इतिहास याद रखेगा, जब राजनेता चुनावों में व्यस्त थे और बॉलीवुड OTT में उलझा था, तब लोग सड़कों पर उतरकर एक दूसरे की मदद कर रहे थे।

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पिछले साल के corona लॉकडाउन से हम परेशान कम और आनंदित ज़्यादा थे। पिछले साल लोगों के घर मदद पहुँचाते वक़्त कठिनाई तो हो रही थी, लेकिन निराशा नहीं मिलती थी। मैं ख़ुद से शुरु करूँ तो पूरा पूरा दिन राशन और बाकी सामग्री पहुँचाने में भले ही निकल जाता था, लेकिन किसी मेडिकल स्टोर जाने की नौबत नहीं आती थी।

अब corona के हालात बिल्कुल अलग हैं। अब हमसे वो दवाइयाँ (RemDesivir) मांगी जाती हैं जिनका नाम पहले कभी नहीं सुना था। ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग की जाती है। उन टेबलेट्स के नाम पूछे जाते हैं (Fabiflu) जिनकी कभी सूरत नहीं देखी थी। फिर भी आम लोग, हम आप, एक दूसरे से सोशल मीडिया और मेसेजिंग एप्स के द्वारा जुड़कर पीड़ित को हर संभव मदद पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

जबकि हमारी पहुँच भला कहाँ तक हो सकती है? दो हज़ार, पाँच हज़ार, बड़ी हद दस हज़ार लोगों तक। जबकि आज के समय में एक दिन में तीन-तीन लाख कोरोना केसेज़ आ रहे हैं। रोज़ के दो हज़ार लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। वहीं मैं किसी सेलेब्रिटी की बात करूँ तो इनकी पहुँच शुरु ही दस लाख लोगों से होती है। शाहरुख, सलमान, आमिर, अक्षय, अजय देवगन आदि के तो करोड़ों फॉलोवर्स हैं। पर इनकी तरफ से क्या मदद मिल रही है?

एक भाईजान हैं वो अपनी फिल्म का ट्रेलर प्रोमोट कर रहे हैं, उस ट्रेलर से पहले उस फिल्म की रिलीज़ का प्लान बता रहे हैं। वहीं बॉलीवुड के बादशाह अपनी क्रिकेट टीम की हार से दुखी हैं, उन्हें अपनी टीम की शर्मनाक हार खाए जा रही है। मिस्टर परफेक्शनिस्ट तो सोशल मीडिया से ही गायब हो गए हैं। उन्हें मुसीबत के वक़्त सबसे आसान रास्ता क्विट करना ही लगा है।

वहीं खिलाड़ी भैया की बात करूँ तो कुछ दिन पहले तक वो कुरकुरे बेच रहे थे। मतलब कुरकुरे का एड कर रहे थे। हाल फ़िलहाल में अपनी आने वाली फिल्म की एक्स्साईटमेंट शेयर कर रहे हैं। फिर भोले बाबा सी आँखों वाले भला पीछे कैसे हटते, वह पहली बार एक web series में आ रहे हैं, सो उन्हें उसका प्रमोशन ज़रूरी लग रहा है।

ये सब यूँ तो अपना काम कर रहे हैं। आम दिनों हम आप भी अपना काम ही करते हैं। लेकिन क्या देश में आम दिन चल रहे हैं? वर्क फ्रॉम होम करता एक शख्स अपने ऑफिस का भी काम निपटा रहा है और बीच-बीच में किसी को ऑक्सीजन की ज़रुरत पड़ने पर उसकी मदद के लिए भी यहाँ वहाँ बात कर रहा है। ये वही आम शख्स है जो समय और पैसे फूंककर सिनेमा हॉल में अपने मनपसंद हीरो की फिल्म देखने भी जाता है। जब ये अपनी ज़िम्मेदारियों से बढ़कर समाज के लिए थोड़ा योगदान दे सकता है तो बड़े-बड़े स्टार्स क्यों नहीं? उनके पास तो इतनी सुविधा हैं कि खुद का ऑक्सीजन प्लांट लगवा दें। विदेशों से दवा मंगवा दें। फिर भी उन्हें कुरकुरे और च्यव्मनप्राश बेचने से फुरसत नहीं मिल रही?

लेकिन वहीं, सोनू सूद नामक सितारे भी हैं जो ख़ुद कोरोना पीड़ित होने के बावजूद लोगों की हरसंभव मदद कर रहे हैं। बल्कि ये तो इतने नेक हैं कि दिन के अंत में कितने लोगों की सहायता हुई इसकी जानकारी भी दे रहे हैं।

कवि कुमार विश्वास हैं, वह भी पूरी तरह पेशेंट्स के लिए समर्पित हो चुके हैं। राइटर सत्य व्यास हैं, वह भी जहाँ जहाँ हो सके मदद पहुँचाने में पीछे नहीं हट रहे हैं।

जब ये लोग corona मरीज़ों के लिए आगे आ सकते हैं तो बड़े स्टार्स क्यों नहीं? पर आप उनसे पूछ नहीं सकते। आप उनसे पूछते भी नहीं है। आप उनसे बस ये पूछते हैं कि फलाना फिल्म कब आयेगी? ढिमाकी फिल्म को थिएटर रिलीज़ मिलेगा या OTT प्लेटफोर्म पर ही देखनी पड़ेगी?

याद रखिए, corona पीड़ितों की संख्या मात्र कुछ आंकड़े ही हैं आपके लिए, जबतक की आपके अपने घर में कोई संक्रमित न हो जाए। नहीं, हम ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते कि किसी को ये मनहूस बीमारी हो, लेकिन इतनी आशा ज़रूर करते हैं कि जो स्वस्थ हैं, जिनके हाथ पैर दुस्रुस्त हैं वह दूसरों की मदद कर उन्हें भी सीधे खड़े होने में मदद करें। समाज, सोसाइटी शब्द का यही अर्थ है कि जब कोई एक कमज़ोर पड़े तो दूसरा उसका हाथ थाम ले।

इसी तर्ज़ पर, मायापुरी क्षेत्र के एक व्यवसायी, श्री विजय सहगल जी मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर की फिलिंग करवा रहे हैं। इंडस्ट्रियल एरिया बी ब्लॉक में उनकी फैक्ट्री है जहाँ ये सुविधा हर ज़रुरतमंद तक पहुंचाई जा रही है।

यहीं मायापुरी में ही, मायापुरी ग्रुप के चीफ एडिटर श्री पीके बजाज साहब भी अपनी तरफ से ज़रूरतमंदों की मदद करने के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।

हमारी आप सबसे बिनती है कि घबराएं नहीं, हौसला रखें। काम करते रहें। साफ़ सफाई का ध्यान रखें जब जहाँ हो सके किसी ज़रूरतमंद के काम आने की कोशिश करें।

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