गजलों के सम्राट मदन मोहन चल बसे

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madan_mohan

मायापुरी अंक 46,1975

गजलों के बादशाह संगीत निर्देशक मदन मोहन ने शहद से मीठे और दर्द भरे मधुर संगीत ‘आंखे’ 1950 से लेकर ‘मौसम’ (1975) तक जुबली वर्ष मना कर सदा के लिए आंखे मूंद ली। उनकी मृत्यु के साथ ही दर्द भरे संगीत के युग की समाप्ति हो गयी है।

मदन मोहन का आकस्मिक देहावासन पिछले सोमवार 14 जुलाई को शाम को करीब पांच बजे नानावटी अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही दिनों बाद लीवर की बीमारी के कारण हुआ। उनकी मृत्यु का समाचार फैलते ही फिल्मी दुनिया में शोक की लहर फैल गयी वे अब तक 70 फिल्मों में संगीत दे चुके थे जिनमें उल्लेखनीय है ‘निर्मोही’ ’मदहोश’ ’बागी’ ’आशियाना’ ’समन्दर’ ‘चाचा जिंदाबाद’ ‘हकीकत’ ‘दस्तक’ ‘हंसते जख्म’ ‘हीर रांझा’ आदि उनकी मृत्यु से फिल्म संगीत क्षेत्र से एक बहुत बड़ी क्षति हुई है जिसकी कभी पूर्ति हो सकेगी?, यह कहना मुश्किल है!


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Mayapuri

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