दिलीप कुमारऔर राज कपूर की विरासत को क्या Pakistan अब सँवार सकेगा?

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हममें से ज़्यादातर लोग कभी न कभी, कहीं न कहीं से अपना घर द्वार छोड़कर आए होते हैं। कभी ये पलायन मजबूरी में होता है तो कभी अपने सपनों को पूरा करने की ललक हमें घर से दूर ले आती है। हम कितने ही दूर निकल जाएँ पर हमारी जड़ें हमसे जुदा नहीं होतीं। वो किसी न किसी तार के सहारे बंधी ही रहती हैं। कोई बिहार से दिल्ली आकर लिट्टी चोखा ढूँढता है तो कोई पेशावर Pakistan से आकर कवाब याद करता है 

ऐसी ही जड़ें दो महान कलाकारों की भी जुड़ी हैं। स्वर्गीय राज कपूर और पूर्व हरफनमौला ट्रैजडी किंग दिलीप कुमार एक समय पेशावर Pakistan के ‘किस्सा बाज़ार’ में पड़ोसी हुआ करते थे। तब दिलीप कुमार यूसुफ खान के नाम से बेहतर जाने जाते थे। यूं तो यूसुफ साहब से राज कपूर दो साल छोटे थे, लेकिन सन 88 में छोटे-बड़े के सारे फ़र्क किनारे करके वो दिलीप से माफी मांग आँख बंद करके लेट गए।

दिलीप साहब जब उनसे मिलने गए तो राज कपूर का हाथ पकड़कर बोले “ओए राज, राज सुन न, तू जल्दी से ठीक होजा मैं तुझे पेशावर लेकर चलूँगा, वहाँ हम फिर से वही चपली कवाब खाएंगे। मैं तो अभी पेशावर से होकर आया हूँ। आज भी वही स्वाद है। उठ जा राज, ठीक हो जा। फिर हम वापस अपने पुश्तैनी घर चलेंगे”

दिलीप साहब इंतज़ार करते रह गए लेकिन राज कपूर साहब फिर न उठे। तबसे कोई 32 साल बाद, Pakistan के खैबर पख्तूनख्वा टेरेटोरी ने ये फ़ैसला किया है कि दिलीप कुमार और राज कपूर जैसे दिग्गज अभिनेताओं के पुश्तैनी घरों को म्यूज़ियम यानी संग्रहालय में तब्दील किया जायेगा।

भले ही 70 सालों से चली आ रही Pakistan की सेंट्रल सरकारों को ये होश न रहा हो पर कम से कम खैबर पख्तूनख्वा की रियासत ने तो इतना सोचा कि दिग्गजों के घर को भी सम्मान मिलना चाहिए। हालाँकि ये प्रोपोज़ल एक अरसे से पाकिस्तानी हुकूमत को दिया जा रहा था। बहुत बात इसपर चर्चा भी हुई थी लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात रह जाता था। अब रियासत ने ये फ़ैसला लिया है तो ज़ाहिर है कि दोनों देशों के बीच चली आ रही लंबी तल्खी के बीच ज़रा सुकून की हवा चलने के आसार बन सकते हैं।

लेकिन हम आपको ये भी बता दें कि संग्रहालय बनेगा ही बनेगा ये अभी पूरी तरह से तय नहीं है। खैबर पख्तूनख्वा रियासत ने अधिनियम 1894 लगाकर दिलीप और राज साहब के घरों को अपने अधिकार में ज़रूर ले लिया है पर अभी फाइनल बिल सरकार और अदालत की तरफ से भी पास होना बाकी है। हम दो देशों के बीच एक लंबे वाकफ़े यानी पॉज़ के बाद कोई बात ऐसी आई है जो रिश्ता तोड़ने की नहीं जोड़ने की पहल करती है, ऐसे में हम उम्मीद करते हैं कि कोई अड़ंगा, कोई अवरोध बेवजह नहीं लगाया जाएगा और राज साहब न सही पर हम ये ख़बर दिलीप साहब को देने के बाद उन्हें मुस्कराता देख सकेंगे। (दिलीप साहब की उम्र अभी 98 वर्ष है)

सिद्धार्थ अरोड़ा ‘सहर’

 


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