‘दादा साहेब फाल्के पुरस्कार’ से नवाजे जाएंगे मनोज कुमार

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60, 70, 80 और 90 के दशक में जमकर अपनी अदायगी का जलवा बिखेरने वाले हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मनोज कुमार को भारतीय सिनेमा के सर्वश्रेष्ठ आधिकारिक सम्मान दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड के लिए चुना गया है। लता मंगेशकर, आशा भोसलें, सलीम खान, नितिन मुकेश और अनूप जलोटा वाले पांच सदस्यीय चयन मंडल ने सब की सहमति से कुमार के नाम की सिफारिश की है।

मनोज कुमार को ‘पूरब और पश्चिम’, ‘उपकार’ और ‘क्रांति’ जैसी देशभक्तिपूर्ण फिल्मों के लिए पहचाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 78 वर्षीय अभिनेता ये अवॉर्ड पाने वाले 47वें व्यक्ति हैं। भारतीय सिनेमा के इस सर्वोच्च सम्मान के तहत एक स्वर्ण कमल, 10 लाख रुपये नकद राशि और एक शॉल दिया जाता है। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘हरियाली और रास्ता’, ‘वो कौन थी’, ‘हिमालय की गोद में’, ‘दो बदन’, ‘उपकार’, ‘पत्थर के सनम’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘शहीद’, ‘रोटी कपडा और मकान’ तथा ‘क्रांति’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

मनोज कुमार का जन्म पाकिस्तान के एबटाबाद में हुआ था जो कि आजादी के पहले भारत का हिस्सा था। उनका वास्तविक नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी है वह जब दस साल के थे तो उनका परिवार दिल्ली आ गया था। उन्होंने ‘कांच की गुडिया’ के साथ 1960 में अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। उन्हें इंडस्ट्री में भारत कुमार के नाम से भी पहचाना जाता है।

मनोज कुमार ने ‘हनीमून’, ‘अपना बनाके देखो’, ‘नकली नवाब’, ‘दो बदन’, ‘पत्थर के सनम’, ‘साजन’, ‘सावन की घटा’ जैसी रोमांटिक फिल्मों में भी काम किया उन्होंने केवल अभिनय में ही नहीं बल्कि निर्देशन में भी खूब कमाल दिखाया। मनोज कुमार को ‘उपकार’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड मिल चुका है और 1992 में भारत सरकार द्वारा ने पद्म श्री से भी नवाजे जा चुके हैं।

 


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Mayapuri

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