मेहनत के बलपर आगे आनेवाले भाई-बहन- हुमा कुरैशी और साकिब सलीम फिल्म इंडस्ट्री के लिए उदाहरण हैं

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हुमा कुरैशी अपनी नई फिल्म ‘बेलबॉटम’ को लेकर काफी उत्साहित हैं। अक्षय कुमार के साथ इस फिल्म में हुमा का किया गया काम उनको इसलिए और भी उत्साहित किये हुए है कि फिल्म थियेटर में रिलीज है।

“यह मौका पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए उत्साह का है कि एक गैप के बाद फिल्म सिनेमा घरों में देख पाने का मौका आया है। मैं तो बहुत उत्साहित हुई हूं… वहीं समोसे का स्वाद, पॉपकॉर्न का क्रंच और थिएटर में फिल्म देखने की अनुभूति! वाकई मज़ेदार मौका है।”

रक्षाबंधन के पर्व को लेकर भी हुमा वैसा ही उत्साह ज़ाहिर करती हैं- “भाई- बहन के लिए भी एक पर्व है जो ‘रक्षाबंधन’ का पर्व है। यह सोचना ही मन को उत्साह से भर देता है। हम सब बहन- भाई ( तीन भाई- साकिब सलीम जो एक्टर हैं, तथा नईम और हसीन) हर त्योहार का भरपूर लुत्फ उठाया करते हैं, पर्व चाहे भी जिस धर्म का हो, हम सेलिब्रेट करते है।”

“एक ही फिल्ड में काम करते हुए आप और साकिब एक दूसरे को सपोर्ट करते हो या नहीं?” के जवाब में हुमा कहती हैं – “हम इंडिपेंडेंट रहनेवाले भाई- बहन हैं। वो अपना काम खुद हैंडिल करते हैं मैं अपना। कभी ऐसी ज़रूरत नहीं आती और आती है तो हम मिलकर उस टॉपिक पर खुलकर चर्चा करते हैं।” दरअसल ऐसा देखा गया है कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग काफी खुली सोच के होते हैं। साकिब भी मानते हैं कि वो अपनी बहन (हुमा) के साथ बेझिझक हर टॉपिक पर चर्चा कर सकते हैं। चाहे विषय पर्सनल हो, इमोशनल हो या कैरियर रिलेटेड हो, वो दोनों दोस्त की तरह से एक दूसरे के साथ उस विषय पर चर्चा करते हैं। साकिब की पहली फ़िल्म थी 2011 में आई फिल्म “मुझसे फ्रेंडशिप करोगे” तब सबसे ज्यादा खुश हुमा हुई थी। यही बात एक साल बाद हुमा की फिल्म “गैंग ऑफ वासेपुर”(2012) आनेपर साकिब की खुशी में प्रकट हुआ था। दोनो एक्टर भाई-बहनों ने लगभग एक साथ थियेटर जॉइन किया था और एक साथ अलग अलग मॉडलिंग में मौके पाए थे। साकिब पिता सलीम हुसैन के रेस्टोरेंटस व्यवसाय से जब अलग कुछ करने की ठाने थे, तब घर मे सिर्फ हुमा थी जो उनकी इस सोच में शामिल थी कि वो फिल्मों में काम करने के लिए मुम्बई जाएं। और ऐसा ही कुछ हुमा के निर्णय पर कि वह कालकाजी दक्षिण दिल्ली से मुंबई में बॉलीवुड में एकिं्टग के लिए जाएगी, साथ उनका साकिब ने दिया था- उसके विचारों का- घर मे सबके विरोध के वावजूद। हुमा कहती हैं- ‘हम एक फिल्ड में रहकर काम करते हैं, एक पेशे में रहकर खासकर फिल्म इंडस्ट्री में भाई- बहन का साथ काम करना लोगों के लिए मुश्किल भरा काम दिखाई देता है। लेकिन, हमें कोई दिक्कत नही महसूस हुई कभी। भाई बहन एक दूसरे की ताकत भी तो बन सकते हैं?”

 

कभी कभी एक दूसरे की गॉसिप खबरों को लेकर चिंतित भी होते हैं? “ऐसा होना फिल्म इंडस्ट्री की हवा में शामिल है। तब एक दूसरे को फोन करके या मिलकर सच जानने की कोशिश जरूर करते हैं आखिर भाई बहन का रिश्ता जो है।” हुमा कभी अपनी फिल्मों (‘लवशव चिकन खुराना’ , ‘एक थी डायन’, ‘डेढ़ इश्किया’, ‘शार्ट’, ‘हाईवे’, ‘बदलापुर’, ‘जॉली एलएलबी 2’, ‘दुबारा’ आदि) अथवा वेब सीरीज ‘लैला’ या  ‘महारानी’ हो, वह रिलीज पूर्व  बात नहीं करती।  इसलिए ‘बेलबॉटम’ को लेकर बस इतना कहती हैं- “फिल्म देखकर लोगों को मेरा काम अच्छा लगे… बस, इतना ही कहूंगी।मैं तो बस इतनी सी बात से खुश हूं कि फिल्म थियेटर में रिलीज है।”  हुमा और साकिब ऐसे भाई बहन हैं फिल्म इंडस्ट्री के जो अपनी मेहनत के बल पर अपनी जगह बनाए हैं।

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Mayapuri