चिरंजीवी

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चिरंजीवी साउथ और हिंदी फिल्म जगत जानामाना नाम

  चिरंजीवी एक बहुत ही लोकप्रिय तेलुगु एवं हिन्दी फ़िल्मों के एक्टर,डांसर, प्रोड्यूस, सिंगर, वॉइस आर्टिस्ट, पॉलिटिशियन, बिजनेसमैन, इन्वेस्टर और मेंबर ऑफ़ द इंडियन नेशनल कांग्रेस हैं। इनका जन्म 22 अगस्त 1955 को मोगल्तूरु, आध्रप्रदेश मे हुआ था। चिरंजीवी का वास्तविक नाम, कोणिदेल शिव शंकर वर प्रसाद है। इनके पिता एक पुलिस कॉन्सटेबल थे जिनका ट्रांसफर अलग अलग जगह पर होता रहता रहा था इसलिए चिरंजीवी की स्कूलिंग निड़ाडवोलु, गुर्जाला, बापतला, पोन्नुरू, मंगलागिरी और मोगलतुरू आदि अलग अलग शहरों मे हुई। इसके अलावा चिरंजीवी एक एनसीसी कैडेट भी रह चुके हैं और 70 के दशक मे नई दिल्ली मे होने वाली रिपब्लिक डे की परेड मे भाग भी ले चुके हैं उसके बाद इन्होंने अपना इंटरमीडिएट सी.ऐस.आर. सरमा कॉलेज ओंगोले से करने के बाद श्री वाय.ऐन.कॉलेज नरसापुर से कॉमर्स मे अपनी ग्रेजुएशन की। चिरंजीवी बचपन से ही एक्टर बनना कहते थे इसलिए वो चेन्नई गए और 1976 मे मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट ज्वाइन किया।

यदि इनकी पर्सनल लाइफ की बात की जाए चिरंजीवी की पत्नी का नाम सुरेखा कोनिदेला है 1980 इन्होंने चिरंजीवी से शादी की और ये टॉलीवुड और बॉलीवुड एक्टर राम चरण तेजा के पिता और टॉलीवुड एक्टर अल्लू अर्जुन के अंकल हैं। चिरंजीवी के भाइयों मे से एक “नागेन्द्र बाबु” भी कई फिल्मों मे एक्टिंग कर चुके हैं और फिल्म प्रोड्यूसर भी हैं और इनके सबसे छोटे भाई पवन कल्यान भी फिल्मों  मे ही एक्टर हैं। इस प्रकार यदि देखा जाए तो चिरंजीवी का लगभग पूरा परिवार फ़िल्मी दुनिया से ताल्लुख रखता है। कहा जाता है की चिरंजीवी की माँ ने अपने बेटे की एक्टिंग के प्रति लगन देखते हुए उनका पूरा साथ दिया व उनके कहने पर ही उन्होंने अपना नाम “चिरंजीवी” रखा।

इन्होंने अपने करियर की शुरुआत “प्रनाम खरीदू” से की पर उन्हें इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के बीच पहचान मिली फिल्म “माना वोरी पंडावुलू” से। पर एक लीडिंग हीरो के रूप मे उन्होंने अपनी पहचान बनाई 1982 की फिल्म “इंटलॉ रामय्या वीडीलो कृष्णय्या” फिल्म से जो बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। उसके बाद चिरंजीवी अपने डांसिंग स्टाइल और जबरदस्त एक्शन की वजह से सुपर स्टार बन गए और अभी तक पॉलिटिकस के साथ साथ फिल्मों मे भी बने हुए हैं। वे अब तक 150 फिल्मों मे काम कर चुके हैं। जिनमें तीन फिल्मे हिंदी की थी जिनका नाम प्रतिबन्ध (1990 ) और द जेंटलमैन (1993) थी जो उस समय की बहुत जानी मानी फिल्में हैं। उनके फ़िल्मी दुनिया और देश के प्रति निष्ठां भाव को देखते हुए 2006  मे इन्हें पद्म भूषण दिया गया व लगातार 7 बार इन्हें फ़िल्मफ़ेयर अवार्ड मे बेस्ट एक्टर का अवार्ड मिल चुका है व 2006 मे फ़िल्मफ़ेयर स्पेशल अवार्ड साउथ फॉर आनरेरी लीजेंडरी एक्टिंग करियर और 2010 मे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (साउथ) मिल चुका है। इसके अलावा इन्हें 3 बार नंदी अवार्ड्स मे बेस्ट एक्टर अवार्ड्स मिल चुका हैं यहां भी इनके अवार्ड्स का अंत नहीं हुआ व 2014 सईमा अवार्ड्स के दौरान इन्हें इंटरनेशनल फेस ऑफ़ इंडियन सिनेमा का सम्मान और 2006 मे आनरेरी डॉक्टरेट फ्रॉम थे आंध्र यूनिवर्सिटी मिल चुका है। इनकी आखरी फिल्म 2015 की फिल्म ब्रूस ली – द फाइटर थी और अब ये 2017 की फिल्म खैदी नंबर 150  मे दिखाई देंगे।


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Mayapuri

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