ेगा इस बार भी लव रंजन दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरें हैं। जय मम्मी दी एक फॅमिली एंटरटेनर फिल्म है, फिल्म के कई दृश्य आपको गुदगुदाकर हंसाएंगे कहानी पुनीत सिंह (सनी सिंह) और साँझ (सोनाली सेहगल) एक दुसरे से प्यार […]

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लव रंजन कोई फिल्म बनाये तो फिल्म से एक उम्मीद बढ़ जाती है। कहना पड़ेगा इस बार भी लव रंजन दर्शकों की उम्मीदों पर खरे उतरें हैं। जय मम्मी दी एक फॅमिली एंटरटेनर फिल्म है, फिल्म के कई दृश्य आपको गुदगुदाकर हंसाएंगे

कहानी

पुनीत सिंह (सनी सिंह) और साँझ (सोनाली सेहगल) एक दुसरे से प्यार करते हैं। कॉलेज ख़तम होने के बाद सांझ पुनीत से शादी करने के लिए कहती हैं , लेकिन पुनीत पीछे हट जाते हैं क्योंकि पुनीत और सांझ दोनों ही अपने आप में किसी हिटलर से कम नहीं है और एक दुसरे की पुरानी दुश्मन है। उनकी दुश्मनी की वजह फिल्म के अंत में दिखाई जाती है। अब कुछ समय बाद पुनीत को एहसास होता है और वो सांझ से शादी करना चाहता है ,लेकिन तब तक सांझ और पुनीत दोनों की ही शादी अलग अलग जगह पर तय कर दी जाती है। अब पुनीत और सांझ अपनी अपनी शादी तोड़ने और एक दुसरे से शादी करने के लिए कई तरह के प्लान बनाते हैं और अंत में कामयाब भी हो जाते हैं।

अवलोकन

फिल्म को शानदार तरह से पेश किया गया है। फिल्म आपको हंसने पर मजबूर कर देती है और पूरी तरह से पैसा वसूल है। दोनों मम्मियों की दुश्मनी कब और क्यों शुरू हुई थी, अंत में ये सीन देखकर आपको मज़ा आ जायेगा और अंत में आपको प्यार का पंचनामा की कास्ट देखने को मिलती है। ख़ैर ये तो आपको फिल्म देखकर ही पता करना पड़ेगा की अंत के सीन में ऐसी क्या ख़ास बात है।

एक्टिंग

फिल्म में सनी सिंह की काफी दमदार एक्टिंग देखने को मिलती है , हाँ कुछ साइड एक्टर्स के किरदार अपने रोल्स में और जान डाल सकते थे। सोनाली सेहगल अपने रोल को और बेहतर बना सकती थी , उनकी एक्टिंग स्किल्स इस फिल्म में थोड़ी कमज़ोर नजर आती है।

क्यों देखें

फिल्म एक फॅमिली एंटरटेनर फिल्म है जो आपको आपके परिवार के साथ गुदगुदाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

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डू लिटिल (Dolittle) रिव्यु : जानवरों ने फिल्म को मनोरंजक बना दिया है https://mayapuri.com/dolittle-movie-review-hindi/ https://mayapuri.com/dolittle-movie-review-hindi/#respond Thu, 16 Jan 2020 20:53:39 +0000 https://mayapuri.com/?p=225650 Do little review, Do little review hindi, Do little review mayapuri, Do little ratings

ख़ैर बात रॉबर्ट डाउनी जूनियर की फिल्म की हो और फिल्म में कोई कमी रह जाये, ऐसा तो बोहोत कम देखने को ही मिलेगा। डू लिटिल (Dolittle) में भी रॉबर्ट डाउनी जूनियर ने ये साबित कर दिया है की वो हॉलीवुड के सबसे महंगे एक्टर्स की लिस्ट में शामिल होने के लिए पूरी तरह से […]

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ख़ैर बात रॉबर्ट डाउनी जूनियर की फिल्म की हो और फिल्म में कोई कमी रह जाये, ऐसा तो बोहोत कम देखने को ही मिलेगा। डू लिटिल (Dolittle) में भी रॉबर्ट डाउनी जूनियर ने ये साबित कर दिया है की वो हॉलीवुड के सबसे महंगे एक्टर्स की लिस्ट में शामिल होने के लिए पूरी तरह से योग्य है।

कहानी

ये फिल्म डॉक्टर जॉन डूलिटिल के इर्द-गिर्द घूमती है। उन्हें और उनके जानवरों के लिए इंग्लैंड की रानी उन्हें एक बड़ी जगह देती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि डूलिटिल उसका अच्छे से ख्याल रखेंगे। पत्नी की मौत के बाद डूलिटिल इंसानों से दूर जानवरों के साथ वहीं रहने लगता है। लेकिन एक दिन डूलिटिल के पास खबर आती है कि रानी बेहद बीमार हैं और इलाज के लिए खास तौर पर उन्हें ही बुलाया गया है। ईडन के पेड़ पर उगने वाला रहस्यमय फल ही उन्हें बचा सकता है। ऐसे में डूलिटिल उस फल की तलाश में निकल पड़ते हैं और इसी के साथ शुरू होता है एडवेंचर। इस एडवेंचर में डॉ. डूलिटिल के साथ जानवरों के अलावा एक इंसान टॉमी स्टबिन्स भी है, जिनका किरदार हैरी कॉलेट ने निभाया है।

अवलोकन

फिल्म को शुरू से ही मज़ेदार बनाने में सभी किरदारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है , जानवरों ने फिल्म को और मनोरंजक बना दिया है। फिल्म में हास्य की कोई कमी नहीं है, फिल्म शुरू से आखिर तक आपको बांधकर रखती है। कुछ जानवर जैसे एक गिलहरी, एक गोरिल्ला और एक भालू आपको ठहाके लगाकर हंसने पर मजबूर कर देते हैं। बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी ये फिल्म काफी पसंद आएगी।

एक्टिंग

रॉबर्ट डाउनी जूनियर ने फिल्म में जबरदस्त एक्टिंग की है। जानवरों के साथ उनकी बातचीत और इंसानों को लेकर उनकी चिड़न काफी मजाकिया है। आयरनमैन के बाद रॉबर्ट को डॉ. डूलिटिल के रूप में देखना काफी अच्छा एक्सपीरियंस रहा। उन्होंने इस किरदार के साथ पूरी तरह न्याय किया है। वहीं हैरी कॉलेट भी स्टबिन्स के किरदार में काफी जमे हैं। उन्होंने डूलिटिल के एसिसटेंट का किरदार बखूबी निभाया।

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‘छपाक’ से ज्यादा कलेक्शन करने के बावजूद भी कई मामलों में पीछे है ‘तानाजी’ https://mayapuri.com/tanhaji-the-unsung-warrior-or-chhapaak-which-film-will-be-bigger-hit-what-box-office-says/ https://mayapuri.com/tanhaji-the-unsung-warrior-or-chhapaak-which-film-will-be-bigger-hit-what-box-office-says/#respond Wed, 15 Jan 2020 06:56:57 +0000 https://mayapuri.com/?p=225527

छपाक vs तानाजी एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल रियल लाइफ पर बेस्ड दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म छपाक और अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल स्टारर एतिहासिक पीरिएड ड्रामा फिल्म तानाजी को रिलीज हुए 5 दिन हो चुके हैं. दोनों फिल्में एक ही दिन 10 जनवरी को रिलीज हुई थी. जहां रिलीज के पहले ही […]

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छपाक vs तानाजी

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल रियल लाइफ पर बेस्ड दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म छपाक और अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल स्टारर एतिहासिक पीरिएड ड्रामा फिल्म तानाजी को रिलीज हुए 5 दिन हो चुके हैं. दोनों फिल्में एक ही दिन 10 जनवरी को रिलीज हुई थी. जहां रिलीज के पहले ही तानाजी ने बॉक्सऑफिस पर धमाल मचा दिया, वहीं, छपाक ने लोगों को काफी निराश किया. ये दोनों फिल्में जबसे रिलीज हुई हैं, तबसे लोग दोनों फिल्मों की हर मामले में एक दूसरे से तुलना कर रहे हैं. लोग तानाजी को छपाक से ज्यादा बेहतर और हर मामले सुपरहिट फिल्म बता रहे हैं.

ये बात सच है कि तानाजी ने 5 दिन में अबतक छपाक से ज्यादा कलेक्शन किया है और लोगों को ये फिल्म छपाक से ज्यादा एंटरटेनिंग लग रही है, उसके बावजदू भी कई ऐसी चीजें हैं, जिसमें तानाजी अब भी छपाक से पीछे है. वहीं, अगर देखा जाए तो दोनों ही फिल्मों की एक-दूसरे से तुलना करना तो बिलकुल ही गलत है. क्योंकि छपाक जहां एक एसिड अटैक सर्वाइवर की सच्ची कहानी पर आधारित एक कम बजट में बनी फिल्म है, जिसका मकसद लोगों का मनोरंजन करना नहीं बल्कि Social Awareness फैलाना है. ऐसी सोशल ड्रामा फिल्मों को सीमित दर्शक ही देखते हैं. वहीं, तानाजी मराठा इतिहास का गौरव रहे तानाजी मालुसरे की वीरता की कहानी है. जो भारी भरकम बजट में बनी एक्शन से भरपूर 3डी फिल्म है. इसे लोगों के एंटरटेनमेंट को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो शुरु से ही हर मामले में ऑडियंस के लिए छपाक से बेहतर थी.

इसके बाद दोनों फिल्मों के कलेक्शन पर ध्यान दिया जाए तो बॉक्स ऑफिस इंडिया वेबसाइट के मुताबिक, छपाक ने 5वें दिन दो से सवा दो करोड़ का कलेक्शन किया. पहले दिन शुक्रवार को 4.77 करोड़, दूसरे दिन 6.90 करोड़, तीसरे दिन 7.35 करोड़ और चौथे दिन 2.35 करोड़ का कलेक्शन किया. इस तरह 5 दिन में फिल्म ने करीब 23.92 करोड़ का बिजनेस कर लिया है. वहीं, तानाजी के कलेक्शन की बात करें तो, ‘तानाजी’ पहले दिन से इस मामले में छपाक से आगे रही है, फिल्म के कलेक्शन में सोमवार की अपेक्षा 20 फीसदी की उछाल देखी गई है। फिल्म ने मंगलवार को 16 करोड़ का कलेक्शन किया। इस तरह पांच दिन में इसने करीब 90.96 करोड़ जुटा लिए हैं। छपाक का बजट 35 करोड़ है. इस लिहाज से देखा जाए तो छपाक ने अपने बजट का 63% कलेक्शन कर लिया है. वहीं, 150 करोड़ के बजट में बनी तानाजी ने अभी अपने बजट का केवल 41% कलेक्शन ही किया है. इसका मतलब छपाक जहां फायदे के बिजनेस में है वहीं तानाजी पीछे चल रही है.

वहीं, अगर स्क्रींस की बात करें तो अजय देवगन की तानाजी को छपाक से कहीं ज्यादा स्क्रींस मिली. तानाजी 3000 स्क्रींस पर रिलीज हुई है, तो वहीं दीपिका की छपाक को तानाजी की आधी से भी कम स्क्रींस (लगभग 1200) पर रिलीज किया गया. ऐसे में दोनों का कलेक्शन बराबरी पर तो नहीं आंका जा सकता है. इसके अलावा एक चीज और भी है जिसकी वजह से तानाजी को छपाक से पीछे कहा जा सकता है. वो ये कि तानाजी एक मल्टी स्टारर फिल्म है. इसमें अजय के साथ काजोल और सैफ अली खान भी हैं. एक्शन और देशभक्ति जैसे मसाले से भरपूर इस फिल्म के लिए ये कलेक्शन अब भी कम है. वहीं, छपाक में ग्राफिक्स, VFX और देशभक्ति जैसी कोई मसालेदार चीज नहीं है. ये एसिड अटैक जैसे सेंसिटिव मुद्दे पर बनी एक गंभीर फिल्म है, जिसमें मेल लीड रोल में कोई सुपरस्टार नहीं है और फिल्म का पूरा भार अकेले दीपिका पर है. अगर इस हिसाब से देखा जाए तो छपाक ही फायदें रही है। खैर, अभी तो देखना बाकी है कि बॉक्सऑफिस पर कौन सी फिल्म फायदे का बिजनेस कर पाती है.

ये भी पढ़ें- सलमान खान ने क्यों जला दी थी अपने पिता सलीम खान की सैलरी ?

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‘छपाक’ पर भारी पड़ी ‘तान्हाजी’ ? https://mayapuri.com/tanhaji-will-be-a-hit-at-boxoffice-in-comparison-with-chhapaak/ https://mayapuri.com/tanhaji-will-be-a-hit-at-boxoffice-in-comparison-with-chhapaak/#respond Fri, 10 Jan 2020 06:57:05 +0000 https://mayapuri.com/?p=225090

छपाक vs तान्हाजी- द अनसंग वॉरियर आज सिल्वर स्क्रीन पर दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं. एक है दीपिका पादुकोण की छपाक और दूसरी है अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल स्टारर फिल्म तान्हाजी- द अनसंग वॉरियर. दोनों ही फिल्में अपने आप में बड़ा महत्व रखती हैं, क्योंकि छपाक एक सच्ची घटना पर आधारित […]

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छपाक vs तान्हाजी- द अनसंग वॉरियर

आज सिल्वर स्क्रीन पर दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई हैं. एक है दीपिका पादुकोण की छपाक और दूसरी है अजय देवगन, सैफ अली खान और काजोल स्टारर फिल्म तान्हाजी- द अनसंग वॉरियर. दोनों ही फिल्में अपने आप में बड़ा महत्व रखती हैं, क्योंकि छपाक एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है जिसमें एक एसिड अटैक सर्वाइवर लड़की की कहानी दिखाई गई है. और तान्हाजी एक ऐतिहासिक घटना पर आधारित फिल्म है, जिसमें मराठा साम्राज्य की वीरता की कहानी दिखाई गई है.

अब देखना ये है कि एक ही दिन रिलीज़ हुई ये दोनों फिल्में बॉक्सऑफिस पर क्या काम कमाल दिखाती हैं. मतलब कौन सी फिल्म हिट होगी और कौन सी फ्लॉप. वहीं, लोगों का ये भी मानना है कि जिस फिल्म को लेकर विवाद होता है उस फिल्म के हिट होने की संभावना ज्यादा रहती है. वैसे ये तो आम बात है कि जिस फिल्म को लेकर लोग दस तरह की बातें बनातें हैं और जो फिल्म सुर्खियों में छाई रहती है, लोग भी उसी फिल्म को देखना चाहते हैं.

लेकिन इस बार लोगों की ये राय कि विवादित फिल्म ही हिट होती है, शायद गलत साबित हो सकती है. दीपिका पादकोण की फिल्म छपाक, जबसे बनना शुरु हुई तभी से सुर्खियों में छाई रही क्योंकि ये एक ऐसी लड़की की कहानी है, जिसके साथ आमनवीय घटना का शिकार हो जाती है. इसके बाद एक और चीज ये हो गई की फिल्म के रिलीज होने के चंद दिनों पहले ही JNU में छात्रों के साथ हुई हिंसा के अगले ही दिन दीपिका पादुकोण JNU पहुंच गईं. इससे दीपिका के साथ-साथ उनकी फिल्म को लेकर भी विवाद शुरु हो गया.

लोग फिल्म को बॉयकॉट करने की मांग करने लगे और दीपिका के JNU जाने को फिल्म प्रमोशन का फंडा बताने लगे. ये तो हो गई फिल्म को लेकर हुए विवाद की बात, इसके बाद हम फिल्म की बात करें, तो छपाक को मिल रहे रिव्यु को देखकर ऐसा लग रहा कि लोगों को ये फिल्म कुछ खास पसंद नहीं आई. क्योंकि लोग जिस बेसब्री से दीपिका की फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे, फिल्म के रिव्यु देखने के बाद लोगों की राय फिल्म को लेकर पूरी तरह से बदल गई है.

छपाक के बारे में अब लोगों का कहना है कि फिल्म काफी बोरिंग हैं, फिल्म में इंट्रेस्टिंग ऐसा कुछ भी नहीं कि आप 2 घंटे 15 मिनट की फिल्म को पूरा देखना भी चाहें. जिन लोगों ने फिल्म देख ली है उनका कहना है कि शुरुआत के 40 मिनट बाद ही आपको लगेगा कि फिल्म में देखने लायक कुछ भी नहीं बचा है. फिल्म के बारे में जिन्होंने सोचा था कि फिल्म काफी इमोशनल कर देने वाली होगी, तो वो जान लें कि ऐसा बिलकुल भी नहीं है.

वहीं, अगर हम अजय देवगन की फिल्म तान्हाजी की बात करें, तो इस फिल्म की सबसे खास बात तो ये है कि ये फिल्म अजय देवगन के करियर की 100वीं फिल्म है. इस नजरिए से भी देखा जाए तो फिल्म में कुछ तो खास जरूर होगा. ये फिल्म भी शुरुआत से ही चर्चा में रही लेकिन फिल्म को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ. फिल्म की कहानी ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जिसमें अजय के साथ लंबे समय बाद उनकी पत्नी और एक्ट्रेस काजोल उनके साथ फिल्म में नज़र आएंगी.

इसके अलावा तान्हाजी में सैफ अली खान भी हैं जो नेगेटिव रोल में हैं लेकिन उनका किरदार भी काफी दमदार है. फिल्म को मिले रिव्यु के हिसाब से ये फिल्म शुरुआत से अंत तक आपको बांधे रखेगी. कहने का मलतब है कि फिल्म में स्टार्स की शानदार एक्टिंग के साथ-साथ फिल्म के जबरदस्त एक्शन सींस आपको अपनी नज़रें हटाने नहीं देंगे. फिल्म में अजय देवगन और सैफ अली खान की एक्टिंग लोगों का दिल जीत लेगी. इतना हीं नहीं, जिस तरह से इस फिल्म ने साल 2020 की धमाकेदार शुरुआत की है, उससे तो यही लगता है कि ये फिल्म सुपरहिट तो होगी ही, साथ ही बॉलीवुड के इतिहास में भी अपनी खास जगह बनाएगी.

ये भी पढ़ें- छपाक रिव्यु – एक घंटे की कहानी को ज़बरदस्ती धकेला गया है
ये भी पढ़ें- तानाजी रिव्यु : फिल्म उतनी ही दमदार है जितना सोचा था

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तानाजी रिव्यु : फिल्म उतनी ही दमदार है जितना सोचा था https://mayapuri.com/tanhaji-movie-review/ https://mayapuri.com/tanhaji-movie-review/#respond Thu, 09 Jan 2020 17:00:30 +0000 https://mayapuri.com/?p=225054 Tanhaji review, Tanhaji ratings, Tanhaji movie

जैसा की फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद उम्मीद की जा रही थी, फिल्म उतनी ही दमदार है। ये कहना गलत नहीं होगा की तानाजी अजय देवगन के करियर की अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित हो सकती है। बता दें की तानाजी अजय देवगन की 100वीं फिल्म है। आइये देखते है Tanhaji – […]

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जैसा की फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद उम्मीद की जा रही थी, फिल्म उतनी ही दमदार है। ये कहना गलत नहीं होगा की तानाजी अजय देवगन के करियर की अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित हो सकती है। बता दें की तानाजी अजय देवगन की 100वीं फिल्म है। आइये देखते है Tanhaji – The Unsung Warrior का रिव्यु

कहानी

फिल्म शुरू होती है 1647 के समय में , जहाँ तानाजी (अजय देवगन) के पिता जो उन्हें “तांणिया” कहकर बुलाते हैं, तानाजी को तलवारबाज़ी सिखा रहें है। तानाजी की वीरता और काबिलियत यहीं से देखने को मिल जाती है। मुग़ल तानाजी के पिता की हत्या कर देते हैं, और मरने से पहले तानाजी के पिता उनसे कहते हैं “तांणिया, इस मिट्टी का क़र्ज़ अब तुझे चुकाना है”
अब कहानी 17 साल आगे 1664 में बढ़ती है, जहाँ शिवाजी महाराज(शरद केलकर) के शौर्य के बारे में बताया जाता है , सूबेदार तानाजी मालसुरे यानी तानाजी शिवाजी महाराज के दाहिने हाथ और उनके परम मित्र भी हैं। तानाजी अपने साथ कुछ सैनिको के साथ मुगलों की एक टुकड़ी को मार गिराते हैं। एक ओर जहाँ औरंगज़ेब (ल्यूक केनी) पूरे हिंदुस्तान पर मुगलिया परचम लहराने की रणनीति बना रहा है वहीँ शिवाजी महाराज भी स्वराज को लेकर ली गई कसम के प्रति कटिबद्ध हैं।
एक सुलह के तहत शिवाजी महाराज मुगलों को 23 किले दे देते हैं , जिनमे कोंडाणा किला भी शामिल था। जब मुग़ल कोंडाणा किले पर कब्ज़ा लेने आते है तो राजमाता जीजाबाई अपनी पूजा कर रहीं होती हैं , मुगलों के जोर देने पर वो कोंडाणा किला उनके हवाले कर देती हैं ,और ये शपथ लेती हैं की जब तक इस किले पर दोबारा भगवा नहीं लहराएगा वो पादुकाएं नहीं पहनेंगी।
अब कहानी 4 साल आगे बढ़ती है , तानाजी और उनकी पत्नी सावित्रीबाई (काजोल) अपने बेटे की शादी कि तैयारियों में व्यस्त हैं, तानाजी निमंत्रण लेकर शिवाजी के पास आते हैं जहाँ उन्हें पता चलता है की औरंगज़ेब ने अपने एक ख़ास अंगरक्षक उदयभान राठौड़(सैफ़ अली खान) को 2000 सैनिकों और नागिन नाम की एक तोप देकर मराठों का खात्मा करने के लिए भेजा है ,अब तानाजी जोर देकर इस मुहीम का जिम्मा अपने ऊपर ले लेते हैं।
उदयभान भी तानाजी के जैसे ही बहादुर है ,लेकिन उसके अंदर बर्बरता भरी हुई है, इसी व्यवहार के चलते वह राजकुमारी कमला देवी के पति की हत्या करने के बाद उससे विवाह रचाने के लिए उसे उठा लाता है। एक गद्दार उदयभान को खबर देता है की तानाजी अपने लोगों के साथ पहाड़ी के रास्ते पर उसका इंतज़ार कर रहा है जिसके चलते उदयभान अपना रास्ता बदल देता है।
तानाजी उदयभान के लिए काम कर रहे कुछ मराठों के साथ मिलकर एक योजना बनाता है ,और खुद को गिरफ्तार कराने के बहाने उदयभान के ठिकाने का जायजा लेकर वहां से भाग निकलता है।
अब तानाजी फिरसे अपनी फ़ौज को लेकर उदयभान पर योजनाबद्ध तरीके से हमला करता है और अपना एक हाथ गंवाने के बाद भी बहदुरी से लड़ते हुए उदयभान को मार देता है।

अवलोकन

फिल्म पहली सेकंड से ही अपने साथ जोड़ लेती है और पल भर के लिए भी नजरें हटने नहीं देती है। पहाड़ी और युद्ध के दृश्यों ने फिल्म में और अधिक जान डाल दी है।फिल्म देखते हुए ऐसा लगता है की आप एक अलग ही दुनिया में हैं। Graphics और VFX का शानदार इस्तेमाल फिल्म में देखने को मिलता है।
फिल्म का कोई भी सीन Animated या ख़यालाती नहीं लगता है। सब कुछ अपनी जगह अव्वल दर्जे का है।

डायरेक्शन

फिल्म को ओम रौत ने डायरेक्ट किया है और उनके काम का एक शानदार प्रदर्शन फिल्म में देखने को मिलता है।

संगीत

फिल्म का संगीत बहुत ही शानदार है , दृश्यों के साथ मिलकर संगीत और अधिक आनंदमय हो जाता है।

अभिनय

फिल्म के अभिनय की बात करें तो फिल्म के सभी किरदारों ने बखूबी अपने किरदार को निभाया है ।अजय देवगन ने तानाजी के किरदार में चार चाँद लगा दिए हैं , काजोल भी सावित्रीबाई के किरदार को बखूबी निभा रहीं हैं। उदयभान के क्रूर और सनकी किरदार में सैफ़ अली खान जच रहे हैं, वो फिल्म में डराते भी हैं और हँसाते भी हैं।  किसी ने भी अपने अभिनय में कोई कमी नहीं छोड़ी है।

क्यों देखें

तानाजी अजय देवगन के करियर की अब तक की सबसे हिट फिल्म साबित हो सकती है , बॉलीवुड के इतिहास में ये फिल्म अपनी एक अलग जगह बना सकती है। साल 2020 की धमाकेदार शुरुआत तानाजी के साथ हुई है।

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यह भी देखें

‘छपाक’ पर भारी पड़ी ‘तान्हाजी’

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छपाक रिव्यु – एक घंटे की कहानी को ज़बरदस्ती धकेला गया है https://mayapuri.com/chhapaak-movie-review/ https://mayapuri.com/chhapaak-movie-review/#respond Wed, 08 Jan 2020 18:58:14 +0000 https://mayapuri.com/?p=224920 Chhapaak movie review, Chhapaak movie ratings

जहाँ दर्शक ये सोचकर बैठें है की ये फिल्म एक बेहद इमोशनल कर देने वाली फिल्म है , वहां ऐसा कुछ भी नहीं है। फिल्म आपको लक्ष्मी अग्रवाल की ज़िन्दगी से जोड़ती जरूर है, उनके द्वारा झेली गयी परेशानियां दिखती ज़रूर हैं लेकिन थोड़ी देर बाद ही फिल्म बोर करने लगती है। इंटरवल तक तो […]

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जहाँ दर्शक ये सोचकर बैठें है की ये फिल्म एक बेहद इमोशनल कर देने वाली फिल्म है , वहां ऐसा कुछ भी नहीं है। फिल्म आपको लक्ष्मी अग्रवाल की ज़िन्दगी से जोड़ती जरूर है, उनके द्वारा झेली गयी परेशानियां दिखती ज़रूर हैं लेकिन थोड़ी देर बाद ही फिल्म बोर करने लगती है। इंटरवल तक तो फिल्म फिर भी किसी तरह आपको अपने साथ जोड़कर रखती है लेकिन इंटरवल के बाद तो मानो फिल्म में कुछ है ही नहीं

 

कहानी –

फिल्म शुरू होती है, देश में चल रहे निर्भया केस पर बवाल को लेकर। वहीँ अमोल (विक्रांत मैसी) के किरदार से परिचित कराया जाता है, अमोल को एक गंभीर किरदार की भूमिका में दिखाया गया है जो अब पत्रकार की नौकरी छोड़कर एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए “छाया” नामक NGO चलाता है। अब कहानी को मालती अग्रवाल (दीपिका पादुकोण) की और ले जाया जाता है, मालती अपने लिए नौकरी की तलाश कर रहीं है, लेकिन उनका जला हुआ चेहरा देखकर लोग उनसे हिचकिचाते हैं जिस कारण मालती को नौकरी नहीं मिल रही है। अब मालती की मुलाकात एक जॉर्नलिस्ट से होती है जो अमोल की दोस्त भी है, वही मालती को नौकरी के लिए अमोल से बात करने के लिए कहती है। मालती अमोल से मिलती है और उसके साथ काम करना शुरू कर देती है। अगले सीन में मालती को अपने साथ हुए हादसे को याद करते हुए दिखाया जाता है , कैसे मालती के ऊपर अचानक से तेज़ाब फेंका जाता है और मालती दर्द से कराह रही है, उसके बाद मालती को अस्पताल ले जाया जाता है जहाँ वो पुलिस को अपना बयान देतीं हैं जिसमे पता चलता है की तेज़ाब फेंकने वाला मालती का ही फैमिली फ्रैंड और मालती का मुँह बोला भाई “बब्बू” उर्फ़ बाशीर खान है। अब मालती को एक अच्छे अस्पताल में भेजा जाता है, जहाँ उनके चेहरे की सात सर्जरी की जाती है। अदालत में मालती का केस चल रहा है और बब्बू बार बार बेल पर बाहर आता रहता है। अब मालती के केस में दोषियों को सजा देने के साथ साथ देश में एसिड सेल्स बंद कर देने पर भी जोर दिया जाता है। अब फिल्म फिर से अमोल के समय में आती है और कुछ और एसिड केस सामने आते है। अमोल और मालती की नजदीकियां बढ़ने लगती हैं।
अंत में बब्बू उर्फ़ बाशीर खान को दस साल की सजा हो जाती है और देश में एसिड सेल्स को बंद तो नहीं लेकिन रेगुलेट कर दिया जाता है।

बस
जी हाँ बस.. .

कहानी अचानक ही खत्म हो जाती है।

अवलोकन –

जैसा की सभी जानते है की फिल्म एक सच्ची घटना पर आधारित है। लेकिन फिल्म को फिल्म की तरह ही देखा जायेगा इसलिए अवलोकन भी फिल्म के आधार पर ही करना बेहतर होगा।
फिल्म शुरू होते ही एक जोश का माहौल पैदा कर देती है, निर्भया केस को लेकर चल रहे आंदोलन का सीन शुरुआत में ही फिल्म के लिए आपकी जिज्ञासा बढ़ा देता है, मालती का नौकरी को लेकर चल रहा संघर्ष और लोगों का उसके लिए व्यवहार आपको भावुक करना शुरू कर देता है।मालती का फ्लैशबैक देखकर आँखें नम हो जातीं हैं और बस। असल में ऐसा लगता है की ये फिल्म बस इतनी ही है, शुरुआत के चालीस मिनट के बाद फिल्म को बस ज़बरदस्ती खींचा गया है।

संगीत –

फिल्म के लगभग सारे ही गीत काफी बेहतर हैं । फिल्म का संगीत आपकी भावुकता बढ़ाने में भी काफी मददगार साबित होता है।

अभिनय –

अभिनय की बात करें तो “विक्रांत” और “दीपिका” ने अपने अभिनय को बखूबी निभाया है। बाकी सपोर्टिंग एक्टर्स ने ठीक ठाक काम किया है। हाँ फिल्म में कोर्ट सीन को और ड्रामेटिक बनाया जा सकता था, दोनों ही तरफ के वकील अपने अपने अभिनय से लोगों में मालती के लिए और ज़्यादा भावुकता और बाशीर खान द्वारा किये गए उस घिनोने अपराध के प्रति आक्रोश पैदा कर सकते थे, लेकिन वो ऐसा करने में नाकाम रहे।

ये खबर English में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

यह भी देखें – 

‘छपाक’ के टिकट धड़ाधड़ कैंसिल कर रहे हैं लोग

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मूवी रिव्यू: नीरस भरा हास्य ‘सब कुशल मंगल’ https://mayapuri.com/sab-kushal-mangal-movie-review/ https://mayapuri.com/sab-kushal-mangal-movie-review/#respond Mon, 06 Jan 2020 05:47:32 +0000 https://mayapuri.com/?p=224556

रेटिंग** नये साल के आरंभ में निर्देशक करण विश्वनाथ कश्यप की फिल्म‘ सब कुशल मंगल’ से ,जंहा भोजपुरी स्टार रवि पर किशन की बेटी रीवा किशन वहीं पूर्व अभिनेत्री पद्मनी कोल्हापुरे के बेटे प्रियांक शर्मा का डेब्यु हुआ है। इस हास्य फिल्म का सार कुछ यूं रहा। कहानी कर्नलगंज का लोकल एक ऐसा बदमाश बाबा […]

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रेटिंग**

नये साल के आरंभ में निर्देशक करण विश्वनाथ कश्यप की फिल्म‘ सब कुशल मंगल’ से ,जंहा भोजपुरी स्टार रवि पर किशन की बेटी रीवा किशन वहीं पूर्व अभिनेत्री पद्मनी कोल्हापुरे के बेटे प्रियांक शर्मा का डेब्यु हुआ है। इस हास्य फिल्म का सार कुछ यूं रहा।

कहानी

कर्नलगंज का लोकल एक ऐसा बदमाश बाबा भंडारी यानि अक्षय खन्ना जो जबरिया शादी करवाने का धंधा करता है। एक बार वो एक टीवी होस्ट प्रियांक शर्मा को अगवा कर लेता है। लेकिन जब वो जिस लड़की रीवा किशन के लिये प्रियांक का अगवा करता है, उसे पता चलता है कि पता नहीं कब वो स्वंय उससे प्यार करने लगा है। क्या वो उस लड़की से खुद शादी करने में कामयाब हो पाता है या नहीं। ये फिल्म, देखने के बाद ही पता चल पायेगा।

अवलोकन

फिल्म का जो मतलब था उसमें डायरेक्टर आंशिक तौर पर सफल हुआ यानि फिल्म का मकसद था कॉमेडी, लेकिन दर्शक को हंसाने में फिल्म एक हद ही कामयाब कही जा सकती है। क्योंकि पमरी फिल्म में कहीं भी कैसा भी फन नहीं दिखाई देता। ऊपर से अक्षय खन्ना की ड्रामेटिक एन्ट्री खीज पैदा करती है। खासकर उसका लुक जिसमें बड़ी मूछें तथा बड़े बाल हास्य नहीं बल्कि उसे हॉरर लुक देते लगते हैं। हालांकि बतौर एक्टर वो काफी इम्प्रेसिव है, लेकिन कमजोर कथा पटकथा के जरिये वो चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता।

अभिनय

अक्षय खन्ना के लुक को नजरअंदाज कर दिया जाये तो उसने अपनी भूमिका को बढ़िया अभिव्यक्ति देने की सार्थक कोशिश की है। प्रियांक शर्मा जहां हीरो के तौर पर पूरी तरह से अनफिट साबित होता है, वहीं रीवा किशन भी हिन्दी फिल्मों के लायक नहीं। हां भोजपुरी फिल्मों में उसका भविष्य उज्जवल है। फिल्म को संभालने में सुप्रिया पाठक, सतीश कौशिक और राकेश बेदी को बहुत बड़ा हाथ रहा।

क्यों देखें

कहा जा सकता है कि साल की शुरूआत में ही दो नये चेहरे असफल साबित हुये। दर्शक चाहे तो कुछ नया देखने के लिये फिल्म देख सकते हैं।

और पढ़े: पुरूषों को लेकर सनी लियोन का बड़ा बयान

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मूवी रिव्यू: हल्का फुल्का हास्य ‘शिमला मिर्ची’ https://mayapuri.com/shimla-mirchi-movie-review/ https://mayapuri.com/shimla-mirchi-movie-review/#respond Sat, 04 Jan 2020 09:38:49 +0000 https://mayapuri.com/?p=224439 शिमला मिर्ची

रेटिंग** कहते हैं हर फिल्म की अपनी किस्मत होती है। इसीलिये किसी फिल्म में न जाने क्यों तरह तरह की दुश्वारियां पैदा हो जाती है। जैसे रमेश सिप्पी निर्देशित फिल्म ‘ शिमला मिर्ची’ जिसमें न जाने क्यों रूकावटे आती रहीं और इस तरह फिल्म करीब पांच साल लेट हो गई। हल्के फुल्के हास्य को लेकर […]

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शिमला मिर्ची

रेटिंग**

कहते हैं हर फिल्म की अपनी किस्मत होती है। इसीलिये किसी फिल्म में न जाने क्यों तरह तरह की दुश्वारियां पैदा हो जाती है। जैसे रमेश सिप्पी निर्देशित फिल्म ‘ शिमला मिर्ची’ जिसमें न जाने क्यों रूकावटे आती रहीं और इस तरह फिल्म करीब पांच साल लेट हो गई। हल्के फुल्के हास्य को लेकर शुरू हुई इस फिल्म पर वक्त की मार साफ साफ दिखाई देती है।

कहानी

अविनाश यानि राजकुमार राव एक शर्मिला लड़का है। जो शिमला घूमने जाता है। वहां उसे वहां की लोकल लड़की नैना यानि रकुल प्रीत दिखाई देती है जिसे देखते ही वो उसे प्यार करने लगता है वो उसके सामने अपने प्यार का इजहार करना चाहता है लेकिन अपने शर्मीले स्वभाव के कारण नहीं कर पाता, लिहाजा वो वहां एक रेस्ट्रारेंट में काम करने लगता है। एक दिन वो हिम्मत जुटाकर नैना को खत लिखता है लेकिन वो खत नैना की तलाकशुदा मां रूक्मणी यानि हेमा मालिनी को मिल जाता है। गलत फहमी के तहत रूक्मणी खत मिलते ही अपने आप को तैयार करना शुरू कर देती है। इसके बाद क्या होता है ये फिल्म में देखना बेहतर होगा।

अवलोकन

जैसा कि बताया गया कि फिल्म को रिलीज होने तक पांच साल का सफर तय करना पड़ा। फिल्म पर लंबे समय का असर साफ दिखाई देता है। फिल्म अपने पहले भाग से ही खिंची नजर आने लगती हैं लिहाजा पहले से ही उसका कमजोर पक्ष नजर आने लगता है। फिल्म के अंत का दर्शकों को पहले से ही एहसास हो जाता है।

अभिनय

राजकुमार राव अपने रोमांटिक रोल में अच्छे रहे। उसी प्रकार रकुल प्रीत ने भी अपनी भूमिका के साथ न्याय किया,लेकिन हेमा मालिनी की अपनी भूमिका के तहत कॉमेडी देखने लायक है। शक्ति कपूर दर्शकों को हंसाने की जबरदस्ती कोशिश करते नजर आते हैं।

क्यों देखें

हल्के फुल्के हास्य के लिये फिल्म देखी जा सकती है।

और पढ़े: क्या ‘द बिग बुल’ अभिषेक बच्चन के लिए मील का पत्थर साबित होगी?

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मूवी रिव्यू: हास्य भरे मनोरंजन से भरपूर पारिवारिक फिल्म ‘गुड न्यूज’ https://mayapuri.com/good-newwz-movie-review/ https://mayapuri.com/good-newwz-movie-review/#respond Thu, 26 Dec 2019 12:35:47 +0000 https://mayapuri.com/?p=223405

रेटिंग 3.5 आज फिल्मों के सौजन्य से कुछ ऐसी बातें भी देखने को मिल रही हैं जो सीधे कितने ही कपल्स को फायदा पहुंचाती है । राज मेहता निर्देशित फिल्म ‘ गुड न्यूज’ उन दंपतियों को गुड न्यूज देती है जो औलाद से वंचित हैं। फिल्म के द्धारा दिया गया मैसेज निसंतान लोगों को  हास्य […]

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रेटिंग 3.5

आज फिल्मों के सौजन्य से कुछ ऐसी बातें भी देखने को मिल रही हैं जो सीधे कितने ही कपल्स को फायदा पहुंचाती है । राज मेहता निर्देशित फिल्म ‘ गुड न्यूज’ उन दंपतियों को गुड न्यूज देती है जो औलाद से वंचित हैं। फिल्म के द्धारा दिया गया मैसेज निसंतान लोगों को  हास्य भरे मनोरंजन के द्धारा एक तकनीक से परिचित करवाता है।

कहानी

मुंबई में एक अपरक्लास कपल वरूण बत्रा (अक्षय कुमार) दीप्ती बत्रा रहते हैं । दोनों की शादी को सात साल हो चले हैं लेकिन उनके यहां अभी तक औलाद पैदा नहीं हो पाई । दीप्ती जहां पेशे से एक पत्रकार है और बच्चे के लिये डिस्प्रेट है वहीं वरूण इस मामले में शांत है ।जब कि दोनों के ऊपर उनके सगेसंबधियों तथा सामाजिक प्रेशर भी बना हुआ है । एक  दिन दोनों को वरूण की बहन अंजना सुखानी के  दिल्ली स्थित घर लोहड़ी मनाने के लिये जाना पड़ता हैं वहां अजंना उन्हें डा. जोशी दंपति (आदिल हुसॅन, टिस्का चैपड़ा) के पास जाने की सलाह देती हैं जंहा उन्हें आई वीएफ नामक तकनीक  से  पेरेन्ट्स बनाया जा सकता है । दीप्ती इसके लिये वरूण को कैसे भी तैयार करती है । लेकिन डा. जोशी के ट्रीटमेंट के तहत उन दोनों की जिन्दगी में एक ऐसी मुसीबत सामने  आ जाती  है जो उनकी जिन्दगी उथल पुथल कर देती है । दरअसल उनकी तरह पंजाब से भी एक जोड़ा हनी  बत्रा (दिलजीत दोसांझ) और मोनिका बत्रा (कियारा आडवानी) बच्चे के लिये वहां इलाज करवाने आये हैं । गलती से वरूण और हनी के स्पर्म चेंज हो जाते हैं। इस प्रकार अब हनी का स्पर्म दीप्ती के पेट मे चला जाता है और वरूण का मोनिका के पेट में ।इसके बाद दोनों जोड़ी की लाइफ में कैसे कैसे मूमेंट्स आते हैं ये फिल्म में देखते हुये ज्यादा मजा आयेगा ।

अवलोकन

फिल्म की विशेषता ये हैं कि फिल्म विकी डोनर की तरह कवशय को लेकर  इस फिल्म में भी कहीं अष्लीलता नजर नहीं आती, बल्कि आइवीएफ जैसी तकनीक से दर्शकों को वाकिफ़ करवाने के लिए काॅमेडी का सहारा लिया गया है । लिहाजा फिल्म का पहला भाग चारों किरदारों के क्रियाकलापों से खूब हास्य भरा मनोरंजन पैदा करता है । लेकिन दूसरे भाग में ड्रामा के तहत औरत और मर्द के बीच बच्चे की पैदाइश को लेकर एक दूसरे के योगदान का विषलेशण दिखाया गया है । फिल्म की  यूनिक कथा, पटकथा काफी चुस्त और टाइट है, संपादन कसा हुआ और म्युजिक की बात की जाये तो ‘सौदा खरा खरा’ तथा ‘चंडीगढ मे’ जैसे गीत काफी लोकप्रिय हो रहे हैं ।

अभिनय

अक्षय कुमार ने अपने किरदार को कुछ ऐसी शक्ल दी कि वे अपने वन लाइनर संवादों से दर्शकों को लगातार हंसाते रहते हैं, वहीं करीना कपूर ने बच्चे के लिये किसी भी हद तक जाती पत्नि की भूमिका इतनी दक्षता से निभाई हैं कि उसमें रीयलनेस और उच्चस्तर का दंभ प्रभावी तौर पर उभर कर आता है । लेकिन दिलजीत दोसांझ मनोरंजन करने के  नाम पर सबसे आगे नजर आते हैं उनकी गजब की काॅमिक टाइमिंग दर्शकों को पेट पकड़कर हंसने पर मजबूर कर देती है, वहीं मोनिका की भूमिका में कियारा आडवानी का अभिनय भी दर्शनीय बन पड़ा है । इनके साथ डॉक्टर कपल की भूमिका में आदिल हुसॅन और टिस्का चैपड़ा भी प्रभावी रहे ।

क्यों देखें

 एक साथ बैठकर फिल्म देखने वाले  परिवार इस हास्य भरी पारिवारिक फिल्म का   भरपूर मजा ले सकते हैं ।

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मूवी रिव्यू: बेदम हुई ‘दबंग 3’ https://mayapuri.com/movie-review-dabangg-3/ https://mayapuri.com/movie-review-dabangg-3/#respond Sat, 21 Dec 2019 04:41:51 +0000 https://mayapuri.com/?p=222546 'दबंग 3'

रेटिंग** वो कहते हैं न कि जिसका काम उसकी को साजे, दूसरा करे तो……? ये कहावत प्रभूदेवा निर्देशित फिल्म ‘ दबंग 3’ पर पूरी तरह से आयत होती है ।दरअसल फिल्म की कहानी इस बार सलमान ने लिखी है,जंहा सलमान ने सब कुछ दिखाने के चक्कर में पूरी कहानी घिचपिच करके रख दी । लिहाजा […]

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'दबंग 3'

रेटिंग**

वो कहते हैं न कि जिसका काम उसकी को साजे, दूसरा करे तो……? ये कहावत प्रभूदेवा निर्देशित फिल्म ‘ दबंग 3’ पर पूरी तरह से आयत होती है ।दरअसल फिल्म की कहानी इस बार सलमान ने लिखी है,जंहा सलमान ने सब कुछ दिखाने के चक्कर में पूरी कहानी घिचपिच करके रख दी । लिहाजा दर्शक शुरू से अंत तक फिल्म में कुछ ऐसा देखने के लिये बैठा रहता हैं जिसे देखने के लिये वो मंहगा टिकट( लगभग दुगने दाम) लेकर आया था, लेकिन बाद में उसके हाथ सिर्फ मायूसी ही लगती है।

कहानी

चुलबुल पांडे (सलमान खान) अब एस पी बनकर एक नई जगह आता है और आते ही अपने चिरपरिचित अंदाज में एक शादी से लूटे हुये गहने बदमाशों से वापस लेता है। इस चक्कर में उसका सामना एक ऐसे माफिया सरगना बाली (सुदीप किच्चा) से होता है, जिसे देखते ही चुलबुल का अतीत उसके सामने आ जाता है लिहाजा उसके बाली द्धारा दिये गये घाव एक बार फिर हरे हो जाते हैं। दरअसल अपनी शुरूआती जवानी के दौर में चुलबुल धाकड़ के नाम से जाना जाता था, उन्हीं दिनों उसे एक लड़की खुशी (सई मांजरेकर) से प्यार हो जाता है। बाद में सलमान खुषी को डॉक्टर बनाने का बीड़ा उठाता है। खुशी ही धाकड़ को चुलबुल नाम देती है। उसी दौरान खुषी पर बाली जैसे र्दुदांत अपराधी की नजर पड़ जाती है और वो उसे देखते ही अपनी बनाने को फैसला कर लेता है। लेकिन जब उसे पता चलता है कि खुशी चुलबुल से प्यार करती है तो वो चुलबुल के सामने खुशी और उसके पेरेन्ट्स को मार देता है और इल्जाम चुलबुल पर लगा देता है। कोर्ट से बरी हो सलमान पुलिस में भर्ती हो जाता हैं और ट्रेनिंग कंपलीट करने के बाद सबसे पहले बाली का सफाया करता है। अब एक अरसे बाद एक बार फिर उसका बाली जैसे खूंखार अपराधी से सामना होता है तो उसके सामने फर्ज और परिवार की सलामती दोनों की जिम्मेदारी आ जाती है। जिसे वो हमेशा की तरह पूरी शिद्दत और ईमानदारी से निभाता है।

अवलोकन

दरअसल सलमान की डिमांड पर प्रभूदेवा ने दो घंटे में ही सब कुछ दिखाने के चक्कर में चुलबुल पांडे को घुलमिल पांडे बना दिया। सलमान की लार्जर दैन लाइफ इमेज को और गहरा बनाने के चक्कर में उसके अतीत और वर्तमान को कुछ इस तरह मिलाने की कोशिश की, जिसमें साफ साफ दिखाई देता है कि वो सब लगभग जबरदस्ती किया जा रहा है ।फिल्म में जब भी कुछ नया दिखाने की कोशिश की गई कहानी पटरी से उतर जाती है। ऐसा लगता है कि सब कुछ बहुत जल्दी दिखाने की जल्दी है। पहले भाग में चुलबुल का अतीत, जहां एक नई तारिका का आगमन होता है। दूसरे भाग में चुलबुल अपने चिरपरिचित परिवार के साथ दिखाई देता है और वो अपने दुश्मन बाली से अपने परिवार और अपने फर्ज की रक्षा करते हुये गाते नाचते दो दो हाथ करता दिखाई देता है। कहानी जो सलमान ने लिखी हैं फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष साबित हुई है इस प्रकार साधारण पटकथा और सुने सुनाये संवाद फिल्म को बोझिल बनाये रखते हैं। संगीत की बात की जाये तो बेशक मुन्ना बदनाम हुआ दसवें पायदान पर है, लेकिन सभी गीत,  पहली दबंग एक के संगीत की छाया के नीचे दबे हुये हैं।

अभिनय

अभिनय की बात की जाये तो सलमान इस बार कुछ भी नया नहीं दिखा पाये सिवाये अपने चिरपरिचित अंदाज के। हां उनका एक्शन दर्शनीय कहा जा सकता है। सई मांजरेकर बेहद मासूम है लेकिन उसके डेब्यू को दमदार नहीं कहा जा सकता। सोनाक्षी सिन्हा अपने पहले वाले अंदाज में पहले की तरह बहुत खुबसूरत लगी है। अरबाज खान कुछ नया करते हुये भी साधारण ही लगते हैं। साउथ के स्टार सुदीप किच्चा खलनायकी में पूरे नबंरो से इसलिये पास करार दिये जाते हैं क्योंकि भूमिका में कुछ न होते हुये भी उन्होंने अपने अभिनय से उसे खास बना दिया। मरहूम विनोद खन्ना की कमी को उनके भाई लगभग पूरी करते नजर आते हैं। बाकी छोटे रोल्स में डिंपल कापड़िया, नवाब षाह तथा आइटम सांग में वरीना हुसॅन ठीक ठाक काम कर गये।

क्यों देखें

हालांकि इस फिल्म को दबंग की जगह बेदम कहना ज्यादा उचित होगा, बावजूद इसके सलमान के प्रशंसक टिकटों के लगभग दुगने दाम देकर भी फिल्म देख सकते हैं।

और पढ़े: 45 साल के इस एक्टर के साथ जोड़ा गया नाम, अब बचपन के दोस्त संग करेंगी शादी

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