देव आनंद और मधुबाला की गुप्तगु

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044-27 Dev Anand

 

मायापुरी अंक 44,1975

आज नई पौध जब सवांद बोलती है तो कभी कभार बड़ी हंसी आती है उनके लहज़े में कही अंग्रेजियत होती है तो कभी ‘पंजबियत’ और जो गुजराती या मराठी भाषा-भाषी होते हैं उनके उच्चारण भी बड़े हास्य स्पद होते हैं। हिन्दी और उर्दू सही तौर पर न बोल पाने के बावजूद वह किसी न किसी कारण हिट हो जाते हैं और फिर भाषा की ओर ध्यान देने की बजाए वे केवल पैसे कमाने पर ही पूरा जोर लगाते हैं। पहले जमाने के कलाकारों में यह बात नही थी। वे अपनी कमी दूर करने की भरसक कोशिश करते थे। उसमें ही एक अभिनेत्री मधुबाला भी थीं। मधुबाला उर्दू के सिवा दूसरी कोई भाषा नही जानती थी।

सन 1950 की बात है। एक फिल्म के सैट पर देव आनंद मधुबाला के साथ शूटिंग कर रहे थे। उसी दौरान देव आनंद का कोई दोस्त सैट पर आ गया। और देव आनंद उनसे आदतानुसार इंगलिश में बातें करने लगे बातचीत के दौरान मधुबाला का भी जिक्र आ गया। जिसे वह समझ न सकी। देव के दोस्त के जाने के बाद उन्होंने देव आनंद से पूछा,

तुम ने अपने दोस्त से मेरे बारे में क्या बात की? तुम दोनों बार-बार मेरा नाम क्यों ले रहे थे?

कुछ भी नही, वह यूं ही तुम्हारें बारे में पूछ रहा था मैंने उनसे तुम्हारें काम की बड़ी प्रशंसा की। देव आनंद ने उन्हें बताया।

नही, ऐसी बात नही है। तुम असली बात छुपा रहे हो। मधुबाला ने अपना संदेह प्रगट किया।

तुम्हें यकीन नही आता तो मैं क्या कह सकता हूं। शक का इलाज तो हकीम लुकमान के पास भी न था। अगर तुम समझती हो कि हम तुम्हारी बुराई कर रहे थे तो तुम इंगलिश क्यों नही सीख लेतीं? देव आनंद ने तंग आकर पिंड छुड़ाने के लिए कहा।

देव आनंद की यह बात मधुबाला के दिल को लग गई। और अगले ही दिन वह एक इंगलिश प्राइमर ले आईं। और सैट पर अवकाश के समय इंगलिश पढ़नी शुरू कर दी। लोग सैट पर मधुबाला को cat कैट, Rat रेट पढ़ता देखकर हंसा करते, किंतु मधुबाला इन बातों से बेहपरवाह इंगलिश पढ़ने में लीन रहती। आखिर बाबू राव पटेल की पत्नी सुशीला रानी ने उनकी लगन देखकर उन्हें इंगलिश की ट्यूशन देकर उनकी इंगलिश अज्ञानता की कमी दूर कर दी।

आज नए कलाकारों में यह बात नही है। हालांकि अगर राजेश खन्ना, जीतेन्द्र, मौसमी चटर्जी ज़ीनत अमान, विनोद खन्ना, नीतू सिंह आदि चाहें तो एक ट्यूटर रखकर अपनी भाषा ज्ञान सुधार सकते हैं। लेकिन इन लोगों को ‘स्कैंडलबाजी’ से ही फुर्सत मिले तो कुछ करें और इसके बिना समय निकाल नही सकते।

पुराने जमाने में सागर कम्पनी में एक निर्देशक थे सर्वोतम बादामी। वे इतने बुद्धिमान और लगनशील आदमी थे कि बस हर समय काम में व्यस्त रहते थे। काम करते समय वह अपने आस-पास क्या हो रहा है इसको भी भूल जाते थे। एक दिन वह 300 दिन और उसके बाद की शूटिंग कर रहे थे। एक दिन वह शूटिंग करते हुए किसी सीन में ऐसे खो गये कि उन्हें समय का ख्याल ही न रहा और लंच का समय हो गया। कैमरा मैन फरिदून इरानी बड़ी देर से बैठे आदमी के अगले आदेश की प्रतिक्षा कर रहे थे। और उधर हीरो मोती लाल एक और बैठे बोर हो रहे थे। इतने में निर्माता ने आकर पूछा मोती लाल जी आपने खाना खा लिया?

क्या टेबल खाऊं या कुर्सियां? मोती लाल ने झल्लाकर कहा।

निर्देशक बादामी ने मोती लाल की बात सुन ली। उन्होंने इशारे से मोती लाल को पास बुलाया और पूछा, तुमने अभी क्या कहा?

मोती लाल बेतल्लुक होने के बावजूद बादामी की इज्जत करते थे इसलिए बोले कुछ नही बादामी साहब यूं ही मुंह से निकल गया।

मोती लाल ने यह सोचकर कहा कि शायद बादामी को बात बुरी लग गई है टालते हुए कहा।

लेकिन कहा क्या था? उन्होंने आग्रह किया।

कुछ नही I am sorry !” मोती लाल बोले।

अरे माफी मांगने की जरूरत नही है। उस वाक्य को दुहराओ जो तुमने अभी कहा था। बादामी ने पहलू बदल कर कहा।

टेबल खाऊ, कुर्सियां खाऊं

यह हुई न बात यह हमारे गीत का मुखड़ा होगा। यह कह कर उन्होंने लंच ब्रेक कर दिया और खुद गीत लिखने बैठ गए। और शाम तक वह गाना लिख कर तैयार कर लिया। और अगले दिन वह गाना लिख तैयार कर लिया। और अगले दिन वह गाना मोती लाल पर फिल्माया गया।

एक दिन मोती लाल बिब्बो को छेड़ रहे थे। वह उठकर जाने लगीं तो मोती लाल उनके पीछे गाकर चिढ़ाने लगे अकेली मत जाइयो, राधा नदिया के पार

बादामी को सिच्युएशन और मुखड़ा इतना पसंद आया कि अगले दिन उसी पर गाना तैयार करके फिल्मा डाला और यही फिल्म जब बनकर रिलीज़ हुई तो उसने मोती लाल की पिछली तमाम फिल्मों के बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ दिए। यही नही फिल्म में बेहतरीन अभिनय के सिले में सेठ चंदू लाल शाह ने मोती लाल को ‘गौहर गोल्ड मैडल’ इनाम में दिया।

आज बादामी फिल्मों से इतने दूर हैं कि सालों तक न फिल्में देखते हैं और न किसी फिल्मी आदमी से मिलते हैं। और न ही फिल्मी पत्रिकाएं पढ़ते हैं। फिल्मों के लिए आज वह ऐसे अजनबी हैं जैसे कभी फिल्मो में थे ही नही। और मोती लाल तो फिल्म लाइन ही क्या छोटी छोटी बाते कह कर दुनिया ही छोड़ गए हैं।

 

044-27 Madhubala

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Mayapuri