‘प्रकाश झा’ कि ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ पर लगा बैन

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बॉलीवुड में महिलाओं के अधिकार को लेकर काफी फ़िल्में बनती हैं और हिट भी होती है। पर कभी कभी महिलाओं के प्रति धारणा देखने में कुछ फ़िल्में सेंसर में ही अटक जाती है जी हाँ हम बात कर रहे है। प्रकाश झा की आने वाली फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ को सेंसर बोर्ड ने रिलीज़ के लिए मना कर दिया। उनका कहना है की  “फिल्म की कहानी महिला केंद्रित और जीवन के बारे में उनकी कल्पनाओं पर आधारित है। इसमें लगातार आपत्तिजनक दृश्य, अपमानजनक शब्दों, अश्लील ऑडियो और समाज के एक खास तबके के प्रति थोड़ी संवेदनशील है। इस वजह से फिल्म को मंजूरी नहीं दी जा सकती है.” फिल्म में कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह ने भूमिकाएं निभाई हैं। फिल्म में देश के एक छोटे शहर की अलग उम्र की चार महिलाओं के जीवन को दिखाया गया है, जिसमें वे कई तरह की आजादी की तलाश करती हैं।

आपको बता दें की सेंसर इस फिल्म को किस वजह से ख़ारिज कर रहा है , जो फेंटेसी में लिपटे हैं और जिनमें सेक्स, गाली-गलौज और ऑडियो पॉर्नोग्राफी शामिल है। वही फिल्म के निर्देशक अलंकृता श्रीवास्तव का कहना है की इस फैसले को ‘महिलाओं के अधिकार पर हमला’ कहा है. मुझे लगता है कि हमारी फ़िल्म को सर्टिफिकेट देने से इंकार करना वुमन राइट्स पर हमला है। कहानियों में हमेशा महिलाओं के रोल को कम करके या उन्हें वस्तु की तरह दिखाकर पितृ-तंत्र को बढ़ावा दिया जाता रहा है। इसलिए उनके प्रभुत्व को चुनौती देने वाली लिपस्टिक अंडर माई बुरका जैसी फ़िल्मों को शिकार बनाया जाता है। ये महिलाओं का दृष्टिकोण दिखाती है। क्या महिलाओं के लिए फ्रीडम ऑफ़ एक्सप्रेशन नहीं है।


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Mayapuri

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