मैं हूं गरम चच्चा “ही मैन” चच्चा फिल्मी

1 min


10252101_881326225211594_2470199532856168269_n

तन पर केवल पुरानी स्कर्ट पहने, खड़कती हड्डियों का खड़तरंग बजाते, कटी पतंग से यहां से वहां डोलते चच्चा फिल्मी जब मेरे घर के बाहर आये तो पूरा मौहल्ला जमा हो गया। मैं कभी चच्चा की एक्सरे बॉडी देखता तो कभी मुंह दबायें हंसते लोगों को।

“क्या हुआ चच्चा, सवेरे-सवेरे यह क्या हुलिया बनाये घूम रहे हो?” मैंने उन्हें जबरदस्ती अपने घर में धकेलते पूछा।

“मेरे वीर मैं तेरा चच्चा नही हूं मैं तो तेरा बड़ा भाई हूं धर्म.. सात अजूबे इस दुनिया में, आंठवी अपनी जोड़ी.. टूटे से भी टूटे ना यह धर्मवीर की जोड़ी” चच्चा बन्दर की तरह गुलाटी मार कर बुलबुलाए।

“मै कुछ समझा नही आप अपने आप को ही मैन धर्मेन्द्र बता रहे हो। कुछ तो शर्म करो। धर्मेन्द्र का एक हाथ पड़ गया तो बची खुची चार पांच हड्डियां जो फेवीकोल से चिपका रखी हैं वो ऐसी टूटेंगी की अगले बारह जन्मों तक लचकचा के पैदा होगे। मैनें उनकी बेमुरव्वत हरकत पर खफा हेते हुये कहा, “साथ ही मौहल्ले वाले आपका कितना मजाक उड़ा रहे थे।“

चच्चा ने अपने डेढ़ इंच के डोले फड़फड़ायें और नाक से लीक गुब्बारे जैसी पिनपिनी हवा छोड़ कर सरसराये, “कुत्तो, मैं तुम्हारा खून पी जाऊंगा”

“चच्चा, खून पीकर भी तुम्हारी चमगादड़ जैसी बॉडी में सरसराहट नही होगी। धर्मेन्द्र बनने का ख्याल छोड़ दो। वर्ना ‘ही मेन’ नही पर ‘शी मैन बन जाओगे’ मैनें आखिरी तीर चलाते हुये कहा।

“बेटा कलमकार, मेरे में शेरनी का खून है। जवानी में मैं धर्मेन्द्र की हर फिल्म का पहला शो देखा करता था। बस एक कमी रह गई लख्ते जिगर, वर्ना दुनिया मुझे गरम चच्चा कहती। बस तुम्हारी चाची ड्रीम गर्ल ना बन सकी। और मेरे बेटे नाक पौछनें से आगे ना बड़ सके वर्ना दोनो ‘गदर’ मचा सकते थे।“ चच्चा अपने बिलबिलते दिल को खुद ही तसल्ली देते हुये बाहर चले गये।

मैं सोच में पढ़ गया। वाकई कई बार चच्चा फिल्मी मजाक मजाक में पते की बात कर जाते है। धर्मेन्द्र जैसा सितारा वाकई किस्मत का धनी है। फिल्मों में उसने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया। ड्रीम गर्ल हेमामालिनी को जीवन संगिनी बनाया। सन्नी देओल व बॉबी देओल जैसे सपूत उनके हमसफर बने।

जबतक भारतीय सिनेमा रहेगा ‘ही मेन’ सिर्फ धर्मेन्द्र ही रहेंगे। चाहे कितने चच्चा फिल्मी जैसे डेढ़ पसली के हीरो अपने मसल्स फुलाते रहें।

                                                                                                                                                                                                   (लेखक: हरविन्द्र मांकड़)

SHARE

Mayapuri