डिम्पल कपाड़िया – मियां घर नहीं बीवी को

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मायापुरी अंक 54.1975
मुझे अपनी आंखो पर विश्वास नही हुआ। एक बार तो ऐसा लगा जरूर विहस्की का नशा है। मैंने यह कभी नही सोचा था डिम्पल कपाड़िया और चिंतू को एक साथ में देंखूगा। वह भी एक दूसरे की बांहो में एक दूसरे में खोये हुए नाच में मगन।
उस दिन मैं ऑबेराय कान्टीनैंटल के सैलर में अपनी एक मित्र के साथ दाखिल हुआ। थोड़ी देर बाद जब मैं डांस करने फ्लोर पर पहुंचा, तभी मेरी नज़र उन पर पड़ी। दूसरी ओर निगाह घूमी सिम्पल कपाड़िया भी दिखाई दी। वह रणजीत के साथ डांस कर रही थी। वह एक दूसरे से ऐसे चिपके हुए थे, जैसे एक आत्मा और दो बदन के मुहावरे को गलत साबित करना चाहते हो। इन्हें देखकर तो ऐसा लगा इनकी आत्माये भले दो हों लेकिन शरीर एक ही है।
अब मुझे ध्यान आया मैंने यह तो अच्छी तरह देखा नही, यहां कौन-कौन है। डांस करते करते मैंने चारों तरफ निगाह दौड़ाई। ज्यादातर अजनबी चेहरे दिखाई दिये, लेकिन एक कोने में डब्बू बैठा हुआ था। पांचों महाशय इकट्ठे आये है। डब्बू बड़े गौर से इन दोनों जोड़ियों को नाचते देख रहा था। मेरी निगाह चिंतू और डिम्पल की तरफ गई। डिम्पल दूसरी लड़की होने के बाद कुछ मोटी सी हो गई थी। चिंतू मुस्काते हुए डिम्पल को कुछ बता रहा था शायद बीती बातें याद दिला रहा था। रणजीत सिम्पल की तरफ देखता तो दोनों एक को किस कर रहे थे। मेरे कंधे पर मेरी मित्र के हाथ का दबाब पड़ा तो मैं समझ गया उसे मेरी यह तांक झांक पसंद नही है मैन उसकी तरफ देखा। उसकी आंखे मुझे भी वही सब करने का निमंत्रण दे रही थी। मेरे चेहरे पर एक उदासी भरी मुस्काहट आई और आंखो से मूक भाषा में बोला

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तुम मेरी तरफ यूं न देखो, मैं वह सब कुछ नही कर सकता हूं क्योंकि मैं एक स्टार नही बल्कि जर्नलिस्ट हूं यह तो शुक्र करो उनकी निगाहें मुझ पर नही पड़ी। वरना फिजूल में उनके रंग में भंग पड़ता तुम सोच रही हो मैं भी रणजीत सिम्पल की तरह क्यों नही बन सकता। इसलिए कि चाहे मैं कहूं या ना कहूं लेकिन अंदर से शुद्ध भारतीय हूं। यह लोग प्रेस वालों को कहते है वह भारतीय सभ्यता में विश्वास रखते है। लेकिन.. खैर छोड़ो… डिम्पल इसलिए यहां पर चिंतू के साथ है कि राजेश खन्ना आशिक हूं बहारों का की शूटिंग के लिए यूरोप गया है। नीतू सिंह भी कही आउटडोर गई होगी। डिम्पल बेचारी क्या करे? लगभग साल भर बोर होती रही गर्भवती थी। और बच्ची हुई। क्या हुआ किसी जर्नलिस्ट ने देखकर लिख दिया। साफ इंकार कर दिया जायेगा। इस बात का तो इनको पूरा हक है। खैर छोड़ो इनकी बातों को तुम्हें इंतजार करना पड़ेगा जब कि हम.. उसका हाथ ढीला पड़ गया। वह दूसरी ओर देखने लगी। उसके चेहरे के भाव बदल चुके थे। सोच रही होगी किस, बुद्दू से पाला पड़ा है कैसे निभेगी? मैंने नज़र बचाकर दूसरी ओर देखा दोनों जोड़ी आपस में मस्त थी। डब्बू उठकर रैस्तरां से बाहर जा रहा था। शायद किसी को मिलने या बबीता को फोन करने?


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Mayapuri

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