INTERVIEW!!! दीपिका ,”पिकू” सक्सेस से अत्यंत खुश 

1 min


“पिकू” एक बहुत ही बेहतरीन पिता-पुत्री के रिश्ते को  दर्शाती  एक बहुत ही बेहतरीन फिल्म है जो न केवल आलोचकों   के दिल को भी भा गई किन्तु दर्शकों के दिल  में तो सीधी घर कर गयी।  दीपिका इस समय अपने करियर के सबसे ज्यादा बेहतरीन समय देख पा  रही है।

दीपिका ने अपना बहुमूल्य समय निकल  कर रीजनल प्रेस के साथ एक चाय पर ढेर सारी  बातें की -बाय लिपिका वर्मा

piku-wwbo-180515

आप का समय और पीकू की सफलता दोनो ही आपके पक्ष में है क्या कहना है ?

जी हाँ पीकू  पिता पुत्री पर बनी एक बहुत ही अदभुत फिल्म है। अमूमन पिता-पुत्र पर काफी ढेर सारी फ़िल्में बनी है और माँ-पुत्र पर भी हम काफी फिल्मे देखते आ रहे है। यह फिल्म की प्रोमोशन्स और सफलता अब हमारे भी हैट में नहीं रह गई है। दर्शक खुद ब खुद एक दूसरे को फिल्म देखने के बाद यह जतला रहे है कि “पिकू” उन्हीं से प्रेरित/ संबंधित एक आम परिवार की कहानी  है जिसे सब लोग अपनी आम ज़िन्दगी में झेलते भी है। मुझे इस बात का एहसास हो गया है की मेरे पास अच्छी कहानी आई है इस लिए में अपने आप को अलग अलग किरदार में फिट बैठाने की कोशिश  कर रही हू जहां कमर्शियल मसाला फिल्म,”हैप्पी नई ईयर,चेन्नई एक्सप्रेस,राम लीला मेरे को करने मिली वही मुझे फाइंडिंग फेंनी  और पीकू जैसी फिल्मे भी मिली। यह मेरे लिए एक बेहतर दौर तो है ही किन्तु मुझे कड़ी मेहनत   भी करना है।

फिल्म की सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी ?

देखिये यदि कोई फिल्म सफल होती है तो हम एक्टर्स लोग  और निर्देशक लोग इस का श्रेय बतौर अपने आप के लिए ले लेते है। पर मेरे हिसाब से लेखको को अच्छा लिखने और अच्छी कहानी देने के लिए हमें उनका शुक्रगुजार होना चाहिए। अब सब लोग यह जान चुके  है कि कहानी अच्छी ना  लिखी हो तो फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपने झंडे नहीं गाड़  पाती  है। दर्शकों को भी कुछ नया ही परोसना पड़ता है. दरअसल इस फिल्म में ,”कब्ज ” को लेकर कहानी आगे बढ़ती  है यह तो निश्चित है की दर्शक काफी विकसित बुद्धि लेकर ही सिनेमा घरो में घुसते है और यदि फिल्म पसंद आती है तो माउथ पब्लिसिटी भी करते है यही पीकू के साथ भी हुआ है. सो यह साफ हो चुका है कि अब हमे हमारे लेखको को तवज्जो देना चाहिए।

deepika-padukone-from-piku-movie-images1

फिल्म में अपने पिता [अमिताभ बच्चन ] लो जिस तरह डंडी है अगर आपके पिता प्रकाश के साथ ऐसा हो तो क्या करेंगी?

उनको भी उसी तरह झेलूंगी। यह फिल्म करने के बाद मैं अपने माता पिता के बारे में सोचने लगी हूँ। आपको यह जान के ताज्जुब होगा  कि मेरी माँ भी मेरे पिताजी को यही  कहती है जब वो टॉयलेट में होते है-प्रक्सः जल्दी निकलो!! हंस कर बोली इसलिए में फिल्म की कहानी से तुरंत जुड़ गयी। मैं हमेशा अपने माँ बाबा को यही  सलाह देती हू कि आप दो बाथरूम क्यों नहीं बना लेते हो। ”

पीकू की सफलता के बाद आपके पितश्री ने क्या कहा?

अमूमन हर फिल्म देखने के बाद मेरे पिताजी और सारा परिवार यही  कहता है कि तुम्हें  कुछ और बेहतर करना था। किन्तु जब फिल्म पीकू  देखने के बाद उन्होंने मुझे फ़ोन किया- तो कुछ पल ख़ामोशी छाई रही और बस हु हु हु ही करते रहे. मुझे पता है जब में अपने घर जाउंगी तो वों  मुझे एक छप्पी  देंगे और इमोशनल हो जायेंगे।

 संजय लीला बंसाली  की मस्तानी कर रही है कुछ बतलाएं ?

नहीं बाबा संजय विल किल मी ! मस्तानी एक बहुत ही शशक्त महिला थी  ,कमजोर बिलकुल भी नहीं थी जहाँ एक बेहतरीन माँ थी, वही एक  आयाम को पकड़ कर आगे नहीं बढ़ती। वह एक साथ कई काम किया करती। बस मुझे यह चुनौतीपूर्ण किरदार अच्छी तरह से निभाना है वही करने की कोशिश कर रही हूं। और ज्यादा कुछ इस किरदार के बारे में नहीं बोल पाऊँगी। तमाशा निर्देशक इम्तिआज़ अली की एक रोमांटिक कहानी पर आधारित फिल्म है।

आगे आप फिल्म निर्देशक की भूमिका में नजरआ सकती है क्या?

मुझे निर्देशन में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। किन्तु में लाइन प्रोड्यूसर बनना चाहती हूँ। फ़िलहाल तो में अभिनय करने में व्यस्त हूँ, आगे में यदि कुछ करू तो यही कर सकती हूँ। मुझे हिसाब रखना , लोगों को खिलाना पिलाना,फाइलिंग वग़ैरा करना और जो कुछ भी लाइन प्रोड्यूसर के काम है उस में रूचि है।

unnamed


Like it? Share with your friends!

Mayapuri

अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिये