मुझे फीमेल सिंगर बनना है – चच्चा फिल्मी

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कभी-कभी लगता है कि बॉलीवुड वालों की एक अलग ही दुनिया है। थोड़ी रंगीन, थोड़ी मस्त.. थोड़ी सैक्सी और थोड़ी अजीबोगरीब। सही कह रहा हूं मैं। यहां सिर्फ ‘आज’ को जीया जाता है। कल का कोई भरोसा नहीं। हर नायक, हर खलनायक, हर नायिका, हर म्यूजिक डायरेक्टर सभी का आज ही आज है। कल गुमनाम है.. कल अनजान है। और हर आने वाला कल, किसी नये सूरज को चमकाने लगता है।
आप भी कहेंगे कि क्या हंसी मजाक की बजाय मैं कड़वी हकीकत बयां करने लग गया हूं। पर यही सच है। और इस सच का अहसास मुझे तब और भी ज्यादा हुआ जब पिलपिले खीरे के बीज की तरह ढिलमिलाए चच्चा फिल्मी सुबह-सुबह मेरी गरीबखाने पर तशरीफ का टोकरा पटकने आ गये। “क्या बात है चच्चा, सुबह सवेरे, ना नमाज ना अरदास, ना दुआ ना सलाम… बस दनदनाती अखबार की तरह सीधे मेरे आंगन में कैसे अवतार ले लिया आपने?” मैंने मुंह में जुगाली करते ब्रुश को एक तरफ रखते हुए पूछा।
“अब क्या बताऊं भतीजे…” चच्चा फिल्मी लगभग गाने की असफल कोशिश करते हुए मिनमिनाए। “मुझे आज से आज फीमेल सिंगर बनना है श्रेया घोषाल जैसा, सुनिधि चौहान जैसा, “बस तुम बना दो…कुछ जुगाड़ लड़ा दो।”
मैं हैरान, मैं परेशान… पहली बात चच्चा किसी भी ऐंगल से सिंगर नही लगते। बेशक आजकल बेसुरी, भोण्डी आवाजें भी पसंद की जा रही है। बेशक मीका सिंह, रेशमिया भी अपना अलग अंदाज बना कर सुपरहिट हो रहे है। पर वो मर्द होकर मर्दाना गाने गा रहे है। कम से कम जेण्डर तो नही बदला।
चच्चा फिल्मी मर्द होकर जनानी आवाज में गाना चाहते है यह बात मुझे हज्म नही हो रही थी। फिर भी कलेजे पर पत्थर रखकर मैंने उनसे यह पूछने की गुस्ताखी कर ही दी।
“लाहौल विला कुव्वत..अरे, हमारा गला…हमारी आवाज… हम मेल आवाज में कुलबुलाएं या फीमेल आवाज़ में जुगाली करें… आप को क्या करना है।” चच्चा अपने चार जगह पैबन्द लगे कुर्ते में से हिलते हुए फुसफसाए।
‘पर चच्चा, फीमेल सिंगर बन कर करोगे क्या? “ना तो कोई दूसरी लता मंगेशकर बन पाई है। ना आशा भोंसले का जोड़ मिला है। फिर आप किस खेत की मूली है? चच्चा के अचकचाने पर ध्यान ना देकर पूछा।
‘देखो, अगर हम फीमेल सिंगर बनेंगे तो लोग हमारे आगे पीछे घूमेंगे। वर्ना देख लो कहां गए सोनू निगम, शैलेन्द्र सिंह, उदित नारायण… शहद जैसी आवाजों के बावजूद मार्केट में नज़र नहीं आते.. वही जरा नई फीमेल सिंगरों को देखो… मिनी स्कर्ट में… कयामत ढाती और बलखाती नजर आती है। गाना आता हो या ना आता हो.. अपनी अदाओं से, नाचकर सबको दीवाना बना रखा है। मुझे भी बैले, रम्भा-सम्भा डांस करके और बिकनी पहनकर स्टेज शो करने है। पैसा भी बरसेगा और लोग दीवाने भी हो जायेंगे।“ चच्चा ने अपने अंदर का दर्द पान की गिलौरी में लपेट के बयां कर दिया।
चच्चा फिल्मी जैसे भी हो, उनकी बात कहीं ना कहीं मुझे अंदर तक कचोट गई। काबिल गायकों को हम अनदेखा कर रहें है और शोर शराबा, डबलमीनिंग व अश्लील गीत गाने वाले चांदी लूट रहे है। फीमेल सिंगर, सिंगर कम मॉडल ज्यादा बनती जा रही है। लिबास छोटा हो जाने से उनका बदन हिट हो सकता है पर आवाज…! कहां से लायेगी लता, आशा, सुलक्षणा पंडित, सुरैया, सुमन कल्याणपुर, अनुराधा पोडवाल, गीता दत्त, कविता कृष्णामूर्ति, शमशाद बेगम, अल्का याज्ञनिक जैसी आवाज..
शायद किसी ने सच ही कहा था। कि ऐसा कलयुग आयेगा। हंस चुगेगा दाना तिनका कौआ मोती खायेगा।
(लेखक हरविन्द्र मांकड़)


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