दिलीप कुमार सरकार ने प्रिय कलाकार

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DilipKumarMPos23nov2013

 

मायापुरी अंक 10.1974

फिल्म इंडस्ट्री में एक और कुमार साहब है जो सरकार से खूब बना कर रखते है। (अक्सर सितारों का सरकार से वह नाता होता है जो घोड़े और घास में है। सदके आयकर विभाग के !) वह है दिलीप कुमार जी। दिलीप साहब दिल्ली आते है तो कुछ कांग्रेंसी नेताओं से अवश्य मिलते है। ऐसा सुना जाता है कि उन नेताओं ने फिल्मी देवदास को विश्वास दिला दिया है कि देशभक्ति का धंधा भी ऐसा बुरा नही है. ताज्जुब नही, 1976 के लोक-सभा चुनाव में आप दिलीप साहब को वोटों के लिए किसी स्टेज पर गला फाड़ते सुने। हा, उस दशा में नेताओं की पत्नियों की तरह सायरा बानों Door to door canvassing शायद न करे।

‘संगीना’ के प्रदर्शन के बाद से ही दिलीप जी ने निकट भविष्य में फिल्मों से सन्यास लेने का फैसला कर लिया लगता है। (लीडर बनने की और पहला कदम !) हा, इंडस्ट्री छोड़ने से पहले दिलीप साहब इंडस्ट्री को दूसरा ‘दिलीप कुमार दे जाना चाहते है वह दूसरा ‘दिलीप कुमार’ आदिल आदिल ने पूना इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का कोर्स किया है। दिलीप कुमार उसे अपने घर बुलाकर टिप्स देते रहते है। पूना इंस्टीट्यूट का एक्टिंग-कोर्स काफी नही है क्या ?

पिछली बार दिलीप कुमार दिल्ली आए थे तो होटल में अपने ‘शूट’ पर नल बंद करना भूल गये। गई रात दिलीप साहब वापस लौटे तो ‘सूट’ में जैसे बाढ़ आई हुई थी। कहते है, भुलक्कड़पन महानता की निशानी है।

जब कभी दिलीप जी को याद आ जाता है कि वह एक महान कलाकार है तो वह अपनी महानता दिखाने से चूकते नही दिल्ली में क्रिकेट टीम की कप्तानी करने से पहले उन्होंने अधिकारियों के नाम एक तार भेजा था मेरे लिए New Gold बैट का इन्तजाम किया जाए वरना मैं क्रिकेट नही खेल सकूंगा। (इतना सीरियस मैच थोड़े ही था दिलीप साहब.) यह तार पाते ही अधिकारियों में खलबली मच गई। कोई जाना माना स्मगलर सब अंदर थे। सहसा एक दूरदर्शी व्यक्ति ने गलती पकड़ ली, दिलीप साहब ने Gold बैट नही, Good बैट मांगा है। अधिकारियां ने चैन की सांस ली।


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Mayapuri

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