एजुकेशन मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने फिल्मों को जोड़ा पढाई से …खुश हुए स्टूडेंट्स

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जैसा की आप जानते हैं की पिछले हफ्ते दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के छात्रों और शिक्षकों के बीच चेतन भगत के बहुचर्चित नॉवेल ‘फाइव प्वाइंट सम वन’ को सिलेबस में शामिल करने की वजह से बहस की स्थिति बन गई थी। वजह साफ थी, छात्रों का कहना था कि चेतन भगत की नॉवेल को लिट्रेचर के रूप में शामिल करना सही नहीं है जिसके बाद छात्रों को अच्छा फेसबुक पोस्ट लिखने की कला सिखाने की पेशकश की गई। जिसके लिए सभी कॉलेजों में सुझाव के लिए प्रस्ताव भी भेजे गए।

लेकिन इस बार स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी है और वो ये की यूनिवर्सिटी के सीबीसीएस सिस्टम में सिनेमा के दो पेपरों को जगह दी गई है। इनमें बीए ऑनर्स, इंग्लिश के छात्रों के लिए लिट्रेचर और सिनेमा का कोर्स रखा गया है और सिनेमैटिक अडॉप्शन ऑफ लिटररी टेक्सट्स, इलेक्टिव के तौर पर रखा गया है। यानि अब इसके बाद नए सत्र से छात्रों को किताबों के सिनेमैटिक अडॉप्शन को भी पढ़ाए जाने की योजना तैयार की गई है। सिनेमैटिक अडॉप्शन से मतलब है उन फिल्मों के बारे में जिन्हें किसी बड़ी किताब के आधार पर बनाया गया है, जिनमें ‘ओमकारा’, ‘ब्राइड एंड प्रीजूडाइस’, ‘मकबूल’, ‘हैदर’ या ‘अंगूर जैसी फिल्मों के बारे में पढ़ाया जाएगा।

एजुकेशन सिस्टम फिल्मे जुड़ने से स्टूडेंट्स बहुत खुश हैं और शायद एजुकेशन मिनिस्ट्री का यह फैसला आज की जनरेशन के लिए ठीक भी हो क्योंकि आज कल हर दूसरा स्टूडेंट एक्टर बनना चाहता है। लेकिन इस तरह के एक अडिशनल सब्जेक्ट को ऐड करना स्टूडेंट्स के भविष्य के साथ खेलना भी हो सकता है। क्योंकि इससे स्टूडेंट्स को फिल्मे देखने का एक बहाना मिल गया है जिससे उनके अन्य सब्जेक्ट्स पर भी नेगेटिव असर हो सकता है और इससे इसका सीधा असर उनके भविष्य पर भी पड़ सकता है।

 


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Mayapuri

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