डिंपल का डिंपल से मिलाप

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मायापुरी अंक 50,1975

एक जमाना था जब फ्लॉप कुमार व राजेन्द्र कुमार जुबली कुमार के नाम से याद किये जाते थे। राजेन्द्र कुमार का किसी फिल्म में होना ही उस फिल्म की सफलता का प्रमाण समझा जाता था। इस जुबली कुमार ने जब बान्द्रा के कार्टर रोड पर एक बंगला खरीदा, तो इस बंगले का नाम अपनी छोटी लड़की के नाम पर “डिंपल” रख दिया।

इधर बंगले का नाम ‘डिंपल’ पड़ा, उधर जुहू के किनारे एक रइस घराने में एक नन्ही सी कली ने जन्म लिया। यह एक खूबसूरत संयोग ही हुआ कि इस कली का नाम भी ‘डिपंल’ रखा गया। ‘डिंपल’ का मतलब है, गालों पर पड़ने वाला वह गढ़ा जिसे लोग खुशकिस्मती का प्रतीक समझते हैं।

मगर दुर्भाग्य से, खुशकिस्मती का प्रतीक यह डिंपल, राजेन्द्र कुमार के लिए गुमनामी और असफलता का गहरा गार प्रमाणित हुआ। और कुछ ही समय में उसकी गिनती जुबली कुमार की जगह फ्लॉप कुमार में होने लगी।

तब तक फिल्म आकाश पर एक नया सितारा अपनी चमक धमक के साथ आ चुका था यह था राजेश खन्ना। राजेन्द्र ने अपने बंगले ‘डिंपल’ को राजेश के हवाले कर दिया। जिसे राजेश ने ‘आशीर्वाद’ के नाम से याद किया। इस आशीर्वाद ने कुछ ऐसा चमत्कार दिखाया कि डिंपल नामी बंगले के बाद एक सचमुच की डिंपल (सुन्दर जीवनी संगिनी के रूप में) ने उस के जीवन में प्रवेश किया। और राजेश ने सोचा। क्यूं ना मैं इस बंगले को फिर से एक बार उस का पुराना नाम लौटा दूं। और इस तरह एक डिंपल (लड़की) से दूसरे डिंपल (बंगले) का खूबसूरत मिलाप हुआ।


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Mayapuri

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