चच्चा फिल्मी अवार्डस नाईटस – चच्चा फिल्मी

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आजकल अवार्डस का जमाना है। गली गली चौराहे पर अवार्डस नाईटस होती हैं। लोग झोलियां भर-भर के अवार्डस लेकर जाते हैं। कई बार तो हमारे फिल्म स्टार बाकायदा एक खाली टैम्पो बाहर खड़ा रखते हैं ताकि सारे अवार्डस उसमें लोड करवा के घर ले जा सकें। बेशक कई फिल्म स्टार ऐसे भी हैं जो इन अवार्डस फक्शनों में नहीं जाते। पर कई ऐसे भी हैं जो अपने नाम का अवार्ड हो तभी उस महफिल में शिरकत करते हैं।

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चच्चा फिल्मी हमेशा कुलबुलाते रहते थे कि यह क्या बात हुई कि एक अवार्ड फंक्शन में बेस्ट हीरो शाहरुख खान को बनाया गया तो दूसरे में सलमान खान को…बेस्ट फिल्म कोई और होती है पर बेस्ट डायरेक्टर का एवार्ड किसी ओर को मिल जाता है।

मियां बहुत धाधली है कसम से.. में तो सोच रहा हूं अपनी एवार्ड नाइट करूं… चच्चा फिल्मी अवार्डस नाईट और एकदम काबिल लोगों को अवार्ड दूं। चच्चा फिल्मी पान की गिलौरी को अपने चार बचे खुचे दांतों के बीच फुटबाल की तरह घुमाते हुए पिनपिनाए।chcha filmi 03

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क्या बात कर रहे हो चच्चा मैंने उन्हें बिगड़े बच्चे को बहलाने जैसा बर्ताव करते हुए कहा फिर तो उस अवार्डस नाईट में कोई बड़ा स्टार आयेगा ही नहीं… क्योंकि काबिलियत को देखोगे तो अनगिनत हीरे भरे पड़े हैं। पर उन्हें कभी स्टेज पर तो दूर उन फंक्शन में इनवाइट भी नहीं किया जाता। ओमपुरी रोहणी हटगड़ी जैसे लाखों एक से बढ़कर एक कलाकार है हमारे बॉलीवुड में…पर हर बार वहीं चंद लोग जो नाच गा कर परफॉर्म करते हैं उन्ही को अवार्ड थमा दिया जाता है।

वहीं तो चच्चा फिल्मी कसमसाए और बलबला कर उगले यही तो मेरा दर्द है.. जो कोई जान ना सका.. वर्ना अगर वो काबलियत को पैमाना बनाते तो मेरी दीवारों पर सफेदी पेन्ट की जगह एवार्ड टंगे होते।

पर चच्चा तुम्हें क्यों तुम कौन सा फिल्मी हीरो हो तुम तो करेक्टर एक्टर भी नहीं हो मैंने उनकी दुखती रग पर नमक डालते हुए चुटकी ली।

लाहौल विला कुव्वत.. मैं क्या हूँ.. अरे मैं शाहरुख से बढि़या एक्टर हूँ… सलमान से बड़ा एंटरटेनर हूँ.. आमिर से बड़ा देश भक्त हूं.. अगर मैं उनकी फिल्में अपनी बेगम के बटुए से रूपये चुरा कर ना देखता तो कौन पूछता उनको चच्चा फनफना कर बल खाते हुए बोले।

बात सही थी। पैसों से खरीदा गया एवार्ड या सम्मान दिल को कभी सकून नहीं देता। हम शायद दुनिया की नजरों में हीरो बन जायें पर अपनी अंतर- आत्मा के सामने जीरो ही रहेंगे। फिल्मी दुनिया वालों कब तक चैनल्स को खुश करने के लिए सिर्फ बड़े नामों को अवार्ड दोगे। एक बार अपने आसपास नज़र डालो… कुदरत ने भारतीय सिनेमा को अनगिनत फनकारों से नवाजा है। उन्हें सम्मान दो। उनकी कद्र करो। वर्ना यह अवार्ड तमाशा एक दिन ऐसा रंग दिखायेगा कि उनकी अवार्डस नाईट में सिर्फ चन्द लोग जायेंगे जो पैसा खर्च कर सम्मान खरीद सकेंगे।

                                                                           (लेखक हरविन्द्र मांकड़)


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