कामिनी कौशल व दिलीप कुमार का इश्क

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मायापुरी अंक 01.1974

यह बात किसी से छिपी नही कि कामिनी कौशल और दिलीप कुमार की एक समय में बड़ी चर्चाएं थी कामिनी कौशल दिलीप को अपना दिल दे बैठी थी। यदि दोनों की कुछ विवशताएं न होती तो सम्भवत: आज सायराबानो की जगह कामिनी कौशल ही होती है। दिलीप कुमार केवल एक ही प्रेमाग्नि में जले हो ऐसी बात नही है, वे मधुबाला को को भी दिल से चाहने लगे थे। ‘मुगले आज़म’ की शूटिंग के दौरान वे इतने निकट आ गए थे कि एक दूसरे को देखे बिना सांस लेना भी उनके लिए मुश्किल था। दिलीप साहब जल बिन मछली की तरह मधुबाला के लिए तड़पने लगे थे। मधुबाला के पिता यह नही चाहते थे कि उनकी मधु उन्हें छोड़ कर दिलीप साहब का घर बसा ले। इसलिए मधु के पिता ने मधु पर काफी पाबन्दियां लगा दी। उसे एक प्रकार से घर में कैद कर दिया।

मधुबाला अपने प्रेम के आवेग में उन्मुक्त होकर इधर-उधर भटकती रहती थी। एक दिन वह अपने आवेग को रोक न सकी और दिलीप के सामने फूट-फूट कर रो पड़ी मधुबाला की यह हालत देख कर दिलीप कुमार का दिल भर आया और वे पागल से होकर शूटिंग छोड़ कर सीधे सितारा देवी के यहां पहुंचे सितारा के यहां बिस्तर पर गिर कर वे बच्चों की तरह रोने लगे। दिलीप कुमार की ऐसी हालत देख कर सितारा देवी घबरा गई। सितारा ने स्थिति को समझा और अपना दिल मजबूत करके दिलीप को खूब समझाया। उन्हें सांन्त्वना दी और बताया कि यदि उनका यही हाल रहा तो उनका करियर खत्म हो जाएगा। करियर की बात का असर दिलीप के दिल पर पड़ा और उन्होनें अपने आप को संभाला। सितारा देवी का कहना है कि यदि वह उन्हें ढाढ़स न दिलाती तो शायद वे अपनी प्रिय मधुबाला के प्रेम में पागल हो जाते या आत्महत्या कर बैठते। उन्होनें अब तक यूसुफ मियां यानि दिलीप को इस तरह बिलख-बिलख कर रोते नही देखा था। सितारा देवी ने उन्हें पानी पिलाया, काफी बना कर पिलाई और कहा, आप बेकार इस तरह परेशान हो रहे है। आप पर तो न जाने कितनी मधुबालाएं जान देने को तैयार है। आपके लिए एक नही अनेक मधुबालाएं तैयार हो जाएंगी। सितारा देवी की उन बातों का दिलीप पर असर हुआ और उन्होनें अपने करियर को खत्म नही होने दिया। आज भी दिलीप जब उस घटना को याद करते है तो रोमांचित हो उठते है।


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Mayapuri

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