मूवी रिव्यू: अपनी करिश्माई अदाकारी से चमत्कृत करते अदाकारों का ‘दंगल’

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रेटिंग *****

अगर एक आम आदमी अपनी जिद पर आ जाये तो वो बदलाव ला सकता है । फिल्म ऐसे ही एक शख्स की जिद् को दर्शाती है। खाप जैसी समस्या घिरे और लड़कियों को चूल्हे चौंके तक ही सीमित रखने वालेे हरियाणा ने बेशक अभी तक इन्टरनेेशनल स्तर के खिलाड़ी दिये हैं लेकिन गीता और बतीता दो ऐसी पहली पहलवान लड़कियों के नाम हैं जिन्होंने हरियाणा में बदलाव के अलावा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहलवानी में गोल्ड मैडल जीत कर देश का नाम रौशन किया। इनके पीछे उनके पिता महावीर फोगाट की देश के लिये गोल्डमेडल लाने की लालसा- जो वह स्वंय पूरा नहीं कर पाये- उसके तहत बिना समाज की परवाह किये बगैर अपनी दो बेटियों गीता बबीता को बतौर पहलवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की जिद्द को लेखक निर्देशक नितेश तिवारी ने फिल्म ‘दंगल’ में पूर्णतया साकार कर दिखाने का करतब दिखाया है ।

हरियाणा के भिवानी जिले के बलाली गांव के महावीर फोगाट (आमिर खान) का सपना था कि वे पहलवानी में देश के लिये गोल्ड मैडल जीत कर लाये लेकिन चाहकर भी वे ऐसा नहीं कर पाये। इसके बाद उन्हें परिस्थितथि पहलवानी छोड़ नौकरी करने पर मजबूर होना पड़ा लेकिन देश के प्रतिनिष्ठा उनमें सदैव बनी रही लिहाजा आगे उनकी आस अपनी होने वाली औलाद -जो वह लड़के के तौर पर देख रहे थे-उससे  थी, जो उनकी अधूरी इच्छा पूरी कर सके। लेकिन भगवान भी शायद नहीं चाहता था इसलिये लड़के की चाह में एक के बाद एक उनके यहां चार लड़कियां पैदा हुई। जब महावीर को अपनी दोे बेटियों गीता बबीता में पहलवानी के गुण दिखाई दिये तो उन्होंने बिना समाज की परवाह किये दोनों को पहलवान बनाने का निर्णय लेते हुये खुद उनका गुरू बन उन्हें वहां तक पहुंचाने का फैसला कर लिया जंहा वो खुद नही पहुंच पाये थे। बेशक इस बीच महावीर को अपने रिश्तेदारों, गांव वालों से काफी कुछ सुनना पड़ा लेकिन उन्होंने किसी की परवाह नहीं की। महावीर सिहं की अथक मेहनत ने अपना रंग दिखाना शुरू किया क्योंकि उनकी बड़ी बेटी गीता नेशनल चैंपियन बनने के बाद, अब विश्व स्तर पर दो दो हाथ करने के लिये निकल पड़ी थी। उसके पीछे पीछे बीबता भी थी । एक दिन वो भी आया जिसकी बरसों से महावीर सिंह राह देख रहे थे यानि गीता ने कामनवैल्थ खेलों में गोल्ड मैडल जीत इंडिया की पहली महिला पहलवान बन अपने पिता का सपना सच कर दिखाया। इसके बाद आज तक गीता बबीता तकरीबन 29 मैडल्स अपने नाम कर चुकी हैं ।dangal-full-movie_review

नितेश तिवारी इससे पहले ‘चिल्लर पार्टी’ तथा ‘भूतनाथ रिर्टन ‘जैसी फिल्में बना चुके हैं लेकिन दंगल को लेकर वे चर्म पर हैं। जिस प्रकार उन्होंने एक ऐसे जिंदा इंसान की कथा को रोमांचक, भावनात्मक तथा दिलचस्प तरीके से जीवंत कर दिखाया है जैसे उस कथा को वास्तव में फिर दौहराया गया हो। नितेश ने पियूश गुप्ता, श्रेयश जैन तथा निखिल मेहरोत्रा के साथ मिलकर एक ईमानदार रिसर्च के बल पर किरदारों को वास्तविक रूप दिया। इसके अलावा लोकेशन, वेशभूषा, माहौल और भाषा ये सारी चीजें फिल्म में कुछ इस तरह गहनता से घढ़ी गई हैं कि सब कुछ वास्तविक लगता है। जिसमें कैमरावर्क का कमाल है। मघ्यातंर तक फिल्म में किरदार रजिस्टर्ड होते हैं। इसके बाद फिल्म में रेसलिंग के तौर तरीकों तथा उसमें इस्तेमाल की गई तकनीक को कुछ इस तरह दिखाया गया है कि अंत में  इंटरनेशनल रेसलिंग में दर्शक गीता को अन्य विदेशी पहलवानों के साथ लड़ते देख रोमांच से भर उठता है क्योंकि बाकी चीजों के अलावा फिल्म की प्रभावशाली कास्टिंग और इसके बाद किरदारों पर की गई अथक मेहनत है लिहाजा कई बार छोटी बड़ी गीता बबीता निभाने वाले किरदार महावीर सिंह के किरदार पर हाॅवी होते हुये दिखाई देते हैं ।dangal

सदा की तरह इस बार भी आमिर खान ने अपनी भूमिका में खूब मेहनत की है, लिहाजा वेशभूषा, बाॅडी लैंग्वेज तथा भाषा के तहत वे असली किरदार के भीतर तक घुस जाते हैं। इसके अलावा आमिर तारे जमीन के बाद एक बार फिर ईमानदार अभिनेता और प्रोोडयूसर के तौर पर दिखाई देते हैं क्योंकि इस बार भी फिल्म में उनसे ज्यादा अहम् गीता बबीता के किरदार हैं। छोटी गीता बबीता जायरा वसीम, सुहानी भटनागर ने अभिनय के साथ शानदार हरियाणवी भाषा बोली है । इसके बाद बड़ी गीता की भूमिका निभाने वाली फातिमा सना शेख ने इमोशन और इगो को बहुत ही असरदार तरीके से प्रदर्शित किया है फिल्म में कई बार वो आमिर के बराबर खड़ी दिखाई दी है। ऐसा लगता है जैसे अपने शानदार अभिनय के बल पर उसने पूरी फिल्म पर ही कब्जा कर लिया हो। बबीता के किरदार में सान्या मल्हौत्रा ने उसका भरपूर साथ दिया है। महावीर फोगाट के भतीजे का किरदार फिल्म का सूत्रधार भी है जिसे अपारशक्ति खुराना ने बढ़िया तरह से निभाया है। साक्षी तंवर के हिस्से में ज्यादा कुछ करने के लिये नहीं था फिर भी जो कुछ उसके हिस्से में आया उसने पूरी ईमानदारी से उसे निभाकर दिखाया ।haanikaarak-bapu-song_review

फिल्म में प्रितम दा का संगीत है और सारे गाने बैकग्राउंड हैं जिनमें हानीकारक बापू तो पहले ही लोकप्रिय हो चुका है । बाकी शीर्षक गीत समेत कहानी के साथ मिलकर चलते रहते हैं ।

इसमें कोई दो राय नहीं कि दंगल आमिर की एक और ऐसी यादगार फिल्म है जिसे आमिर ही नहीं बल्कि गीता बबीता जैसे किरदारों के लिये भी याद किया जायेगा इसलिये इसे अपनी चमत्कारी अदाकारी से चमत्कृत करते अदाकारों का दंगल कहा जाये तो हैरानी नहीं होगी

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Mayapuri