आनंद मरे नहीं, आनंद मरते नहीं – अली पीटर जाॅन

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करीब तीन साल बीत चुके हैं देव आनंद को मरे, मेरा एक केमिकल इंजीनियर दोस्त त्रिनेत्र बाजपेयी की बुक का नाम देव इटरनल आनंद है जिसे उसने लिखा है देव आनंद की जीवनी जिसके विमोचन का इंतजार है। पता नहीं क्यों पर मुझे अभी तक यकीन नहीं हो रहा है कि देव आनंद की मृत्यु हो चुकी है।
मैंने उनके साथ बहुत अच्छा समय बिताया है और बहुत सारी कहानियां है हमारी मुलाकात की जिसे मैं बताने जा रहा हूं उनमें से तीन किस्सों का जिक्र मैं करना चाहता हूं।

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साल 1974 था जब देव आनंद ने लेखक-निर्देशक के तौर पर डेब्यू किया फिल्म ‘प्रेम-पुजारी’ से जिसमें वहीदा रहमान और जाहिदा थी जो कि भतीजी है नरगिस दत्त की। फिल्म बहुत बुरी तरह पिटी लेकिन फिर भी फिल्म को बैस्ट म्यूजिक दिया था एस.डी बर्मन ने,  देव आनंद और वहीदा रहमान की भावुक एक्टिंग और खूबसूरत लोकेशन को लोगों ने सराहा। देव आनंद उनमें से नहीं थे जो इतनी जल्दी हार मान जाये उसके बाद उन्होंने तय कर लिया फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ बनाने का।

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देव आनंद की फिल्म में जीनत अमान रोमांटिक मुख्य किरदार में थी पर फिल्म में इनके अलावा खास थी फिल्म की कास्ट। उनकी फिल्म में दिग्गज अभिनेता प्रेमनाथ, नादिरा, इफ्तेखार, ए.के हंगल और नाना पल्सीकर फिल्म के खास किरदार में थे। लेकिन उनके अलावा फिल्म में खास टैलेंट थी एफटीआइआइ की शबाना आजमी और जरीना वहाब। फिल्म में उनके एक साथ हैंडसम माॅडल थे कबीर बेदी। कबीर बेदी इस फिल्म से डेब्यू करने जा रहे थे और उन्होंने अपने भतीजे शेखर कपूर के लिए भी बात की थी जो उस वक्त लंदन में चार्टर्ड अकाउंटेड थे और अभिनेता बनने के लिए हाथ आजमाना चाहते थे। ये फिल्म मुसीबत साबित हुई एक अखबार ने फिल्म के बारे में लिखा हैडिंग देते हुए ‘रिस्क रिस्क रिस्क’। लेकिन देव आनंद को जिससे खुशी हुई थी वह यह बात थी कि इस फिल्म की रिलीज के बाद फिल्म की कास्ट को फिल्मों के लिए आॅफर मिले।

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फिल्म ‘इश्क इश्क इश्क’ को सिक्किम के पहाड़ों के टाॅप पर शूट किया गया था और जिस घर में शूटिंग हुई थी वह आज यादगार हो गई है और यात्रियों के लिए घूमने की एक जगह बन गई है जहां देव आनंद ने फिल्म को शूट किया था।
देव आनंद के बारे में अगली कहानी हैं होटल जुहू के सन-एण्ड-सैंड के बारे में। यह होटल उस वक्त बना था जब देव आनंद अपने स्टारडम की ऊँचाईयों पर थे। इस होटल के रुम नम्बर-226 में अक्सर वह अकेले रहते थे और कई बार वह मेजबान भी बने अपने नजदीकियों के लिए। वह अपने मेहमानों का स्वागत करते थे और उनकी मेहमान नवाजी में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। मेरे साथ उनकी कुछ मुलाकात उसी कमरे में हुई और वह मुलाकात यादगार बन गई। देव आनंद मिले हाॅलीवुड के कुछ महान कालाकारों से जिनमें सर चार्ली चैप्लीन भी शामिल है। जब वह 88 साल के थे तब ये उनसे मिले बाॅलीवुड के कुछ चुनिंदा कलाकारों के साथ जिसमें राज कपूर, दिलीप कुमार, और के.ए. अब्बास थे। ग्रेगेरी पेक का प्रभाव इन पर पड़ा और देव साहब उनकी एक्टिंग से काफी प्रेरित हुए। उन्होंने उनका स्टाइल अपने तरह से रखा लोगों के सामने। फ्रांक कापरा, सोफिया लोरेन और भी बहुत सारे हाॅलीवुड स्टार से इनकी मुलाकात उस कमरे में हुई। देवआनंद के बेस्ट फ्रेंड थे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और आनंद साहब मिले दुनिया के ताकतवर शख्सियत और मंत्रियों से।

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उन सारे मंत्रियों से मुलाकात में इनकी एक और मंत्री से मुलाकात हुई थी और वह हैं नवाज शरीफ जो अभी भी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री ने कहा देव आनंद से कि वह उनके बहुत बड़े फैन हैं और उन्हें उपहार में हैट दिया जो उन्होंने फिल्म ज्वैल थीफ में पहनी थी। देव साहब के लिए वह हैट बहुत खास थी और वह उसे सम्मानित जगहों पर पहन कर जाते थे या फिर आॅफिस में और अभी भी वह हैट उनके बेटे और फिल्म मेकर सुनील आनंद के काम करने वाले टेबल पर रखी हुई है।

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सुनील आनंद तैयार हैं अपनी नयी फिल्म के लिए जिसके वे लेखक, निर्माता, और निर्देशक भी हैं। फिल्म का नाम है ‘वगैटर मिक्सर’ बिल्कुल वैसी ही फिल्म है जैसी फिल्म देव साहब बनाते थे और यह फिल्म उन्हें डेडिकेटेड है। मैं चाहता था की काश मेरे पिता भी इस फिल्म का हिस्सा होते क्योंकि यह फिल्म उन्हीं के सिद्धान्तों पर बनाई गई है।


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