INTERVIEW: देव आनंद का निर्देशन का नशा उतरा नही

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मायापुरी अंक, 57, 1975

मेहबूब स्टूडियो में साहेब बहादुर के सेट पर देव आनंद खाली समय का उपयोग करने में व्यस्त थे और किसी असिस्टेंट से अपने अगले सीन के बारे में पूछ रहे थे वह उससे फ्री हुए तो मैंने जा घेरा और दुआ सलाम के बाद उनसे पूछा।

देव साहब क्या यह सही है कि आपने इश्क इश्क इश्क के बाद निर्देशन से तौबा कर ली और इसीलिए अपनी फिल्मों का निर्देशन गोल्डी और चेतन साहब को सौंप दिया है?

नही ऐसी बात नही है। निर्देशन का नशा शराब से कम नहीं है। लेकिन फिल्म बनाने में हर एक का अपना अपना दृष्टिकोण होता है। मैं कलाकारों की तारीखों का गुलाम होकर फिल्म बनाने में विश्वास नही रखता हूं एक साथ फिल्म पूरी करना अच्छा समझता हूं। इस मामले में मैं किसी प्रकार का समझौता पसंद नही करता। आजकल एक्टिंग में अधिक व्यस्त हूं समय मिलते ही मैं अपनी फिल्म शुरू करूंगा। देव आनंद ने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए कहा।

सुना है आपने ‘इंसानियत’ के बाद दिलीप साहब के साथ काम न करने की कसम खाई थी। इसके बावजूद मुशीर-रियाज की फिल्म में आप दिलीप साहब के साथ काम करने वाले हैं ? मैंने पूछा।

कसम वसम खाने में मैं विश्वास नही रखता मैं तो काम में विश्वास रखता हूं गोल्डी ने मुझसे मुशीर रियाज़ की फिल्म की बात की है किंतु वह अभी तक पक्की नही हुई है क्योंकि सलीम जावेद अभी तक फिल्म की स्क्रिप्ट पूरी नहीं कर पाये हैं। स्क्रिप्ट पूरी हो जाए। कहानी और केरैक्टर का पता चल जाए जब कोई निश्चित कदम उठाऊंगा देव आनंद ने बताया।

जीनत अमान की बातों से और आपकी नई फिल्मों से ऐसा प्रतीत होने लगा है कि आपके ज़ीनत से संबध अच्छे नही रहे है। इसीलिए आप सब जीनत के स्थान पर हेमा और अऩ्य हीरोइनों को प्राथमिकता देने लगे हैं। क्या यह सही है? मैंने पूछा।

ज़ीनत से मुझे कोई शिकायत नही है। वह एक अच्छी अभिनेत्री है। उसके साथ कई फिल्में की है और अब भी ‘वारंट’ ‘कलाबाज’ में काम कर रहा हूं। लेकिन इस शो बिजनेस में वही सेटअप बनाया जाता है जो बिकता है और सेट अप में नहीं निर्माण बनाता है। इसलिए यदि कोई इसके लिए मुझे दोषी ठहराता है तो वह गलत है देव आनंद ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा।


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Mayapuri

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