क्या चेतन भगत को बैस्ट इंटरटेनमेनट ऑफ द इअर का सम्मान लेने का हक था?

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वह एक महत्वपूर्ण सम्मान दिये जाने का दिन था। तमाम महत्वपूर्ण व्यक्तित्व वाले लोग ब्छछ.प्ठछ के अवार्ड वितरण के साक्षी थे। सिनेमा-सम्मान नामांकित थे सलमान खान, आमिर खान, शाहरुख खान और चेतन भगत जब ‘बैस्ट इंटरटेनमेन्ट ऑफ द इअर 2014’ के नाम की घोषणा हुई तो बहुत से लोग अवाक रह गये थे। सम्मान प्राप्तकर्ता थे चेतन भगत – फिल्म लेखक! वहां उपस्थित मेहमानों में श्री अरूण जेटली, श्री रविशंकर प्रसाद, सोली सोराबजी, दीपक पारेख, मोहनलाल, लिएन्डर पेस… जैसे आदरणीय मेहमानों की प्रतिक्रिया का तो नहीं पता, बॉलीवुड में जरूर कानाफूसी के स्वर फूटे हैं- ‘यह कैसे?’ क्या सिनेमा इंटरटेनमेन्ट की क्रेडिट लेने के लायक और नाम नहीं रह गये थे? पूरे साल में इंटरटेनमेन्ट के लिए एक नाम नहीं मिला… और, फिर क्या जिस फिल्म ( ‘2 स्टेट्स’) के लिए चेतन भगत प्रशंसित हो रहे थे, उसी सम्मान के लिए उसी फिल्म के निर्माता करण जौहर को पुरस्कार नहीं जा सकता था?
unnamed (4) बेशक हम चेतन के खिलाफ नहीं है, हमारा आशय ‘व्यवस्था’ से है जिसमें ऐसे कारनामे रूप लिया ही करते हैं। चेतन को अच्छे लेखन के लिए बधाई देने वालों में हम भी ट्वीट कर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। लेकिन, हम पाठकों को बताना चाहेंगे कि बाॅलीवुड के लेखन पटल पर तेजी से उभरा यह नाम है क्या? जिसके लिए कईयों की उपेक्षा हुई और कईयों ने (जिनमें एक मंत्री सहित कई स्टार हैं) खूब सराहना की है।

unnamed (5)चेतन भगत की लेखकीय जमीन किताबी दुनिया की है। उनकी तुलना हम बॉलीवुड के कुछ बेहतरीन लेखकों मसलन-सलीम जावेद जैसों से नहीं करना चाहेंगे, क्योंकि वे ‘चेतन’ वहां खड़े भी नहीं होते। वह बैस्ट सेलर हैं। वैसे ही जैसे गुलशन नंदा थे, रानू थे या वेदप्रकाश शर्मा थे। हिन्दी के ये बैस्ट सेलर कभी साहित्य की कोटि में शामिल नहीं किये जा सकें, मगर सिनेमा ने इनका स्वागत किया था। वैसे ही लेखक हैं- चेतन भगत, जो अंग्रेजी में लिखते हैं और अंग्रेजी के फिक्शन-रीडरों के लिए बैस्ट-सेलर हैं। यानि- कह सकते हैं कि चेतन भारत में अंग्रेजी लेखकों में हिन्दी के गुलशन नंदा हैं। यहां बताना जरूरी है कि चेतन ने गुलशन नंदा को ही बहुत हद तक अनुसरण किया है। जैसे- नंदा के कथ्य में स्थितियों का वर्णन नहीं मिलता और परिस्थितियां अचानक आकर सामने खड़ी हो जाती हैं। चेतन का उपन्यास भ वैसे ही भाग्य भरोसे चलता है। नंदा की ‘झील के उस पार’ और चेतन की ‘हाफगर्ल फ्रेंड’ ऐसी ही समानताओं से भरी हैं। यहां हम बतादें कि गुलशन नंदा की 25 किताबों पर फिल्में बनी हैं और चली है। उनकी ‘कटी पतंग’, ‘शर्मिली’, ‘कांच की चूडि़यां’ आदि पढ़ने वाले समझ सकते हैं कि उसी ट्रैक पर चलने वाले चेतन भगत उनके दशांस भी नहीं है। कभी गुलशन नंदा को वह सम्मान नहीं मिला फिर चेतन के लिए इतना हो-हल्ला क्यों?

चेतन भगत की पांच किताबें हैं- जो फिल्मों की विषयवस्तु बनी हैं। ये हैं- ‘फाइव प्वाइंट समवन’, ‘वन नाइट/द कॉल सेंटर’, ‘द थ्री मिसटेक्स ऑफ माई लाइफ’, ‘टू स्टेट्स’, ‘रिवोलुशन’ और ‘हाफ गर्ल फ्रेंड’। और, उनकी एक नान फिक्शन किताब है- ‘हाट यंग इंडिया वान्टस’ इन किताबों पर जो फिल्में बनी हैं वे हैं- ‘हैल्लो’ (वन नाइट/द…पर आधारित), ‘3 इडियट्स’ (फाइव प्वाइंट…), ‘काई पो चे’ (थ्री मिस्टेक्स…), ‘2 स्टेट्स’ (इसी नाम से), और सलमान खान की फिल्म ‘किक’ की पटकथा लेखक के रूप में उसका नाम पर्दे पर है। तमिल फिल्म ‘ननवन’ के कथाकार भी वह हैं और उनकी किताब ‘हाफगर्ल फ्रेंड’ भी फिल्म बनाने की सुर्खियों में हैं।

चेतन को ‘ब्रदर्स फॉर लाइफ’ के लिए फिल्म फेयर और ज़ी सिने अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है। दिल्ली के एक मध्यवर्गीय परिवार से जुड़ चेतन की पढ़ाई (आइआइएम) और नौकरी (बैंकिंग) के लिए विदेश (हांगकांग) में रहने को देखा जाए तो यह बड़ी और बहुत बड़ी उपलब्धि हैं कि वह बॉलीवुड के व्यस्ततम व्यवसायिक लेखक हैं। बावजूद इन सब बातों के कि वह अंग्रेजी विधा के बेस्ट सेलर हैं, हम उन्हें पूर्वाग्रही होकर नहीं देख सकते। वह सौ और दो सौ करोड़ कलैक्शन कराने वाली फिल्मों के लेखक हैं तथा आज के युवा के सामने बिकाऊ लेखक हैं। लेकिन, पूरी इंडस्ट्री पर भारी बनाकर उन्हें बेस्ट इंटरटेनमेन्ट का साल का सम्मान नवाजा जाये… ज्यादा लगता है। शायद बहुत ज्यादा! है ना…?
(नोट: अगर चेतन इस लेख से इत्तफाक न रखते हों तो हम उनका वक्तव्य भी छापना चाहेंगे।)

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Mayapuri