जब हेमा मालिनी और संजीव कुमार की शादी तुड़वाई धर्मेन्द्र ने

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मायापुरी अंक 10.1974

ये दो अलग-अलग सवाल है, फिर भी हमने इन्हें एक साथ उठाया है। क्यों ? इसलिए कि इन दोनों सवालों को जन्म देने वाली स्थितियां एक जैसी है। ये दो सवाल गणित के एक ही अध्याय के दो सवालों जैसे है। इनके उत्तर अलग-अलग होंगे पर इन्हें हल करने का तरीका एक है।

संजीव और हेमा जिन स्थितियों में फंसे हुए है, उनमें गहरी समानता है। दोनों ही फिल्म-जगत के शीर्षस्थ कलाकार है। दोनों ही अत्याधिक भावुक है। दोनों ही पत्रकारों से मिलने से घबराते है, इसलिये जो कुछ करते है उसका एक बहुत ही कम भाग पत्रकारों को नजर आता है और इस कम भाग का भी जो भाग पाठकों तक पहुंचता है वह तो और भी कम होता है।

सच बात तो यह है कि संजीव और हेमा का स्वभाव इतना मेल खाता है कि यह विवाह एक आदर्श जोड़ी होती। हेमा और संजीव बहुत पहले ही एक- दूसरे के दिलों मे अपना स्थान बना चुके थे। ‘धूप-छाहं’ की शूटिंग के दौरान उन्हें अधिक निकट आने का अवसर मिला। इसी बीच ‘धूप-छाहं’ डिब्बे में बंद होकर रह गई किंतु हेमा और संजीव का मेल जोल बंद न हुआ। इस प्रणय-व्यापार पर दो जोड़ी आंखे अपनी चौकन्नी गिद्ध दृष्टि रखे हुए थी श्रीमान और श्रीमती चक्रवती की। सोने की मुर्गी हाथ से जाते देख कर हेमा प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के दोनों भागीदार सावधान हो गये।

वह दिन भी आया जब संजीव को श्रीमती चक्रवर्ती ने बड़ी सफाई से संजीव को टाल दिया ‘हमने हेमा के लिए अपनी जाति का एक लड़का पहले ही देख रखा है। और मामला खत्म हो गया।

हेमा ने विद्रोह किया तो अम्मा ने हेमा को संजीव के चरित्र के विषय में कुछ ऐसी बातें बताई कि हेमा चुप होकर रह गई। हरेक स्टार का होटल में अपना एक कमरा (या सूट) परमानेंट बुक रहता है। जहां स्टार यदा-कदा प्रेरणा लेने जाने रहते है। ऋषि कपूर से लेकर संजीव कुमार तक होटल में अपना कमरा बुक रखते है। आखिर आलतू-फालतू धन का कुछ न कुछ तो उपयोग किया ही जाएगा।

हमने संजीव से इस विषय में बात की तो उन्होंने इतना ही कहा-घर में लड़की हो तो उसके लिए विवाह-संम्बधी प्रस्ताव आयेंगे ही। उनमें से कुछ ठुकराये जाते है, कुछ पर विचार भी किया जाता है। अपना प्रस्ताव रखा, उन्होंने ठुकरा दिया। बस विवाह जहां होना हो, वही होता है। इसमें संयोग और विधाता का बहुत हाथ होता है।

जो बात संजीव ने मुहं से नही कही, वह उनके चेहरे ने कह दी। इस प्रस्ताव के टूटने से संजीव के दिल पर गहरी चोट लगी और संजीव हेमा की अम्मा जी से तहे-दिल से नफरत करने लगे है।

हेमा भी इस घटना से खुश नही थी। हमने उनसे संजीव के विषय में बात चलाने की कोशिश की तो उसकी आंखे छलक आई। इतना ही कहा- ईश्वर के लिए कोई और बात कीजिये। स्पष्ट था कि संजीव ने हेमा के दिल में जो स्थान बना लिया था, वह आज तक कोई दूसरा व्यक्ति नही बना सका।

संजीव जितना भावुक है, उतना ही धैर्यवान भी तमाम मानसिक आघातों को सहता हुए वह अपने काम मे जी जान से लगे रहते है। यही कारण है कि वह अपने सशक्त अभिनय के लिए दो बार भरत पुरस्कार जीत चुके है। उन्होनें हेमा को किस कदर भुलाने की कोशिश की है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमने एक फिल्मी पार्टी में देखा। हेमा और संजीव दोनों ही इस पार्टी में आये थे। हेमा ने संजीव को देखा तो बड़ी उमंग से उसे हेलो कहा। संजीव ने बड़े ही अनजान और भोले स्वर में उत्तर दिया-‘ओह हेमा तुम्हारी जितेन्द्र से शादी हो गई क्या ? धत्त तेरे की मैं तो भूल ही गया था कि वह शादी तो होते-होते टल गई

इन वाक्यों ने हेमा के दिल पर जो चोट की होगी, उसे कोई भी समझ सकता है। हेमा ने दूसरे मेहमानों के साथ अपना दिल लगाने की कोशिश तो की किन्तु पार्टी में वह सारा समय उखड़ी-उखड़ी ही रही।

हेमा और जितेन्द्र की शादी चक्रवर्ती दम्पति ने बड़ी विचित्र स्थिति में तय की थी। हेमा और संजीव का अदृश्य बंधन टूट जाने से हेमा को गहरा सदमा लगा था। इस सदमें का लाभ उठाया धर्मेन्द्र ने। हेमा के दिल में जगह बना ली। हालांकि आरंभ में इसके पीछे धर्मेन्द्र का शुद्ध व्यावसायिक दृष्टि-कोण था और उसके पीछे भी हेमा को अम्मा का हाथ था।

हुआ यह कि हेमा का ध्यान (संजीव की ओर से) बंटाने के लिए श्रीमती चक्रवर्ती ने धर्मेन्द्र को बढ़ावा दिया। यह सोचकर कि धर्मेन्द्र एक शरीफ विवाहित इंसान है। यह कुछ कुछ ऐसे ही था जैसे दूध की रखवाली पर बिल्ली को चौकीदार बैठा देना। धर्मेन्द्र ने हेमा की रखवाली तो क्या करनी थी, स्वंय ही हेमा का अधिकारी बन बैठा। बात बढ़ गई तो चक्रवर्ती दम्पति फिर चौके यह क्या हो गया लेने के देने पड़ गये।

ऐसी विषम परिस्थिति में जितेन्द्र (स्वयं शोभा सिप्पी से छुटकारा पाना चाहता था) की ओर से विवाह-प्रस्ताव आया तो चक्रवर्ती-दम्पति ने बिना सोच-विचार के स्वीकार कर लिया। कहावत भी है सारा जाता देख कर आधा दोजै बांट

हेमा और जितेन्द्र ‘वारिस’ फिल्म में एक साथ काम किया था। उससे उनकी दो फिल्में एक साथ आई ‘भाई हो तो ऐसा और ‘गहरी चाल’ अभी भी वे दो फिल्मों में काम कर रहें है ‘खुश्बु’ और ‘दुल्हन’ हेमा ने जितेन्द्र को कभी भी लिफ्ट नही दी हालांकि जितेन्द्र ने समय-समय पर इस सम्बंध में प्रयत्न अवश्य किये थे, यह सोचकर कि कर्म करना मनुष्य का कर्तव्य है, फल देना हेमा के हाथ में है। चक्रवर्ती दम्पति ने हेमा को धर्मेन्द्र के चंगुल से बचाने के लिए इस विवाह का जोड़-तोड़ बिठाया। सारी तैयारी इतनी गुप-चुप की गई थी कि किसी को कानों-कान खबर नही लगी। ऐसी खबरों के लिये जीभ निकाले बैठे रहने वाले पत्रकार भी यहां चूक गये। जितेन्द्र के माता-पिता मद्रास में हेमा के घर चाय पीने नही गये थे। उनके साथ पंडित और परिचितों की पूरी बारात थी। हेमा ने भी मातृ-भक्ति के चक्कर में विवाह के लिए मरे मन से हां कर दी थी।

बम्बई में धर्मेन्द्र को इस विवाह की खबर लगी तो भाई को दिन में तारे नजर आ गये। आप सोचते होगें कि धर्मेन्द्र को हेमा से गहरा प्यार होगा अरे भई, वह तो है या नही, किन्तु धर्मेन्द्र की उन दर्जनों फिल्मों का भविष्य अंधकार में नजर आने लगा जिनमें हेमा और धर्मेन्द्र एक साथ काम रहे है। शादी के बाद हेमा का तो कुछ न बिगड़ता, हां, धर्मेन्द्र की पट्टरी साफ हो जाती। करोड़ों रुपये का सवाल पैदा हो गया।

धर्मेन्द्र ने तुरंत मद्रास का टिकट कटाया और पहली फ्लाइट से मद्रास जा पहुंचे। उधर शोभा सिप्पी भी हेमा के घर में जा पंहुची। दोनों ने वंहा जाकर ऐस हंगामा खड़ा किया कि विवाह टल गया। संजीव ने कहा था विवाह का सम्बंध बहुत कुछ ईश्वर के हाथ में है। शोभा सिप्पी पर यह कहावत एकदम सच सिद्ध हुई। जितेन्द्र ने शोभा सिप्पी से कितना ही बचना चाहा पर उनका विवाह होकर ही रहा।

धर्मेन्द्र को और भी खुली छूट मिल गई।

धर्मेन्द्र आजकल हेमा के जीवन में बुरी तरह घुस-पैठ कर चुके है। पार्टी वगैरह में दोनों भीड़ से अलग अंधेरे कोनों में चले जाते है और सारा समय एक साथ रहते है। महीने में पन्द्रह दिन उनकी शूटिंग एक साथ होती है। एक पार्टी में श्रीमती चक्रवर्ती ने खोज कर कहा भी था अगर यह (धर्मेन्द्र) हेमा को इतना ही अधिक चाहता है तो हेमा से शादी क्यों नही कर डालता ?

लेकिन धर्मेन्द्र हेमा से शादी नही कर सकता इसलिए कि धर्मेन्द्र विवाहित है. उसके पास सुशील पत्नी है, प्यारे प्यारे बच्चे है। धर्मेन्द्र इस मामले में सौभाग्यशाली है कि उनकी पत्नी प्रकाश अपने पति के कार्य-कलापों में अधिक रूचि नही दिखाती। दिन भर धर्मेन्द्र जो चाहे करे, रात को वापस घर आ जाये तो सब ठीक है।

इस रोमांस का क्या अंत होगा, इसकी भविष्यवाणी करना आसान नही है। कुछ नही कहा जा सकता कि दूल्हा विवाहित होगा या कुंवारा हेंमा की शादी होने पर ही इस सवाल पर अपने आप फुल-स्टाप लग जाएगा हेमा इस अंत को जानकर भी नही जानना चाहती। बहुत पहले हेमा विजय आनंद से प्रभावित थी। अपनी भावुकता में हेमा ने गोल्डी से विवाह का प्रस्ताव भी रख दिया था (लड़की लड़के के सामने विवाह का प्रस्ताव रखे है न उल्टी गंगा ) गोल्डी ने हेमा को समझाया था-शादी बरबादी है। देखती नही हो, शादी ने मेरे भाइयों की कैसी बुरी हालत कर रखी है, ……और बहुत पहले संजीव कुमार नूतन की तरफ आकर्षित होने लगे थे। कहते है, जब इस पारस्परिक आकर्षण के कारण नूतन ने संजीव कुमार को एक ऐतिहासिक चांटा मारा कर मामले का अंत कर दिया था। संजीव के गाल पर दूसरा चांटा हेमा की अम्मा ने मारा। पहला चांटा संजीव को लग कर भी नही लगा लेकिन दूसरा चांटा न लग कर भी गहरी चोट दे गया।

संजीव का नाम समय समय पर लीना, जया और अंजू महेन्द्र के साथ भी जोड़ा गया था। एक बार संजीव कुमार ने मिलकर पत्रकारों से कहा भी था आप लोग समझते क्या है ? राजेश खन्ना ने अंजू को छोड़ दिया तो मैं जाकर उससे विवाह कर लूंगा ? नानसेंस हम दोनों बहुत पहले से एक दूसरे को जानते है। मैं इसी कोशिश में हूं कि अंजू को दो- चार रोल मिल जाएं तो उसके सामने आर्थिक परेशानियां नही आयेंगी। बस इतनी सी बात है

पत्रकार उस समय तो समझ गये थे किन्तु अब समझ में नही आ रहा है कि संजीव कुमार जाहिरा और रीता अंचन में जो दिलचस्पी दिखा रहा है, वह रोल दिलाने की कोशिश’ है या वास्तविक है।

जो हो, हेमा और संजीव दोनों को अम्माओं ने ठान लिया है कि सन 1975 मे वे अपने अपने सुपुत्र सुपुत्री को गृहस्थी की गाड़ी में जोड़ देगी…और हां, इसी बीच डिब्बे में बंद ‘धूप-छाहं की शूटिंग पुन: शुरू हो गई है। शूटिंग दौरान हेमा की अम्मा संजीव और हेमा पर कड़ी दृष्टि रखती है हालांकि उसकी जरूरत है नही

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Mayapuri