मूवी रिव्यू: फुल मस्ती भरी मनोरंजक फिल्म है – ‘डायरेक्ट इश्क’

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रेटिंग***

ये बात कई बार साबित हो चुकी है कि किसी भी फिल्म की रीढ़ स्क्रिप्ट होती है। राजीव रूईया की फिल्म ‘डायरेक्ट इश्क’ इस बात का ताजा उदाहरण है। लेखक और गीतकार एम ए तूराज द्वारा लिखी ये फिल्म हर मायनों में अच्छी फिल्म साबित हुई है।

कहानी

बनारस का युवा वर्ग जहां डॉली पांडे (निधि सुबैया) की खुबसूरती से प्रभावित हैं वहीं उसके डर से  भयभीत भी क्योंकि डॉली लड़कियों को छेड़ने वालों को जरा भी नहीं बख्शती। वैसे वो अपने पिता का सपना पूरा करने के लिये रॉक स्टार बनना चाहती हैं। फिलहाल उसका बैंड लोकल शो करने पर मजबूर है। बनारस में ही अपनी जांबाजी और दरियादिली के लिए मशहूर विक्की शुक्ला (रजनीश दुग्गल) बनारस युनिवर्सिटी का अध्यक्ष हैं तथा मूलतया बनारस का है लेकिन मुबंई में एक इवेंट कंपनी चलाने वाले कबीर वाजपेयी(अर्जुन बिजलानी) की दादी उसकी जल्दी ही शादी कर देना चाहती हैं लिहाजा उसे एक अदद लड़की की तलाश है। अचानक वो एक दिन डॉली से टकराता है तो फौरन उसे अपना दिल बैठता है। इसी प्रकार विक्की का भी डॉली से एक ही नजर का प्यार हो जाता है। यहां से कहानी में एक फूल दो माली वाला किस्सा शुरू हो जाता है। अब अंत में डॉली किसे मिलती है इसके लिये आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

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निर्देशन

राजीव की इससे पहले माई फ्रेंड गणेशा सीरिज हिट रही, वहीं उन्हें ‘जिन्दगी 50/50’ के तहत असफलता का स्वाद भी चखना पड़ा लेकिन इस फिल्म में अगर कुछ खामियों को नजरअंदाज कर दिया जाये तो यह फुल एन्टरटेनमेन्ट फिल्म है। फिल्म की शुरूआत में दो तीन लोगों को डॉली द्वारा अपने गाल को छूने जैसे संवाद अटपटे लगते हैं इसके अलावा मुख्य किरदारों के आसपास के चेहरे भी अटपटे लगते हैं खासकर रजनीश के चार दोस्त हैं लेकिन बाद में राजीव ने बनारस में आधुनिक किरदारों का सामंजस्य बड़ी खूबसूरती से सेट किया है। फिल्म की कास्टिंग अच्छी है। फिल्म की कथा पटकथा तो चुस्त दुरूस्त है ही लेकिन तूराज ने संवाद बहुत ही चटपटे और मसालेदार लिखे हैं। गंगा के घाटों की दिनचर्या की झलक भी फिल्म की बैकग्राउंड मजबूत करती है।

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अभिनय

विक्की शुक्ला के मस्तमौला किरदार में रजनीश दुग्गल द्वारा की गई मेहनत साफ झलकती है उसने अपनी भूमिका में घूसकर अभिनय किया है। फिल्म की दूसरी यूएसपी है निधि सुबैया, पहली फिल्म में ही उसका आत्मविश्वास देखते बनता है। अर्जुन बिजलानी ठीक ठाक रहे। पीपली लाइव फेम दादी इस फिल्म में भी ध्यान आकर्षित करती हैं। हेमंत पांडे अपनी छोटी सी भूमिका में ही एहसास करवा जाते हैं  कि वे महज कॉमेडियन ही नहीं बल्कि ग्रे शेड रोल भी उतनी ही खूबसूरती से निभा सकते हैं। तूराज ने एक्टिंग में भी हाथ आजमाये हैं जिसमें वे एक हद तक सफल रहे हैं।

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संगीत

खट्टा नींबू गाना अच्छा बन पड़ा है। बाकी गाने काम चलाऊ हैं।

क्यों देखें

मिक्स एंटरटेनमेंट के शैदाई दर्शकों को लिये फिल्म में सुब कुछ है, यानि फुल मस्ती भरा मनोरंजन।

 

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Mayapuri