‘मैं बनूंगा बुआ का फूफा’ – चच्चा फिल्मी

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आंखों में सुरमा लगाये, सिर पर तिरछी टोपी लगाये, मस्तमौला सांड की तरह दनदनाते चच्चा फिल्मी मेरे कमरे में दाखिल हुए।
‘‘भतीजे..भतीजे…बस फटाफट तैयार हो जा..तुझे मेरी बारात में चलना है.. देर ना कर..फटाफट कपड़े लपेट ले और चल अपनी नई फूफी के घर।’’ चच्चा खड़खड़ाते पखें से लहराकर फुनफुनाए।
‘‘क्या अनाप-शनाप उगल रये हो चच्चा..दिमाग तो अपनी जगह पर है या वो भी उम्र के साथ साथ खर्च हो गया है?’’ मैंने उनकी अजीबो गरीब बात पर जवाब दिया।
‘‘ओये होये…भतीजे, तू नहीं सुधरेगा…अरे कलम के पीकदान… मैं कपिल के शो वाली बुआ का रिश्ता लेकर जा रहा हूं।’’ चच्चा अपनी बची खुची मूछों को मसल कर फुसफुसाये।
‘‘क्या..तुम वाकई खर्च हो चुके हो चच्चा, जरा अपनी उम्र पर गौर फरमाओ? कहां तुम टूटे बाण की चारपाई जैसे ढीले हो और कहां वो 22 इयर ओल्ड हॉट सेक्सी बुआ.. कुछ तो शर्म करो।’’ मैंने चच्चा के सर पर फनफनाते शादी के भूत को उतारने की कोशिश की।
‘‘ओहो.. भतीजे… अगर वो टवन्टी टू इयर ओल्ड बुआ है तो मैं थर्टी प्लस हैंडपम्प स्मार्ट फूफा हूं.. मुझे तो बस उनसे निकाह करना है।’’ चच्चा अपनी 20 इंच की छाती ठकठका के पिनपिनाए।
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‘‘चच्चा, वो तो टीवी का नाटक भर है। असल जिन्दगी में उपासना जी बेहद पारिवारिक, मिलनसार और मृदुभाशी लेडी हैं। और फिल्मों में तो उनके अभिनय का सिक्का जम चुका है। भला वो तुमसे शादी क्यों करेगी?’’ मैंने आखिरी हथियार आजमाते हुए कहा।
इतना सुनते ही चच्चा फिल्मी अपनी आदत पर आ गये। ‘‘अरे नामाकूल…कपिल का शो मैंने ही उन्हें दिलवाया था। वो तो कपिल तेरी चाची को लेना चाहता था पर मैंने कहा, ना भई.. हमारे घर की औरते टीवी देखती हैं, टीवी में जाती नहीं..पर हां..हमारे पड़ोस के भारद्वाज साहब के दूर के भतीजे की पत्नी यानि उपासना सिंह भारद्वाज को ले लीजिए…बस…देख लो…हमारे कहने पर जो रोल मिला…आज कितना हिट है।’’ चच्चा लम्बी हांकते हुए कुलबुलाए।
‘‘पर चच्चा, वो आल रेडी शादीशुदा हैं…तुम्हारा नम्बर नहीं लगेगा।’’ मैंने अचकचा कर कहा।
पर चच्चा अब कहां सुनने वाले थे। वो अपनी धुन में ख्याली पुलाव पकाते गली में गर्क हो गये।
और मैं उपासना सिंह की बेहद उम्दा अदाकारी की दाद देने लगा जो आज भी उतनी ही ताजा व खूबसूरत अदाकारा है जितनी पहले थी। ईश्वर उनकी ये अदा व शोखपन बनाये रखे और चच्चा फिल्मी को थोड़ी अक्ल बखशे।

(लेखक हरविन्द्र मांकड़)


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