मुझे सोनू निगम जैसी तन्हाई चाहिए – चच्चा फिल्मी

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चच्चा फिल्मी एक दम तन्हा.. उदास और अपने बचे खुचे दो चार बालों को मसलते बरामदे की नरम-नरम धूम पे सनसना रहे थे। बीच बीच में एक ठण्डी आह भरभराते और करवट बदल कर फिर तन्हाई में खो जाते। चच्ची बेचारी परेशान सी, हलकान सी इसी सदमे से मरी जा रही थी कि कहीं चच्चा फिल्मी खर्च तो नहीं होने जा रहे थे। मैं यूं ही उनके दरवाजे के सामने से गुजरा तो चच्ची जान सिसकारियां दनदनाती सुनाई दी।
‘‘क्या बात है चच्ची…यूं परकटी मुर्गी की तरह घडि़याली आंसू क्यों बहा रही हो?’’ मैंने चच्ची के लगातार सनसनाते आंसुओं को देखकर कहा।
‘‘अरे लल्ला..क्या कह रिया है… देख तो जरा…कल रात से मुये तेरे चच्चा, किस कदर गमजदा नजर आ रिये हैं। ना खाते हैं…ना पीते हैं… बस टकटकी लगाये आसमान में देखे जा रिये हैं।’’ चच्ची बनारसी पान सा पिलपिला कर बोली।
‘‘क्या चच्चा, क्यों चच्ची जान की बची खुची जान को हलकान कर रहे हो।’’ मैंने चच्चा फिल्मी को झंझकोरते हुए कहा।
चच्चा बासी लौकी सा पिलपिला कर उठे और एक बदबूदार सांस का गोला छोड़कर बोले, ‘‘भतीजे, ना छेड़ मेरी तन्हाई को… यह सोनू निगम की गायकी जैसी गहरी है। बस…सोनू निगम जैसा तन्हा होना है। वैसे सुर में डूबे गीत सुनने हैं और बाकी बची जिन्दगी फना कर देनी है।’’
‘‘अरे चच्चा.. आज सोनू निगम कैसे याद आ गये। वो तो दनादन पॉप सांग और मस्ती भरे गाने गाये जा रहे हैं और आप अभी तक उनके गाये गीत ‘तन्हाई’ में छिपे बैठे हो?’’ मैंने चच्चा फिल्मी को समझाते हुए कहा।
‘‘ओय राइटर की दुम.. तू क्या जाने…क्या जाने तू बेटा..सोनू निगम कभी मेरे पास गाना सीखने आया करता था। तब तो उसकी मुछें भी नहीं उगी थी। रोज सुबह तन्हा तन्हा सा सोनू…आकर मेरी गोदी में चढ़ जाता और कहता कि चच्चा कोई नया सुर सिखायो..सात सुर सीख कर भी उसे और बहुत कुछ सीखने की ललक थी..मैंने उसे दर्द का आठवां सुर सिखाया…बस…वो दिन था और आज का दिन है..उसकी आवाज में तन्हाई सम गई।’’ चच्चा ने अपनी फुसफुसाती आवाज में शगुफा छोड़ा।
‘‘अल्लाह पर रहम खाओ चच्चा, तुम तो बेसुरे भी ढंग के नहीं हो..बोलते हो तो गधे व भैंस कन्फ्यूज हो जाते हैं कि उन्हें पुकारा तो पुकारा किसने..तुम सोनू निगम को भला क्या सिखाओगे?’’ मैंने चच्चा फिल्मी की बेपर की बात पर झल्ला कर कहा।
चच्चा फिल्मी को उस दिन सोनू निगम के गाने सुनने थे, तो बस वो उसी रंग में तन्हा तन्हा पतली गली से टुकटुका लिए।
मैं एक बात का कायल तेा हो ही गया कि सोनू निगम जैसा हीरा बार बार जन्म नहीं लेता। उनकी गायकी, उनकी अदाकारी.. उनका व्यक्तित्व एक बहुत प्यारे इंसान के रूप में हमें मिला है। युगों युगों तक उनके गीत हमारे दिलों में बसे रहेंगे।

(लेखक हरविन्द्र मांकड़)

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