मूवी रिव्यू: बॉलीवुड, फैशन वर्ल्ड या मॉडलिंग वर्ल्ड के दूसरे पक्ष से परिचित करवाती फिल्म – ‘कैलेंडर गर्ल्स’

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रेटिंग***

मधुर भंडारकर की फिल्म ‘कैंलेंडर गर्ल्स’ की कहानी में बेशक उनकी पिछली फिल्मों फैशन या हीरोइन का भारी मात्रा में डोज है लेकिन वो जरूरी इसलिये था क्योंकि बॉलीवुड या फैशन वर्ल्ड की कहानी का हिस्सा ही तो है कैलेंडर गर्ल्स। मधुर कहानी के जरिये जो बताना चाहते थे वो उन्होंने पूरी ईमानदारी से बताया है ।

कहानी

हर वर्ष कई बड़ी कंपनियों द्वारा एक हॉट कैलेंडर निकाला जाता है। इसके लिये बड़े पैमाने पर सेक्सी और हॉट लड़कियों का चुनाव किया जाता है। ऐसे ही एक कैलेंडर के लिये कई जगह से आई लड़कियों में से पांच का सलेक्शन किया जाता है। इनमें एक रोहतक हरियाणा से रूही सिंह हैं एक हैदराबाद से अकांक्षा पुरी एक गोवा  से कायरा दत्त एक पाकिस्तान लाहौर से अवनी मोदी तथा एक कोलकाता से सतरूपा। इनका बाद में बहुत हॉट शूट होता है और कैलेंडर आने के बाद हमेशा की तरह ये पांचों स्टार्स बन जाती है।

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इनके पास फिल्मों मॉडलिंग फैशन शो और प्रिन्ट शूट के ढेरों आफर्स आते हैं लेकिन कुछ दिन बाद इनमें से जब अकांक्षा पुरी का कुछ नहीं होता पाता तो वो वापस गोवा चली जाती है लेकिन लाहौर से आई नाज यानि अवनी मोदी जिससे पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध होने स्वरूप मिली हुई फिल्म वापस ले ली जाती है तो वा क्या करे क्योंकि वो तो वापस भी नहीं जा सकती इसलिये बाद में वो मजबूरन स्कार्ट गर्ल बनकर बड़े लोगों के बिस्तर गरम करने लगती है। मयूरी चौहान राजस्थान के बड़े नारंग घराने में शादी कर लेती है तथा नंदिता मेनन अपनी और अपने मैनेजर की तिकड़मों से बॉलीवुड में अपने पांव जमा लेती है। ये सारी मयूरी की शादी में मिलती हैं वहीं एक चैनल के पत्रकार से कायरा की मुलाकात होती हैं वो उसे अपने चैनल में एंकरिंग का ऑफर देता है कायरा यहां कामयाब हो जाती है और एक दिन वो एकंर से न्यूज रीडर बन जाती है। मयूरी अपने पति की बेवफाई से नाराज़ है तो एक दिन उसे उसके ससुर समझाते है कि ये तो हमारी पंरपरा हैं हमारा इतना बड़ा बिजनिस है इसलिये स्ट्रैस होने पर ये सब होता रहता है  लेकिन वो कभी जुड़े हुये रिश्ते को तोड़ने की कोशिश न करे। इधर नाज यानि अवनी वैश्यावृति से तंग आ चुकी है वो इस दलदल से निकलना चाहती है लेकिन एक दिन वो इस धंधे को छोड़ने के चक्कर में एक एक्सिडेंट में दुनिया ही छोड़ने पर मजबूर हो जाती है। कायरा अपने पुराने ब्वायफेंड के बहकावे में आकर क्रिकेट फिक्सिंग में आकर अरेस्ट हो जाती है और बाद में जमानत पर बाहर आकर उसे एक रियेलिटी शो के जरिये जिन्दगी में एक मौका और मिलता है। इस बीच एक साल बीत जाता है और लोगों की दीवारों पर नई कैलेंडर गर्ल्स आ जाती हैं।

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निर्देशन

मधुर ने पूरी ईमानदारी से कैलेंडर गर्ल्स के भविष्य को सेल्यूलाइड पर उतारा है। मध्यांतर से पहले कैलेंडर गर्ल्स को तैयार करने में और उन्हें शूट करते वक्त काफी ग्लैमर है बावजूद इसके दर्शक फिल्म और फिल्म के किरदारों से नहीं जुड़ पाता क्योंकि वो ऐसे किरदार पहले भी मधुर की ही फिल्मों में देख चुका है। मध्यांतर के बाद फिल्म में गति आती हैं जब किरदार अपने आप से स्ट्रगल करने लगते हैं। कोई अपनी चुतुराई से वो सब पा जाता है जिसका वो सपना देखता हुआ यहां आया था, किसी को कुछ और मिल गया या कोई सब कुछ पाकर भी संतुष्ट नहीं हैं और कोई तो अपनी जिन्दगी से ही हाथ धो बैठा। ये सब मधुर ने बहुत ही शाईस्तगी से दिखाया है। उनकी अन्य फिल्मों की तरह यहां भी ग्लैमर है भव्यता है लेकिन नयापन नहीं है। फिर भी ये फिल्म उनकी अन्य फिल्मों से बहुत ही कम बजट की हैं इसलिये उन्हें घाटा होने का तो सवाल ही पैदा नही होता क्योंकि फिल्म हिट नही तो एवरेज तो है ही ।

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अभिनय

नये कलाकारों से भी मधुर ने पुराने एक्टर्स जैसा काम करवाया है यानि पांचों लड़कियों अकांक्षा पुरी, अवनी मोदी, कायरा दत्त, सतरूपा तथा रूही सिंह ने बढि़या अभिनय किया है। पांचों ही अपने सेक्सी अवतार में खूब फबी है । किरन कुमार तथा सुहेल सेठ आदि का अच्छा सहयोग रहा।

संगीत

संगीत की बात की जाये तो मीत ब्रदर्स, अंजान और अमाल मलिक की कुछ अच्छी कंपोजिंग रही।

क्यों देखें

बॉलीवुड, फैशन वर्ल्ड या फिर मॉडलिंग वर्ल्ड के दूसरे पक्ष की सच्चाई से परिचित होना हैं तो ये फिल्म मिस न करें ।

 

 


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Mayapuri

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