इत्तफाक से मिली डिंपल सदा के लिए

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मायापुरी अंक 50,1975

यह इत्तफाक तब हुआ जब राजेश खन्ना फिल्म ‘इत्तफाक’ में काम कर रहे थे। एक रोज जब राजेश किसी काम से एम. एस. रवेल के घर गये। तो रवेल ने उन्हें एक तेरह साल की बच्ची से मिलवाया। पतली दुबली-सांवली मगर पुरकशिश लगने वाली इस बच्ची से राजेश ने रस्मी तौर पर कुछ बातचीत की और चले आये। बात आयी गयी हो गई।

एक दिन जब वह अपनी प्रेमिका अंजू महेन्दू के साथ उस के बहनोई नवीन मारवा से मिलने उसके बंगले गया तो वहां उन्हें फिर वही लड़की नजर आयी, जो पांच छ: साल पहले रवेल के यहां मिली थी। राजेश को उस रोज वाली यह तेरह वर्षीय बच्ची, और आज बालिग लगने वाली इस दिलकश लड़की में इस बार भी कोई आकर्षण महसूस नही हुआ।

अक्सर जब इंसान किसी चीज के पीछे भागता है तो वह चीज उस से और दूर भागती है। मगर जब वही इंसान किसी चीज से लापरवाही जताता है, तो वह किसी ना किसी तरह उसके करीब आती जाती है। शायद इसीलिए प्रकृति ने चंद ही दिनों में उस लड़की को एक जीवन संगिनी के रूप में हमेशा के लिये राजेश को सौंप दिया।


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Mayapuri

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