‘पद्मावती’ देखकर हर राजपूत, हर भारतीय गर्वान्वित महसूस करेगा

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बॉलीवुड में दस वर्ष से सक्रिय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने हमेषा चुनौतीपूर्ण किरदार निभाए। दीपिका पादुकोण ने हमेशा सच कहने की हिम्मत दिखयी.वह पहली अभिनेत्री हैं, जिन्होने डिप्रेशन का शिकार होने की बात का कबूल की था.फिर उन्होने डिप्रेशन के शिकार लोगों की मदद के लिए एक फाउंडेशन बनाकर उन्हे मदद पहुंचाने की शुरूआत की। इन दिनों वह संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म ‘‘पद्मावती’’ को लेकर विवादों में हैं.इस फिल्म को लेकर विरोध दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। राजपूत करणी सेना ने तो उनकी नाक काटने की धमकी तक दे डाली है। जबकि संजय लीला भंसाली के साथ साथ अब दीपिका पादुकोण भी दावा कर रही हैं कि इस फिल्म में कुछ भी गलत नहीं दिखाया गया है। हाल ही में ‘‘महबूब स्टूडियो’’, बांदरा,मुंबई में फिल्म ‘‘पद्मावती’’ को लेकर दीपिका पादुकोण ने‘‘मायापुरी’’से एक्सक्लूसिब बातचीत की,जो कि इस प्रकार रही…

फिल्म ‘‘पद्मावती’’ को लेकर जो विरोध हो रहा है, उससे आप काफी विचलित होंगी?

हम भारतीय सभ्यता, संस्कृति, भारतीय इतिहास,पद्मावती की जो कहानी है, उसको सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को दिखाना चाहते हैं। हमारे इरादे एकदम नेक हैं। हमें दुःख इस बात का है कि जब हमारे इरादे नेक है, हम दो वर्ष की मेहनत से इसे बना रहे थे, तो फिल्म के प्रदर्शन से पहले ही उसका विरोध क्यों किया जा रहा है। फिल्म देखने के बाद यदि किसी को कुछ गलत लगे,तो वह हमसे कहें, हम अपनी गलती मान लेंगे। मगर फिल्म के प्रदर्शन से पहले, जबकि किसी ने न फिल्म देखी है, न तो किसी ने फिल्म की पटकथा पढ़ी है, तो फिर वह किस बात को लेकर परेशान हो रहे हैं। मैं यह बात नहीं समझ पा रही हॅूं।

फिल्म‘‘पद्मावती’में आप लोगों ने क्या दिखाया है?

इस फिल्म में हम दिखा रहे हैं कि पद्मावती क्या थी? पद्मावती ने अपने देश के लिए, अपने राज्य की जनता के लिए क्या किया? हम किसी भी स्तर पर इस किरदार को कमतर पेश नहीं कर रहे हैं.हमारा यही कहना और मानना है कि पहले फिल्म को प्रदर्शित होने दें,फिल्म को सिनेमाघरों में जाकर देखें। फिर यदि किसी को भी किसी बात पर एतराज है, तो हमसे कहें, हम गलती को स्वीकार करेंगे।

राजपूत करणी सेना को पद्मावती व खिलजी के बीच के संबंध को लेकर आपत्ति है.तो फिल्म में इसको लेकर क्या है?

हम मीडिया में जो कुछ पढ़ या सुन रहे हैं, वैसा कुछ भी हमारी फिल्म में नहीं है। संजय सर खुद वीडियो जारी कर कह चुके हैं कि लोगों की आशंकाएं निराधार हैं। वैसा कुछ भी फिल्म में नहीं है। फिल्म में एक भी स्वप्न दृश्य आदि नहीं है। मैं तो यही कह रही हूं कि इतिहास में जो कुछ लिखा हुआ है,वैसा ही हमने फिल्म में दर्शाया है.इतिहास में जो लिखा है, उसमें न तो हमने कुछ जोड़ा है और न ही घटाया है।

आप कहती है कि इतिहास जैसा है,वैसा पेश किया गया है। ज्यादातर इतिहास विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है.इसके अलावा हमारे देश में अलग अलग लोककथाएं प्रचलित हैं। ऐसे में क्या आप हर वर्ग को खुश कर सकती हैं?

फिल्म के प्रदर्शन पर ही पता चलेगा कि क्या सही है और क्या सही नहीं है। इस वक्त हम कुछ कह नहीं कह सकते हैं। फिलहाल हम यकीन दिलाना चाहेंगे कि हमने इतिहास को ही ध्यान में रखकर फिल्म बनायी है। हमने फिल्म में वही सब दिखाया है, जो कि सभी को पता है।

जैसा आपने कहा कि कुछ लोगों का यकीन अलग हो सकता है। इतने बड़े देश में हर इंसान को संतुष्ट करना आसान नही है,पर हमारा प्रयास यही रहा है कि गलत तथ्य न पेश किए जाएं और वही दिखाया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग सहमत हों। अगर कहीं न कहीं कुछ अलग हुआ, तो हमने वह जानबूझकर नही किया है, इस पर आप यकीन करें। हम लोग जितना पद्मावती के बारे में जानते हैं या राजपूत लोग जानते हैं, उसी को लेकर हमने एक अच्छी फिल्म बनायी है। मुझे यकीन है कि फिल्म देखकर हर भारतीय, हर हिंदुस्तानी, हर राजपूत इस किरदार के साथ रिलेट कर पाएंगे और खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे।

‘‘पद्मावती’’ का किरदार निभाने के लिए कोई अन्य तैयारी ?

यूं तो कलाकार के तौर पर मैं हमेशा अपने आपको फिट रखती हूं। पर पद्मावती चित्तौड़ की रानी थी। इसलिए हमें उसी तरह से नजर आना था। इसके लिए हमने यास्मीन कराचीवाला के साथ एक खास तरह की पिलाटे ट्रेनिंग ली, जिसे ‘20-20 -20 ’कहते हैं। इसके लिए हमें हर दिन तीन अलग अलग मशीन पर बीस बीस मिनट वर्कआउट करना पड़ता था। सप्ताह में छह दिन और हर दिन एक घंटे मैं जिम को दे रही थी। खान पान में भी थोड़ा सा बदलाव किया था। मसलन, नाश्ते में रवा उपमा या डोसा या इडली लेती थी। भोजन में वेजीटेबल ज्यादा ले रही थी। शाम को काफी पीती थी।

आपके अनुसार ‘पद्मावती’ क्या हैं? या यूं कहें कि ‘पद्मावती’ को लेकर आपकी अपनी समझ क्या है ?

यही कि हर औरत के अंदर कहीं न कहीं एक पद्मावती छिपी हुई है। उनके जीवन मूल्य, उनकी बुद्धिमत्ता, उनकी वीरता, उनकी निडरता, वह जो कुछ भी अहसास करती थीं, वह सब कहीं न कहीं हम सभी औरतों के अंदर छिपी हुई है। जरुरत सिर्फ अपने अंदर की उस ताकत /खूबी का अहसास करने की है। मुझे पता है कि सिर्फ हर राजस्थानी ही नहीं,बल्कि हर राजपूत उनकी पूजा करता है। वह उनकी पूजा क्यां करते है, इसे भी मैं इस किरदार को परदे पर निभाने के बाद समझ सकती हूं। उनके अंदर बहुत ज्यादा प्राइड है। उनके अंदर साहस भी है.सच कह रही हूं जब मैं पद्मावती के किरदार के लिए तैयारी के तहत किताबें आदि पढ़ रही थी, तो उनकी इन खूबियों से मैं इंस्पायर भी हो रही थी। यही वजह है कि मैने संजय सर से कहा कि मैं इस किरदार को हर हाल में निभाना चाहूंगी.क्योंक। हम सभी को दिखाना चाहते हैं कि ‘पद्मावती’ क्या थीं?

सुना है कि पद्मावती के किरदार में आपने कम मेकअप को प्रधानता दी है ?

रानी पद्मावती अपनी सुंदरता, बुद्धिमत्ता, साहस व वीरता के लिए जानी जाती हैं। इसलिए हमने ‘‘नो मेकअप लुक’’ को प्रधानता दी है। इस फिल्म में हमारे किरदार की सादगी बड़े शानदार तरीके से नजर आएगी। इस फिल्म में हमारे शाही लुक को दिल्ली के मशहूर डिजायनर रिंपल और हरप्रीत नरूला ने डिजाइन किया है। इसके लिए रिंपल और हरप्रीत नरुला ने जयपुर और केलिको संग्राहलयों में जाकर उस वक्त यानी कि पुरातन शैली के वस्त्रों, डिजाइन आदि का बारीकी से अध्ययन किया। तभी तो दर्शकों ने फर्स्ट लुक पोस्टर में पाया कि जरदोजी करीगारी किए गए लंहगे में ब्रम्हांड के इंसानी रिश्ता की झलक के साथ ही एक वीर योद्धा की छवि भी उभरती है। इसमें हमने जो ओढ़नी ओढ़ी है,उसमें राजस्थान के मेवाड़ की परंपरागत ओढ़नी की झलक है।

संजय लीला भंसाली के साथ आपके किस तरह के इक्वेशन हैं ?

काफी बेहतरीन व परिपक्व रिश्ते हैं। हम दोनों एक दूसरे को अच्छी तरह से समझते हैं। यदि सेट पर मैं कुछ सोचती हूं, तो वह समझ जाते हैं कि मैं क्या सोच रही हूं. इसी तरह उन्हे देखकर मैं समझ जाती हूं कि अब इस सीन में वह क्या चाहते हैं. एक दूसरे के प्रति हमारे मन विश्वास है,तभी हम ‘पद्मावती’ जैसी फिल्म कर पाए।

संजय लीला भंसाली के साथ तीन फिल्में करने के बाद आपने उनमें क्या बदलाव महसूस किया ?

उनमें सबसे बड़ा बदलाव यही आया है कि अब वह और अधिक बेहतर काम कर रहे हैं.जब ‘बाजीराव मस्तानी’ प्रदर्शित हुई,तो मैने कहा कि यह तो ‘रामलीला’से भी अच्छी फिल्म है.अब ‘पद्मावती’तो उससे भी बेहतर है।

हकीकत में जब मैने ‘पद्मावती’ में काम करने के लिए हामी भरी, तो तमाम लोगों ने मुझसे कहा कि तुम फिर से संजय लीला भंसाली के साथ काम कर रही हो.अब कुछ भी नयापन नहीं होगा.वही दोहराव होगा.मगर संजय सर ने उससे ज्यादा बड़े स्तर पर, बड़े ग्लैमर, बड़े कैनवास वाली फिल्म ‘पद्मावती’ बनायी है.काफी अच्छा काम किया है.वह बार बार अपने ही काम के स्तर को चुनौती देते हुए उससे बेहतर स्तर पर अपने काम को पहुंचाते रहते हैं।

आपके लिए सफलता और असफलता क्या मायने रखती है?

मुझे पता नहीं.पर मुझे लगता है कि मैं सारा ध्यान अपने काम पर रखती हूं.मुझे नहीं लगता कि मैं सफलता और असफलता पर ज्यादा ध्यान देती हूं.लेकिन जब फिल्म सफल होती है, तो हमें खुशी होती है.हमें लगता है कि हम सभी ने जो मेहनत की थी, उसका भुगतान हो गया.पर जब कोई फिल्म असफल होती है, तो बुरा लगता है.लेकिन इसके यह मायने नही कि हम एक फिल्म की असफलता के बाद हम वहीं रूक जाते हैं या हम आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करते हैं. हर कलाकार फिल्म के सफल और असफल होने पर वहीं तक सीमित नहीं रहता है.बल्कि आगे बढ़ने की कोशिश करता है.मैं तो हमेशा आगे की सोचती हूं.हर बार अच्छा काम करने की सोचती हूं।

कहा जा रहा है कि आप फिल्म या किरदारों के चयन को लेकर सफल रही हैं.क्या आप किसी की सलाह या मदद लेती हैं ?

सब कुछ इंस्टिंट के आधार पर निर्णय लेती हूं.मैं इस बारे में ज्यादा कुछ सोचती नहीं हूं.मेरा दिल जो कहता है,वही करती हूं।

आपने लोगों को डिप्रेशन से निकालने के लिए ‘‘लिव लव लाफ’’ नामक एनजीओ बनाया है.इस पर कुछ कहना चाहेंगी?

हम अपनी संस्था के द्वारा डिप्रेशन को लेकर लोगों के बीच जागरूकता पैदा करना चाहते हैं. क्योंकि इसके प्रति लोगों को बहुत कम जानकारी है.इस बारे में लोग ज्यादा खुलकर बात नहीं करते हैं.किसी डाक्टर के पास जाना हो या किसी को बताना हो कि मेरे साथ ऐसा हो रहा है तो बहुत घबराहट के साथ,बड़ी हिचक के साथ बात करते हैं.हम कोशिश कर रहे हैं कि मानसिक बीमारी/ मेंटल हेल्थ को हम सभी स्वीकार करें.इसीलिए हम अवेयरनेस पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।


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