मेरी प्रोफेशनल और पर्सनल जर्नी बहुत ही अच्छी रही है- दीपिका चिखलिया

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दीपिका चिखलिया टोपीवाला जन्म – 29 अप्रैल

महत्वपूर्ण किरदार – सीता मईया -रामायण

हॉबी – पेंटिंग

दीपिका चिखलिया टोपीवाला ने माता – ‘सीता’ रामायण टेलीविजन शो से सीता के किरदार से एक बहुत ही बेहतरीन पहचान बनाई। इसके बाद कई अनेक ऐतिहासिक टेलीविजन शोज में काम कर दीपिका ने ढेर सारी तारीफ बटोरी। राजेश खन्ना के साथ फिल्म ‘रुपये दस करोड़, ‘घर का चिराग’, ‘खुदाई’ इत्यादि फिल्मों में काम कर दीपिका ने अपना एक स्थान बनाये रखा। गुजराती, मलयाली एवं बंगाली फिल्मों में भी काम किया दीपिका ने। गुजराती फिल्मों के अमिताभ बच्चन -श्री नरेश कनोड़िया के साथ भी गुजराती फिल्मों में काम किया दीपिका ने। बस शादी के बाद दीपिका ने घर गृहस्थी का भार संभाल  लिया था। दीपिका की दो बिटिया है। अब वह अपनी देख रेख और ऑफिस की देख रेख भी स्वयं कर लेती  है। अतः दीपिका ने दोबारा ‘गालिब’ से फिल्मों की और रुख कर लिया है। गुजराती फिल्म ‘नटसम्राट’ यह मराठी फिल्म नाना पाटेकर की फिल्म ‘नटसम्राट’ की रीमेक फिल्म है। इसमें गुजराती सुपर स्टार सिद्धार्थ रांदेरीया के अपोजिट काम कर रही है दीपिका।

पेश है दीपिका चिखलिया टोपीवाला की लिपिका वर्मा के साथ बातचीत के कुछ अंश

आपकी प्रोफेशनल और पर्सनल जर्नी कैसी रही ? कुछ बतायें ?

मेरी प्रोफेशनल और पर्सनल जर्नी बहुत ही अच्छी रही है। शादी करने के बाद, मैंने कैमरे को कतई मिस नहीं किया। दो बेटियां हो गयी थी सो उनकी देख रेख में सारा समय व्यतीत हो जाता। हमारी हार्ड कोर बिजनेस फैमिली है तो हम सब डाईनिंग टेबल पर बिजनेस के बारे में ही ज्यादा बातचीत किया करते। और घर की बहु होने के नाते, क्योंकि मुझे खाना बनाने का भी शौक है, सो सारा समय किचन में निकल जाया करता। कुछ समय बाद जब बेटिया बड़ी हो गयी तो मैंने अपने पति के साथ ऑफिस में मार्केटिंग हेतु भी काम किया है। अब क्योंकि समय है बच्चियां भी ऑफिस वगैरह का काम संभाल लेती है, तो मैंने वापस फिल्मों की ओर रुख करने की ठान ली है।

आपने कुछ समय के लिए राजनीति भी ज्वाइन कर ली थी ?

जी हाँ, कुछ समय के लिए मैंने पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली थी। लेकिन फिर घर गृहस्थी नेग्लेक्ट हो रही  थी, सो पॉलिटिक से वापसी कर ली। और यह भी लगा कि राजनीति मेरे बस की नहीं है। बस यही सोच कर ज्वाइन कर लिया था कि कुछ लोगों की सेवा कर लुंगी।

अभिनय को छोड़ना मुश्किल ही नहीं ना मुमकिन होता है, यह मानती है क्या आप ?

कही न कही ऐसा लगता है, ‘वन्स एन एक्टर ऑलवेज एक्टर’। एक सीरियल भी किया 2016 में ऐसा लगा अब फैमिली की जिम्मेदारी भी कुछ कम हो गयी है सो फ्री टाइम में एक्टिंग में वापसी कर। अब मेरे पास एक हिंदी फिल्म ‘गालिब’ भी आ गयी, यह फिल्म अफजल गुरु के बेटे (गालिब) पर आधारित है। फिल्म ‘गालिब’ में उसकी माँ का किरदार निभा रही हूँ। यह कहानी बहुत ही मर्म, दिल को छू जाने वाली कहानी है। टेर्रोरिस्ट्स के मरने के बाद उनके परिवार को किस तरह के प्रभाव झेलने पड़ते हैं और कितनी मुश्किलों का सामना करना होता है, यह बहुत ही इमोशनल दौर होता है परिवार के लिए। यही सब कुछ पहली बारी फिल्म ‘गालिब’ में दिखाया जायेगा। मेरे पास काफी स्क्रिप्ट्स आयी पर मैंने यह दो स्क्रिप्ट्स  चुनी है और यह दोनों फिल्में मेरी वापसी की फिल्मों में ऐड जोड़ी, जा सकती है। 

आपने अपने जीवन में नारीत्व पूर्ण रूप से एन्जॉय किया है। क्या ऐसा आप मानती है ?

जी हाँ बिल्कुल, मुझे जहाँ बेटी बनने का सौभाग्य मिला, वही मुझे बहु बनने का मौका भी मिला। साथ ही घर और बिजनेस में हाथ बटाने का मौका भी मिला.पत्नी बनी तो जाहिर सी बात है माँ भी बनी। और अपनी सारी जिम्मेदारियां बहुत खूब निभाने के बाद मुझे -आज फिल्मों में वापसी करने का जो फैमिली सपोर्ट मिल रहा है वह काबिले तारीफ है। यही कहना चाहूंगी रियल लाइफ और रील लाइफ में नारीत्व जीवन का सुख मुझे ईश्वर ने भरपूर दिया है। यह एहसास मुझे अपनी वूमनहुड को पूर्णरूप से जीने का एहसास दिलाता है।

सुना है आपको पेंटिंग्स का भी शौक है ?

जी हाँ! जब कभी मुझे फ्री टाइम मिलता है तो मैं अपने ब्रश और कलर्स लेकर बैठ जाती हूँ। हाल ही में बनारस -गंगा घाट पर जब हम फिल्म ‘गालिब’ की शूटिंग के लिए गए हुए थे तो -गंगा घाट की लहरों ने मुझे इतना प्रभावित कर दिया की मैंने वही पर बैठ कर गंगा नदी के पानी को लेकर गंगा की यह तस्वीर बना डाली। मेरे लिए रंगों का महत्व बहुत अलग है। मुझे हमेशा से ब्राइट और दिल को लाभान्वित करने वाले कलर्स पसंद होते हैं। मेरा ऐसा मानना है कि -जितने ब्राइट कलर्स का उपयोग किया जायेगा उतनी ही आपकी पेंटिंग्स में दम दिखाई देगा। यह गंगा की तस्वीर जो मैं गंगा घाट के पानी से बनाई है मेरे लिए बहुत अनमोल है।

आपको नहीं लगता सीता का किरदार आपके लिए ही बनाया गया था -कुछ आकाशीय ताकत आपकी कुन्डली में विराजमान हो सकती है ?

जी बिल्कुल, क्योंकि, मैंने कभी भी अभिनय करने की नहीं सोची थी। पर अचानक मुझे रामायण में सीता का किरदार निभाने आया। ऑडिशंस दिए मैंने और उन्हें लगा मैं सीता के किरदार के लिए बिल्कुल फिट हूँ। वैसे भी मेरा अध्यात्म की ओर रुझान है। जब कभी हम सेट्स पर होते हैं और कुछ फ्री टाइम मिलता है तो मैं गॉसिप से परे रहने के लिए ‘जला राम’ भगवन की माला जपती रहती हूँ। हम गुजराती लोग ‘जला-राम’ को बहुत, मानते हैं। सो मेरी सहेलियां यही कहा करती तुम्हारा राम से संबंध जरूर है।

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