मुबंई टॉकीज का नया हीरो – दिलीप कुमार

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मायापुरी अंक 51,1975

कुछ आपसी मतभेद के कारण मुंबई टॉकीज से एस. मुखर्जी और अशोक कुमार आदि अलग हो गए थे। जिसके कारण अशोक कुमार की जगह पूरी करने के लिए मुंबई टॉकीज़ को एक हीरो की तलाश थी, ताकि वह अपनी अगली फिल्म शुरू कर सकें जिसका निर्देशन अमिया चक्रवर्ती को सौंपा गया था।

आखिर काफी तलाश के बाद एक दुबला पतला शर्मिला नौजवान इस खेल के लिए लिया गया और एलान हुआ कि वह मुंबई टॉकीज की नई फिल्म का नया हीरो होगा। अमिया चक्रवर्ती ने नौजवान को देखा और दूसरों से परिचय कराया। के.एन. सिंह और दूसरे सीनियर आर्टिस्टों से कहा,

यह नया लड़का हीरो लिया है। जरा इसको एक्टिंग सिखाओ।

और फिर रोजाना इस नौजवान को रिहर्सल के लिए बुलाया जाता और सीनियर आर्टिस्ट उसे अभिनय सिखाते। वह नौजवान इतना खुश मिजाज और आज्ञाकारी था कि नसीहतों को बड़े ध्यान से सुनता और जो सिखाया जाता उसे दिल से करने की कोशिश करता। और यह उसी लगन का नतीजा है कि वह नौजवान पिछले 25 वर्षों से फिल्म इंडस्ट्री पर बेताज बादशाही कर रहा है।

जी हां, वह नौजवान आज का महान हीरो दिलीप कुमार ही है जिस ने ‘ज्वार भाटा’ में अमिया चक्रवर्ती के निर्देशन में अपनी फिल्मी जिंदगी को आरंभ किया था।

दिलचस्प बात यह है कि इस रोल के लिए राजकपूर ने भी काफी हाथ पैर मारे थे लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।


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Mayapuri

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