मेरी है या तेरी ‘कॉम’ अच्छी है – चच्चा फिल्मी

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मैं अक्सर प्रियंका चोपड़ा को पसंद करता रहता हूं। कभी उसकी शानदार एक्टिंग के लिए तो कभी उसकी खूबसूरती के लिए। दो-तीन बार मेरी उससे मुलाकात भी हुई है। कोई इगो नही, कोई स्टारनी वाला नखरा नही, एक सरल मौहल्ले की लड़की जैसी प्यारी-प्यारी बातें करती है। मामला तब बिगड़ा जब मैंने अपनी प्रियंका चोपड़ा से हुई मुलाकात का जिक्र चच्चा फिल्मी से कर दिया। दीवाली के फुसफुसे पटाखे में से निकले धुयें जैसे फुसफुसाए और छड़ी को देसी कट्टे जैसा मेरे सीने पर तान कर बोले, “यानि हमारी बिल्ली, हमी से म्यांऊ”। मैं हैरान, परेशान कि ना तो मैं उनकी बिल्ली था ना प्रियंका चोपड़ा। ‘क्या हुआ चच्चा, अब क्या मैं प्रियंका से मिल भी नही सकता क्या?” मैंने उनके उबले अण्डे जैसे दिल में मानों मच्छर मार स्प्रे कर दिया हो।
“शर्म करो भतीजे… हमारी आरजू को अपनी कनीज ना बनाओ… ऐसे नामुराद दगाबाज तो मत ही बनो। हमने ब्लैक में टिकट लेकर उसकी सारी फिल्मों का पोस्टमार्टम किया है मियां उसकी आंखे, हाय-हाय.. कानपुर के ठग्गु के लड्डू याद आ गये। गोल गोल कटार जैसे… उसके होंठ.. माना मोंगा हलवाई की रस-मलाई… मियां तुम उससे 12 फुट दूर रहा करो… हां।“
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अब उन्हें कौन समझाये कि हमारी प्रियंका से मुलाकात ‘मेरी कॉम’ के सैट पर हुई थी। कमाल का डैडीकेशन है कुड़ी में। रियल बॉक्सरों से भिड़ रही थी। मानो मैरी कॉम को अपने भीतर उतार लिया हो।
चच्चा को ‘मैरी कॉम’ की बात बताई तो उबल पड़े। थर्मामीटर का पारा दो सौ डिग्री पार कर गया।
“लाहौल विला कुव्वत… मैं संजय लीला भंसाली की खबर लूंगा। छोड़ूगा नही उसे मेरी सपनो की नाजुक सी कली को बॉक्सिंग करवाई। हाय कितना दर्द हुआ होगा। उसे। काश, मैं सेट पर मौजूद होता। हर शॉट के बाद रूकमानी तेल से उसके हाथों की मालिश करता। उसके बॉक्सिंग गलब्स में बगदाद का इत्र भर देता… काश” चच्चा फिल्मी के चेहरे पर प्रियंका चोपड़ा के दर्द से भी ज्यादा झुर्रियां नजर आ रही थी।
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उदासी का लेबल लगाकर, धुंधले चश्में को थूक से साफ करके ठण्डी आह भर के चच्चा फिल्मी कसमसाये और रंगीन दांतों से पिचके गुब्बारे से निकली हवा जैसे कुनमुनाए “मियां.. वक्त वक्त की बात है.. यही प्रियंका हमारे आगे पीछे घूमती थी। चच्चा एक फिल्म दिलवा दो… हमने भी तरस खाकर कर दी सिफारिश.. हमें क्या पता था कि इतनी बेवफा निकलेगी। तुम जैसे लंगूर से मिलेगी पर अपने बचपन के दोस्त को भूल जायेगी” अब प्रियंका चोपड़ा चच्चा फिल्मी के बचपन में तो पैदा भी नही हुई थी। पर चच्चा को कौन समझाये दिल बहलाने को गालिब ख्याल अच्छा है। मैंने अपनी जान छुड़ाने के लिए चच्चा को खुशखबरी दी कि फिल्म टैक्स फ्री है… यानि टिकट सस्ती मिलेगी। जुम्मे को आकर थियेटर की पीक दान में पीक मार आयें। और मैं खुश था कि प्रियंका चोपड़ा को जिंदगी का बेहतरीन रोल मिला है। अब सब को यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए। ओलम्पिक में 5 गोल्ड मैडल जीत चुकी मैरी कॉम के प्रति इससे बड़ा आदर-सत्कार क्या होगा। जीयो प्रियंका, तुस्सी छा गये।


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Mayapuri

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