डायरेक्टर्स भी अपनी और दूसरों की फिल्मों में अभिनय करने को आतुर

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एक समय था जब कोई एक्टर या डायरेक्टर फ्लॅाप हो जाता था तो वो अभिनय में अपने पांव जमाना शुरू कर देता था लेकिन वहां कुछ ही को सफलता हासिल हुई। लेकिन इन दिनों तो एक दूसरे की फिल्मों में डायरेक्टरों के अभिनय करने की जैसे बाढ़ सी आ गई है। अभिनय करने को आतुर इन निर्देशकों में शामिल हैं अनुराग कश्यप, तिग्मांशू धूलिया, मधुर भंडारकर, करण जौहर तथा सुधीर मिश्रा आदि। सबसे पहले मधुर भंडारकर ने सुधीर मिश्रा को फिल्म ‘ट्रैफिक सिंग्नल’ में नकारात्मक भूमिका सौंपी थी। उसके बाद अनुराग कश्यप सबसे पहले फिल्म शागिर्द में एक छोटी सी भूमिका में नजर आये उसके बाद तो वे फिल्म लक बाई चांस में फुल फ्लैज एक्टिंग करते नजर आये। इसी तरह अनुराग कश्यप ने सबसे पहले लेखक निर्देशक तिग्मांशू धूलिया को फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर में एक नेता के रोल में लिया था। फिर वे मांझी में भी नगेटिव रोल करते नजर आये। उसके बाद तिग्मांशू को सलमान खान की फिल्म हीरो में कमिश्नर की भूमिका करते हुये देखने के बाद तो लोगों को लगने लगा कि शायद तिग्मांशू की निर्देशन की दुकान पूरी तरह से बंद हो चली हैं इसीलिये वे लगातार फिल्मों में एक्टिंग करते दिखाई दे रहे है और तो और करण जौहर को तो अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म बाम्बे वेलवेट में बाकायदा बतौर विलन गाजे बाजे के साथ लांच किया था। हालांकि इसे एक्टिंग तो नहीं कहा जा सकता फिर भी मधुर भंडारकर भी अपनी फिल्म कैलेंडर गर्ल्स में अपनी ही भूमिका करते नजर आये। अब सवाल ये है कि ये सभी पहले से ही इतने लोकप्रिय निर्देशक हैं तो फिर ये अपनी या दूसरों की फिल्मों में रोल्स कर क्यों अभिनेताओं के पेट पर लगातार लात मारे चले जा रहे हैं ?

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Mayapuri