INTERVIEW: जब हम अपने ड्रीम का फुलफिल कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है – सान्या मल्हौत्रा

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आमिर खान की आने वाली फिल्म ‘दंगल’ में उनकी बेटियों की भूमिका में दो नई लड़कियां दिखाई देने वाली हैं। उनमें से एक का नाम है सान्या मल्हौत्रा सान्या मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली है उसका जन्म, पढ़ाई लिखाई दिल्ली में ही हुई। ग्रेजुएशन के बाद उसे एक डासं रियलिटी शो के लिये मुंबई बुलाया गया। उस शो में तो उसका सलेक्शन नहीं हो पाया। बाद में वो किस प्रकार दंगल के किरदार बबीता तक पहुंची, बता रही हैं एक बातचीत के दौरान।

दंगल में सलेक्शन तक का सफर

जैसा कि मैने बताया कि एक डांस रियलिटी शो में मुझे टॉप फाइव तक पहुंचने के बाद में मुंबई बुलाया गया था। उस शो को तो मैं क्लीयर नहीं कर पाई लेकिन मैने पापा से कहा कि मैं पंदरह बीस दिन यहां रहकर मुंबई को करीब से देखना और जानना चाहती हूं। बाद में वापस दिल्ली जाने के बाद मैने पापा से कहा कि मैं एक्टर बनना चाहती हूं इसलिये मैं वापस मुंबई जाना चाहती हूं। पापा के प्रोत्साहन के तहत मैं एक बार फिर वापस मुबंई आ गई। यहां आने के बाद करीब चार पांच महीने तक तो मुझे पता ही नहीं लगा कि कहां कैसे जाना हैं कैसे अप्रोच करना है। बाद में ऑडिशन वगैरह शुरू हुए। फिर मुझे एड मिलने शुरू हो गये। करीब एक साल के दौरान मैने दस बारह एड किये, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं एयर टेल, सैमसन, फिलिपकार्ड, मैकडॉनल्स इत्यादि। इसके बाद मुझे कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के यहां से कॉल आयी । उनके सहायक ने कहा कि ये ऑडिशन दंगल के लिये हो रहा है। वहां जाने के बाद मुझे तीन सीन्स दिये गये, जिनके साथ मैने ऑडिशन दिया लेकिन एक महीने तक कोई कॉल नहीं आयी। दरअसल उस दौरान दो लड़कियों में से गीता का ऑडिशन कंगना रनौत दे रही थी इसलिये मैं सोच रही थी कोई बात नहीं, गीता कंगना कर लेगी मै बबीता कर लूंगी। लेकिन कुछ दिन तक जब कोई कॉल नहीं आयी तो मैने सोचा चलो इस बीच दिल्ली घूम आया जाये लेकिन एयरपोर्ट पर मुझे मुकेश जी के सहायक का फोन आया कि तुम शॉर्ट लिस्ट हो गई हो और तुमसे आमिर खान मिलना चाहते हैं। मैं दिल्ली गई और वापस आकर मैने गीता का ऑडिशन दिया क्योंकि उस वक्त तक कंगना सीन्स से बाहर हो चुकी थी। वहीं मेरी मुलाकात फातिमा से हुई वो भी गीता के लिये ऑडिशन देने आई थी उसके अलावा चोदह पंदरह लड़कियां और थी।fatima-sheikh_sanya-malhotra_aamir-khan

और मैं बबीता बन गई।

बाद में फातिमा को गीता की भूमिका मिल गई और मुझे बबीता बनने का अवसर मिला। उस वक्त हमारे कोच कृपा शंकर सर थे। हमें बताया गया कि अब तुम्हारा रेसलिंग और जिम का टेस्ट होगा। हम दो घंटा सुबह रेसलिंग करते थे और शाम को एक घंटा जिम करते थे। मैने और फातिमा ने कभी जिन्दगी में इतना वर्क आउट नहीं किया था। रोजाना सुबह मैं और फातिमा रोते थे क्योंकि हमारे हाथ पैर उठते तक नहीं थे लेकिन चूंकि हमें फिल्म करनी थी इसलिये एक दूसरे को सांत्वना देते हुए अगले रोज फिर तैयार हो जाते थे। एक बार हमें आमिर सर के ऑफिस में बुलाया गया तो हमें लगा कि हमें कहा जाने वाला है कि सॉरी आपको ये फिल्म नहीं मिल रही है। इसलिये हमने सोचा हो सकता हैं कि हम यहां आखिरी बार आ रहे हो इसलिये हमने आमिर सर के घर, बालकनी और वहां अपने फोटोज ले लिये। इतनी देर में आमिर सर, किरण मैम, डायरेक्टर नितेश तिवारी और टीम ने ऑफिस में कदम रखा और आते ही आमिर सर ने कहा कि वैलडन! तुम्हें ये फिल्म मिल गई है। इसमें फातिमा गीता है और तुम बबीता। लेकिन मुझे तो कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। फातिमा का भी हाल लगभग मेरे जैसा ही था।sanaya_dangal

गीता बबीता के बारे में जानकारी

हम शर्मिंदा भी थे कि हमें देश को गोल्डमैडल दिलवाने वाली रेसलर गीता बबीता के बारे में जरा भी जानकारी नहीं थी। जिन दिनों हम रेसलिंग ओर जिम की ट्रेनिंग ले रहे थे तो हमारे कोच कृपाशंकर जी हमें गीता बबीता के वीडियोज दिखाया करते थे। जिसे देखकर हमें उनके चलने, खड़े होने, मूव करने के मूवमेंन्ट देखने को मिले। जिसका आगे चलकर हमें बहुत फायदा मिला क्योंकि मुझे बचपन से सिर्फ डांस का शौक रहा है स्पोर्ट से तो मेरा दूर दूर तक का कोई संबन्ध नहीं था।sanya-malhotra_dangal

भाषा

चूंकि मैं दिल्ली से हूं इसलिये हरियाणवी भाषा से मैं पहले से परिचित थी, मेरे कॉलेज में भी कुछ हरियाणवी लड़कियां थी। लेकिन हमें शूटिंग से पहले एक घंटा रोजाना सुनीता मैम ट्यूशन दिया करती थी। हमने हरियाणवी नही सीखी बल्कि भाषा की टोन सीखी जो डॉयलॉग्ज में बहुत काम आयी।dangal_star_sanya-malhotra

बदलाव

इस मूवी के बाद मुझे पता है हमे देखकर काफी सारी लड़कियां इंस्पायर होगी। मैं खुद इस रोल से बहुत इंस्पायर हूं। आप यकीन करें कि मूवी से पहले मैं बहुत शाई थी इसलिये किसी के सामने ज्यादा खुलकर बात नहीं कर पाती थी। इसके अलावा मुझे नहीं लगता था कि मैं रेसलिंग कर पाउंगी। वहां मेरे कोच ने भी मुझे बहुत हेल्प किया। मैने करीब पांच महीने तक रेसलिंग सीखी। जब हमें लड़कियां फिल्म में देखेगीं तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि जब हम अपने ड्रीम को फुलफिल कर सकते हैं तो कोई भी कर सकता है।


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Mayapuri

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